US Army in Europe: अमेरिका ने यूरोप के जर्मनी, इटली, ब्रिटेन, स्पेन और तुर्किये समेत कई देशों में हजारों सैनिक तैनात कर रखे हैं। यूरोप के अलग—अलग देशों में अमेरिका के करीब 70 हजार से ज्यादा सैनिकों की तैनाती है। अमेरिका को अपने सैनिकों की दुनिया के दूसरे मुल्कों में पोस्टिंग करने की क्या दरकार है? इसके पीछे उनकी रणनीति क्या है, इसे विस्तार से समझते हैं।
US Army In Europe: वैश्विक कूटनीति और रक्षा रणनीतियों के मोर्चे पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दशकों तक यूरोप को अपना सबसे अहम सुरक्षा घेरा मानने वाले अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाने वाला है। अमेरिकी रक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, आज भी यूरोप के कई देशों में हजारों अमेरिकी सैनिक दिन-रात तैनात रहते हैं। हालांकि इस बीच अमेरिका अपने सबसे बड़े सैन्य अड्डे जर्मनी से 5,000 जवानों को वापस बुलाने जा रहा है। दुनिया की सबसे ताकतवर सेना यूरोप से अपने कदम पीछे क्यों खींच रही है? क्या अमेरिका का फोकस अब यूरोप से हटकर किसी नए मोर्चे पर शिफ्ट हो रहा है? इस रणनीति को समझते हैं।
यूरोप में अमेरिका की सबसे ज्यादा सेना जर्मनी में तैनात है। यहां करीब 36,436 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। जर्मनी को अमेरिका का यूरोपीय सैन्य हेडक्वार्टर भी कहा जाता है। जर्मनी यूरोप के बीचोंबीच स्थित है, इसलिए यहां से अमेरिका पूरे यूरोप में तेजी से सैन्य गतिविधियां चला सकता है। रामस्टीन एयर बेस जैसे बड़े सैन्य ठिकाने अमेरिका के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। मुख्य कारण यह है कि जर्मनी में अमेरिकी मौजूदगी सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि रूस को संतुलित रखने की रणनीति का हिस्सा भी है।
इटली में अमेरिका के 12,662 सैनिक मौजूद हैं। भूमध्यसागर के पास होने की वजह से यह देश अमेरिका के लिए बेहद रणनीतिक माना जाता है। मध्य पूर्व, अफ्रीका या दक्षिणी यूरोप में कोई तनाव बढ़ता है तो अमेरिका इटली की जमीन से तेजी से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। अमेरिकी नौसेना और एयर फोर्स दोनों यहां सक्रिय रहती हैं। NATO (North Atlantic Treaty Organization ) मिशनों में भी इटली की बड़ी भूमिका मानी जाती है। इसी वजह से अमेरिका, इटली को भी यूरोप में अपनी सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा मानता है।
ब्रिटेन में करीब 10,156 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिका और ब्रिटेन की दोस्ती दुनिया की सबसे मजबूत रक्षा साझेदारी मानी जाती है। दोनों देश कई बड़े सैन्य मिशनों में साथ काम करते हैं। ब्रिटेन में अमेरिकी एयर बेस और सैन्य नेटवर्क NATO को मजबूती देते हैं। यूरोप में कभी बड़ा संकट आता है तो ब्रिटेन अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य सहयोगी साबित होगा। इसी वजह से अमेरिका ब्रिटेन में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखना चाहता है।
स्पेन में करीब 3,814 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। यह देश समुद्री रास्तों और NATO ऑपरेशन के लिहाज से काफी अहम माना जाता है। स्पेन की लोकेशन ऐसी है कि यहां से अमेरिका यूरोप और अफ्रीका दोनों क्षेत्रों पर नजर रख सकता है। अमेरिकी नौसेना के लिए भी यह देश काफी अहम माना जाता है। भूमध्यसागर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो स्पेन अमेरिका के बड़े सैन्य ठिकाने की भूमिका निभा सकता है।
