Unique Indian Wedding: आमतौर पर भारतीय शादियों का जिक्र आते ही हर कोई सोचता है, लड़का बारात लेकर जाएगा, बेटी का कन्यादान होगा, सात फेरे होंगे और फिर पारिवारिक रस्मों के साथ बेटी की बिदाई... लेकिन इन रस्मों के विपरीत आज के आधुनिक दौर में कुछ भारतीय शादियां ऐसी भी हुई हैं, जो अपने अनूठेपन के कारण चर्चा में छा गईं, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, समेत देश के अन्य राज्यों में भारतीय वैवाहिक परम्पराओं के अनोखे रंग आपको भी कर देंगे हैरान
Unique Indian Wedding: बाबुल की दुआएं लेती जा, जा तुझको सुखी संसार मिले… भारतीय शादियों में सुनाई देने वाला ये गीत हर किसी को भावुक कर देता है। एक समय ऐसा था कि बिदाई के समय अकेली दुल्हन नहीं रोती थी, दुल्हन के आंसू और ये गीत सुनकर शादी में आए मेहमान तक रो देते थे। ये शादियां सोशल मीडिया के दौर में रील्स में, वीडियोज में देखी जा सकती हैं। लेकिन अब इन भारतीय शादियों की तस्वीर बदल चुकी है। आज यहां न दूल्हे के घोड़ी पर बैठकर बारात ले जाने की बात है और न ही बेटी की बिदाई की इमोशनल कहानी की… patrika.com पर आज आप जानेंगे ऐसी अनोखी शादियों के बारे में जो चर्चा में भी आई और हर किसी को हैरान भी कर गईं।
मध्यप्रदेश. प्रदेश के राजगढ़ जिले के पीपलहेला गांव में एक शादी समारोह में अनूठी रस्म (Unique Indian Wedding) देखने को मिली। भाई अपनी बहन का भात भरने बैलगाड़ी से मायरा लेकर पहुंचे। इस अनूठे दृश्य ने न केवल ग्रामीण संस्कृति को जीवंत किया, बल्कि वहां मौजूद लोगों के लिए मायरा एक यादगार पल बन गया। भोपाल दुग्ध संघ के कार्यकर्ता पारंपरिक अंदाज में बैलगाड़ी से मायरा लेकर पहुंचे। नगर में जुलूस के साथ बहन का भात भरा गया। मायरा योजना के तहत महिला दुग्ध सहकारी समिति मर्यादित पीपलहेला में यह आयोजन किया गया।
संघ के महाप्रबंधक विजयवर्गीय, नोडल अधिकारी शिवानी सहित कई लोग सुपरवाइजर रानी नागर पिता राकेश नागर, बड़ा कुआं के घर मायरा लेकर पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करते हुए बैलगाड़ी में सामान सजाकर यात्रा की।
भात या मायरा के सामान से सजी ये बैलगाड़ी देख गांव में रहने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई। मायरे में 11,000 कैश, कपड़े, फल और अन्य उपयोगी सामग्री भेंट की गई। समिति अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रेम सिंह और सचिव हेमराज नागर ने अतिथियों का पारम्परिक तरीके से साफा बांधकर स्वागत किया। पूरे कार्यक्रम में ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। बैलगाड़ी से मायरा लाने की इस रस्म ने वहां मौजूद सभी लोगों को को भावुक कर दिया। इस एक रस्म ने अपनी संस्कृति को जीवंत करने के साथ ही बुजुर्गों की यादों को ताजा कर दिया।
