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एमपी में जन्मे अनूठे बच्चे, जन्म लेते ही चर्चा में छाए, लोग ही नहीं डॉक्टर्स भी हैरान…

Bizarre baby born in MP: मध्य प्रदेश में हाल ही में इंदौर में दो सिर वाली बच्ची ने जन्म लिया, ये ऐसे बच्चों में शामिल हो गई, जो देश-दुनिया के लिए अजूबा बन गए। न सिर्फ आम लोग, बल्कि डॉक्टर्स को भी इन दुर्लभ शिशुओं ने चौंका दिया। इनकी शारीरिक संरचना, रंग या बनावट सामान्य शिशुओं से इतर थी। सोशल मीडिया से लेकर मेडिकल जगत तक चर्चा का विषय बने, किसी पर चमत्कार का ठप्पा लगा, तो किसी पर अभिशाप का, यही नहीं इन शिशुओं के जन्म की घटनाएं इंसानी जन्म और जैविक विविधता की जटिलताओं को भी उजागर करती हैं। पढ़ें संजना कुमार की विशेष रिपोर्ट...

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Aug 04, 2025
Bizarre baby born in mp facts reason

Bizarre baby born in MP: मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हाल ही के कुछ वर्षों में ऐसे बच्चों (Unique Baby born in MP) का जन्म हुआ जिसने आम व्यक्ति को ही नहीं बल्कि डॉक्टर्स को भी चौंका दिया। इन बच्चों की शारीरिक बनावट, रंग या संरचना आमतौर पर जन्म लेने वाले बच्चों से बिल्कुल अलग थी। ये ऐसे मामले थे जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए। बात चाहे दो सिर वाली बच्ची की हो, बिना हाथों वाले शिशु की या फिर एलियन जैसे या भगवान हनुमान जैसी पूंछ के साथ जन्म लेने वाले बच्चों की, इनके पीछे का रहस्य क्या है, क्या ये वाकई कोई चमत्कार (Miracle baby) है, कर्म का फल, गर्भावस्था में मन में आने वाले विकृति लिए बच्चे के डर का ख्याल या बातों का असर है या फिर कोई जेनेटिक कारण…

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केस: 1

2025- हाल ही में बेगमगंज सिविल अस्पताल, रायसेन- बिना हाथों वाली बच्ची का जन्म। सीबीएमओ डा. नितिन सिंह तोमर कहते हैं कि ग्राम देवलापुर निवासी मजदूर अरबाज खान की पत्नी रोशनी की यह पहली डिलीवरी थी, गांव की आशा कार्यकर्ता के जरिए रोशनी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रोशनी ने खूबसूरत बेटी को जन्म दिया, लेकिन दुर्भाग्य से उसके दोनों ही हाथ नहीं हैं, कंधों से ही हाथों का अभाव था। अब कई लोग इस बच्ची के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

केस: 2

2025 में ही इंदौर में दो सिर वाली बच्ची का जन्म हुआ। जिसे देखकर डॉक्टर्स भी हैरान रह गए।

two head baby girl born in indore(image source: social media)

केस: 3

2024- संजय गांधी अस्पताल, रीवा- इस बच्चे के सिर का आकार सामान्य से बड़ा, आंखें उभरी हुईं और स्किन का रंग काला-कत्थई था, इसे देखकर लोगों ने इसे एलियन जैसा बच्चा कहना शुरू कर दिया।

केस: 4

2022- जिला अस्पताल, विदिशा - एक महिला ने ऐसे शिशु को जन्म दिया जिसके चार हाथ और चार पैर थे।

केस: 5

2022- जिला अस्पताल, रतलाम- इस बच्चे के दो मुंह थे, तीन हाथ थे। तीसरा हाथ दोनों सिर के बीच में पीठ की तरफ था। डॉक्टर्स का कहना था कि ये दुर्लभ केस है, ऐसा बच्चा लाखों में एक होता है। इस बच्चे को डॉक्टर्स ने जान का खतरा भी बताया था।

two face and three hands rarest baby was born in MP(image source:social media)

केस: 6

2022- जिला अस्पताल, ग्वालियर - बच्चे की स्किन बेहद सख्त और एक सांप की खाल जैसी दिखाई दी। यह स्थिति Ichthyosis नामक दुर्लभ बीमारी के कारण थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इस बच्चे का इलाज नहीं करवा पा रहा था, लेकिन बाद में सोशल मीडिया पर अपील की गई, तब सरकार और कुछ NGO आगे आए।

केस: 7

2022- जिला अस्पताल- बड़वानी- बिना हाथ वाली बच्ची का जन्म, 2 किलो 800 ग्राम की बच्ची को देख परिवार को भगवान से कोई शिकायत नहीं थी, डॉक्टर्स का कहना है कि लाखों में एक ऐसा मामला सामने आता है, आनुवंशिक कारणों से ऐसे मामले सामने आते हैं।

केस: 8

2021- जिला अस्पताल, सागर- एक मां ने ऐसे नवजात को जन्म दिया, जिसकी पीठ पर मांस का टुकड़ा उभरा हुआ था। ये हिस्सा ऐसा था, जैसे कछुए की पीठ का खोल। डॉक्टर्स का कहना था कि ये एक तरह का दुर्लभ केस है, जो Spina Bifida नामक जन्मजात न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर माना गया है। ये लगातार बढ़ता रहता है, ऑपरेशन के माध्यम से पीठ पर होने वाली इस ग्रोथ को शरीर से अलग कर दिया गया।

केस: 9

2020- झाबुआ- आदिवासी माता-पिता से जन्मा बच्चा अत्यधिक गोरा और सुनहरे बालों वाला, डॉक्टर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ये एक तरह का जेनेटिक म्यूटेशन है, जिसे Albinism कहा जाता है। इससे स्किन और बालों में मेलानिन नहीं बनता।