तुर्किये में करीब 1,661 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। यह देश यूरोप और एशिया के बीच स्थित है, इसलिए इसकी रणनीतिक अहमियत काफी ज्यादा है। तुर्किये NATO का सदस्य भी है और मध्य पूर्व के बेहद करीब माना जाता है। ऐसे में अमेरिका यहां अपनी मौजूदगी बनाए रखना चाहता है ताकि रूस और मध्य पूर्व दोनों क्षेत्रों पर नजर रखी जा सके। तुर्किये में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी को दुनिया की बड़ी रणनीतिक चाल है।
बेल्जियम में करीब 1,118 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। यह संख्या भले ही कम लग सकती है, लेकिन यहां NATO की राजनीति गतिविधियों और सैन्य फैसलों का एक बड़ा केंद्र है। NATO का मुख्यालय बेल्जियम में ही स्थित है। इसलिए अमेरिका के लिए यहां मौजूद रहना बेहद जरूरी माना जाता है। यहां से कई अहम सैन्य और रणनीतिक फैसले लिए जाते हैं।
ग्रीस में करीब 432 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। पिछले कुछ सालों में भूमध्यसागर के इलाके में तनाव बढ़ा है, जिससे ग्रीस की अहमियत भी बढ़ गई है। अमेरिका यहां अपनी नेवी को और मजबूत करना चाहता है। आने वाले समय में ग्रीस में अमेरिकी फौज की संख्या और बढ़ सकती है।
नीदरलैंड में 414 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। यह देश अमेरिका के लिए एक बड़े लॉजिस्टिक सेंटर की तरह काम करता है। अगर यूरोप में कहीं भी इमरजेंसी होती है, तो अमेरिका नीदरलैंड के जरिए ही तेजी से हथियार और सैनिक दूसरे देशों तक पहुंचाता है। यह देश अमेरिकी सैन्य नेटवर्क की एक मजबूत कड़ी है।
पोलैंड में अभी करीब 369 सैनिक हैं, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध ने इस देश की वैल्यू बदल दी है। रूस के करीब होने की वजह से पोलैंड अब पूर्वी यूरोप का सबसे खास देश बन गया है। अमेरिका यहां अपनी ताकत लगातार बढ़ा रहा है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह अमेरिका का सबसे बड़ा मिलिट्री बेस बन सकता है।
पुर्तगाल में 237 अमेरिकी सैनिक हैं, लेकिन यहां की असली ताकत अजोरेस द्वीप है। अटलांटिक महासागर के बीच में स्थित ये द्वीप एयरफोर्स और नेवी के ऑपरेशन्स के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। अमेरिका दशकों से इस जगह का इस्तेमाल अपनी ग्लोबल पहुंच बनाए रखने के लिए कर रहा है।
रोमानिया में 153 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ब्लैक सी (Black Sea) के किनारे बसे होने के कारण यह देश रूस की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बेस्ट लोकेशन है। यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका ने रोमानिया में अपनी चौकसी बढ़ा दी है ताकि रूस के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार रहे।
डेनमार्क में करीब 151 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। यहां बड़ी संख्या नहीं है, लेकिन ग्रीनलैंड की वजह से यह देश अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के कारण अमेरिका यहां अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत रखना चाहता है। भविष्य में आर्कटिक दुनिया की नई रणनीतिक लड़ाई का केंद्र बन सकता है।
2022 में जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ा, तो पूरे यूरोप में डर का माहौल बन गया। ऐसे में अमेरिका ने आगे बढ़कर NATO देशों को सुरक्षा की गारंटी दी। आज स्थिति यह है कि यूरोप में अमेरिकी सेना की मौजूदगी पहले से कहीं ज्यादा जरूरी और प्रभावी हो गई है।
यूरोप में अमेरिकी सेना की मौजूदगी सिर्फ सुरक्षा का मामला नहीं है। इसका असर दुनिया की राजनीति, तेल की कीमतों, व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। अगर यूरोप में तनाव बढ़ता है तो पूरी दुनिया प्रभावित होती है। यही वजह है कि अमेरिका यूरोप को सिर्फ दोस्त नहीं, बल्कि अपनी वैश्विक ताकत का सबसे अहम हिस्सा मानता है।