राजगढ़ जिले के बोड़ा से लगे निपानिया गढ़ी गांव में आसमान से बहू को उतरते देखने पूरा गांव एक जगह जमा हो गया। यह नजारा देखने दुल्हन के गांव के साथ ही आसपास के गांवों से पहुंचे हजारों ग्रामीणों के चेहरे खुशी से गुलाबी हो गए। पंचायत सरपंच रामबाबू ठाकर ने अपने बेटे अनमोल की शादी (Unique Indian Wedding) को एक यादगार और ऐतिहासिक पल बना दिया। बेटे अनमोल की बारात शाजापुर जिले की कालापीपल विधानसभा के ग्राम कोड़ी पहुंची और बहू को आसमान के रास्ते उसके ससुराल लेकर लौटी। इस अनूठी शादी में दूल्हा घोड़ी, ऊंट या कार में नहीं, बल्कि हेलीकॉप्टर में सवार होकर अपनी दुल्हनिया लेने पहुंचा था।
एक शादी में दूल्हे की शाही एंट्री दिखावे की नहीं, बल्कि दादाजी का सपना पूरा करने वाली भावुक कहानी जुड़ी है। दूल्हे का कहना है कि उसके दादा देवचंद का सपना था कि उनका पोता अपनी शादी में कुछ ऐसा करे जो मिसाल बन जाए। दादा की इसी इच्छा को सम्मान देते हुए सरपंच रामबाबू ने हेलीकॉप्टर का इंतजाम किया। खास बात यह रही कि हेलीकॉप्टर में दूल्हा अपने दादा, नाना के साथ बैठकर दुलहन को लेने ग्राम कोड़ी पहुंचा।
जैसे ही गांव कोड़ी के आसमान में हेलीकॉप्टर की गड़गड़ाहट सुनाई दी, पूरे गांव में जश्न का माहौल बन गया। हेलीकॉप्टर को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी हजारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी ने इस दुर्लभ पल (Unique Indian Wedding) को अपने मोबाइल और कैमरों में कैद कर लिया।
शादी की भव्यता और आधुनिकता के बीच जिले में रूढ़ियां भी टूटती नजर आ रही हैं। इसी कड़ी में राजगढ़-ब्यावरा जिले के अधिकांश गांवों में निकलने वाले प्रोसेशन (बाने) में परम्पराएं बदल गईं। दूल्हे को घोड़ी चढ़ाने के साथ ही बारात में हाथी, ऊंट भी नजर आने लगे हैं। लेकिन इस बार बराबरी का संदेश देने दूल्हे ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अपनी बेटी की शादी में उसे भी घोड़ी चढ़ाने की परम्पराएं बना भी रहे हैं।
राजगढ़ जिले के माचलपुर से लगे डूंगरी गांव में रहने वाले महेश पाटीदार ने अपनी बेटी शिवानी के विवाह के दौरान निकले बाने में उसे घोड़ी पर बैठाने की परम्परा कायम रखी। सभी के चेहरे खिले थे। बेटी की ऐसी बिंदौरी (Unique Indian Wedding) ने ग्रामीणों का दिल जीत लिया।
छत्तीसगढ़. राज्य के सरगुजा में एक अनोखी शादी (Unique Indian Wedding) हुई। आमतौर पर दूल्हे बारात लेकर दुल्हन के घर जाते हैं और दूल्हन बिदा होकर दूल्हे के घर आती है। लेकिन छत्तीसगढ़ में इसके विपरीत एक शादी हर किसी के लिए हैरानी का विषय बन गई।
दरअसल यहां दुल्हन खुद बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंची। शादी की जो रस्में दुल्हन की ओर से निभाई जाती हैं, वे सभी रस्में दूल्हे के घर से निभाई गईं। रस्में पूरी होने के बाद भावुक करने वाला वो पल भी आया जिसे बिदाई कहते हैं। लेकिन यहां बिदाई भी दूल्हे की हुई। और तब हर किसी की आंखें नम थीं, जब दूल्हा अपनी ही बिदाई में फूट-फूटकर रोता नजर आया।
मामला मैनपाट ब्लॉक के सुपलगा गांव का था। यहां की निवासी दुल्हन देवमुनी एक्का की चार बहनें हैं। उसका कोई भाई नहीं है। जबकि पिता इलाके के बड़े किसान हैं। पिता को अपनी बेटी के लिए ऐसे दूल्हे की तलाश थी, जो शादी के बाद घर जमाई बन सके। उन्हें ऐसा रिश्ता चाहिए, कि उन्हें दामाद के रूप में एक बेटा मिले। उनका कहना था कि उनका दामाद उनके परिवार के बीच रहकर बेटे का फर्ज भी निभा सके। इसके बाद देवमुनी एक्का की शादी सुपलगा गांव के बिलासुस बरवा से तय हो गई।