इसका सामाजिक असर ये दिखा कि पूरे गांव में इसे दैवीय बच्चा कहा जाने लगा। परिवार को अंधविश्वासों से बचाने के लिए प्रशासन ने काउंसलिंग तक करवाई थी।

केस: 10

2020- जिला अस्पताल, विदिशा- केवल सिर और धड़ वाली अनोखी बच्ची का जन्म, जिसके हाथ थे न पैर, इससे पहले आस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में ऐसे बच्चों के केस सामने आ चुके हैं। विदिशा जिले के सिरोंज के सांकला गांव में इस बच्ची का जन्म हुआ।

baby girl was born without hands and legs in vidisha MP rarest baby born(Image Source: social media)

केस: 11

2019- विदिशा- दो सिर और तीन हाथ वाले बच्चे का जन्म, जिसे देख कर हर कोई हैरान था, गर्दन से दो सिर जुड़े थे, वहीं दो अलग-अलग चेहरे और तीन हाथ थे। गंभीर हालत देखते हुए इस बच्चे को विदिशा से भोपाल रैफर किया गया था।

Tips During Pregnancy (Image source: social media)

Rarest Newborn Baby in MP(Image Source: social media)

क्या इन बच्चों का जन्म केवल संयोग?

इन मामलों में कई वैज्ञानिक व्याख्याएं मिलती हैं… लेकिन इनकी आवृति, स्थान और जन जागरुकता की कमी ऐसे मामलों को कभी 'रहस्यमयी', तो 'कभी ईश्वर का चमत्कार', तो कहीं 'अभिशाप' बना देती हैं। दरअसल समस्या ये नहीं होती कि ये बच्चे देखने में सामान्य बच्चों से अलग और अनोखे दिखते हैं, बड़ी चुनौती जो सामने होती है वो होती है सामाजिक प्रतिक्रियाएं, अंधविश्वास और इस पर चिकित्सा संसाधनों की कमी का हाल किसी से छिपा नहीं है। ऐसे कई उदाहरण हैं, जो मुश्किल हालात में अनोखे बच्चों और उनके परिवार के संघर्ष और बढ़ा देते हैं, परिस्थितियां तब और बुरी हो जाती हैं, जब वो आर्थिक रूप से कमजोर हों...

1- रीवा में एलियन जैसे बच्चे को देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई। इससे अस्पताल के ICU वार्ड का कार्य बाधित हुआ।

2. ग्वालियर में सांप जैसी स्किन वाले बच्चे को परिवार ने यह कहते हुए त्याग दिया कि उनके परिवार में किसी पिशाच का जन्म हुआ है।

Tetra amelia syndrome(image source: social media)

अनूठे बच्चों को भी मिले अवसर

इन बच्चों के साथ समाज को समझदारी से व्यवहार करने की आवश्यकता है, हर बच्चे को हमारे संविधान ने समान अधिकार दिए हैं, इलाज और सम्मान हमारे हाथ में है। ऐसे बच्चों को उनके परिवारों को कठिन सामाजिक परिस्थितियों से निकालना बेहद जरूरी है, तो जिन्हें जरूरत है उनके लिए सामाजिक संस्थाएं, एनजीओ, सरकारी संस्थाओं को आगे आना होगा।

अंधविश्वास से बचने चलाएं अभियान

अंधविश्वास (Superstition) जैसी परिस्थितियों से बचने के लिए जन-जागरुकता अभियान चलाए जाने चाहिएं, क्योंकि ये मेडिकल स्थितियां हैं, कोई दैवीय चमत्कार नहीं है। वहीं इस तरह के बच्चों के लिए सरकारी सहायता से इलाज और पुनर्वास योजनाएं संचालित की जानी चाहिएं।

-सविता जैन, सामाजिक कार्यकर्ता और एनजीओ वर्कर, भोपाल

Pregnancy Test (image source: social media)

गर्भस्थ महिला देखे भगवान की सूरत, ग्रहण पर न करे कैंची, चाकू का यूज

दादी-नानी के जमाने में एक मान्यता बेहद प्रचलित थी कि गर्भावस्था के दौरान गर्भवती को अपने कमरे में ही भगवान की तस्वीर लगा देनी चाहिए, ताकि सोते-जागते उसके मन में भगवान की सूरत बसी रहे, यही नहीं सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान भी गर्भवती महिलाओं को हाथ-पैर मोड़कर बैठने, कुछ भी खाने-पीने से बचने और चाकू या कैंची का इस्तेमाल करने की हिदायत हर कोई देता था। ये मान्यताएं आज भी हमारे सामाजिक परिवेश का हिस्सा हैं और आधुनिक दौर में भी कई परिवार इन मान्यताओं का पालन करते हैं। और जब ऐसी शारीरिक विकृति लिए संतान का जन्म होता तो... दोष गर्भवती के सिर मढ़ दिया जाता है कि इसने भगवान को याद नहीं किया, इसने भगवान की तस्वीर नहीं देखी, यहां तक कि आस-पड़ोस से आने वाली औरतें भी ताना सुनाते पीछे नहीं हटतीं कि ग्रहण के दौरान कैंची या चाकू का इस्तेमाल किया होगा... लेकिन क्या वाकई ये मान्यताएं और अपंग बच्चे के जन्म होने का डर या किसी भी तरह की मनोदशा ऐसे विकृति लिए बच्चों के जन्म का कारण हो सकती है? जानें क्या कहते हैं मनोचिकित्सक....

Genetic Disorder case
Rarest newborn baby cases

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Published on:
04 Aug 2025 03:08 pm
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