बिलासुस बरवा और उसके परिवार ने घर जमाई बनने के लिए सहमति दे दी। इस सहमति के बाद दोनों की शादी तय हो गई। बस जैसे ही शादी संपन्न हुई तब से बिलासुस और देवमुनी एक्का की शादी की रस्में और कसमें पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। शादी के लिए देवमुमी एक्का बारात लेकर बिलासुस के घर पहुंची थी। यहां शादी की सारी रस्में निभाई गईं। शादी की रस्में पूरी होने के बाद दूल्हे की इमोशनल बिदाई ने हर किसी को रुला दिया।
केरल. राज्य के कोट्टायम में एक शादी की चर्चा सोशल मीडिया पर जोरों पर है। यहां चर्च में एक विवाह फेरों के साथ संपन्न किया गया। इस शादी में एक ईसाई पादरी को एक दुल्हन के लिए एक जरूरी हिंदू रस्म निभाई है।
इस अनोखी शादी में फादर ने पिता बनकर दुल्हन का कन्यादान किया। बताया जा रहा है कि लड़की बचपन में ही अनाथ हो गई थी। हिंदू परिवार की इस बच्ची को पादरी ने ही पाल-पोसकर बड़ा किया। उसके बाद हिंदू लड़के से उसकी शादी करवाई है। ऐसे में चर्च में हिंदू-रीति रिवाज हुई इस अनोखी शादी ने इंसानियत, रिश्तों और धार्मिक सीमाओं से परे परिवार के असली अर्थ की परिभाषा गढ़ दी है।
हिमाचल प्रदेश. प्रदेश की एक अनोखी शादी (Unique Indian Wedding) उस वक्त चर्चा में आ गई, जब इस जोड़े के घर एक नन्हे मेहमान का आगमन हुआ। यह बच्चा सिरमौर जिले के एक ऐसे परिवार में पैदा हुआ है, जो पारम्परिक 'जोड़ीदार' प्रथा का पालन करता है। इस प्रथा के मुताबिक एक महिला की शादी दो या दो से अधिक भाइयों से की जाती है।
सुनीता चौहान, जिन्होंने इसी प्रथा के अनुसार प्रदीप नेगी और कपिल नेगी से शादी की थी, ने एक बच्चे को जन्म दिया है, जिससे पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है और हमें बहुविवाह की परम्परा की याद दिला गई। बच्चे के इस जन्म के बाद एक पिता घर पर मौजूद रहकर इस खुशी के पल का जश्न मना रहा है, तो दूसरा, जो इस समय विदेश में हैं, वह सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर कर अपनी खुशी का इजहार कर रहा है।
अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए, विदेश में रह रहे पिता ने पोस्ट में लिखा है कि बच्चे के आने से उनकी जिंदगी पूरी हो गई है और वह जल्द से जल्द घर लौटकर उसे को गोद में लेने और पिता बनने की खुशी का अनुभव करना चाहते हैं। उन्होंने लिखा है कि वह उस पल का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
बता दें कि 'जोड़ीदार' या 'बहुपति' प्रथा, जिसका पालन सिरमौर के कुछ हिस्सों में आज भी किया जाता है। इस परम्परा के तहत वहां आज भी एक ही परिवार के दो या दो से ज्यादा भाई एक ही युवती से शादी कर सकते हैं। दरअसल यह प्रथा जमीन को बंटने से रोकने में मदद करती है और पहाड़ी इलाके में परिवार को एक रखती है। पत्नी आपसी सहमति से हर भाई के साथ रहती है और सभी बच्चों को एक परिवार की तरह एक साथ पाला जाता है।हालांकि अतीत में ऐसी प्रथाओं (Unique Indian Wedding) का चलन ज्यादा था।