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‘एक्सट्रीम’ यूवी रेडिएशन, एक्सपर्ट बोले- ‘जलवायु परिवर्तन’ का बड़ा संकेत, बचकर रहें

UV Radiation: बीते महीने से लगातार यूवी इंडेक्स बढ़ता जा रहा है। आसान भाषा में कहां तो यूवी इंडेक्स कभी भी किसी एक कारण से नहीं होता है। ये कई प्राकृतिक और मानव-जनित कारणों का मिलाजुला असर है।

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May 01, 2026
UV Radiation Steadily Rising (Photo Source: AI Image)

UV Radiation: पूरे देश में अप्रैल के महीने में तल्ख मौसम की गर्मी लोगों को बेहाल कर रही है। तो वहीं यूवी रेडिएशन (अल्ट्रावायलेट किरणों) का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। ज्यादातर शहरों में पिछले एक सप्ताह से अधिकतम तापमान 40 डिग्री से अधिक बना हुआ है। चार दिन से दोपहर में यूवी इंडेक्स भी 11 से 12 के बीच पहुंच रहा है।

एक्सपर्ट की मानें तो यह एक्स्ट्रीम (अत्यधिक खतरनाक) श्रेणी में है। इस स्तर पर महज एक से दो घंटे तेज धूप के संपर्क में रहने से त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंच सकता है।

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क्या होता है यूवी इंडेक्स

यूवी इंडेक्स (UV Index) एक माप है जो बताता है कि सूरज की पराबैंगनी किरणों (Ultraviolet Rays) की तीव्रता कितनी है। यूवी रेडिएशन सूर्य से आने वाली अदृश्य पराबैंगनी किरणें हैं। इनकी तरंगदैध्र्य (वेव लेंथ) सामान्य प्रकाश से कम होती है। ये किरणे त्वचा, आंख और शरीर के डीएनए पर सीधा असर डालती हैं। ज्यादा यूवी रेडिएशन से त्वचा झुलस जाती है। हालांकि सीमित मात्रा में यही किरणें शरीर में विटामिन-डी बनाने में भी मदद करती हैं।

ज्यादा यूवी इंडेक्स होने पर क्या होता है ?

-सनबर्न (त्वचा जलना)

-स्किन टैनिंग

-समय से पहले झुर्रियां

-स्किन कैंसर का खतरा

-आंखों को नुकसान

ऐसे समझें यूवी इंडेक्स

लगातार क्यों बढ़ रहा है यूवी इंडेक्स?

बीते महीने से लगातार यूवी इंडेक्स बढ़ता जा रहा है। आसान भाषा में कहें तो यूवी इंडेक्स कभी भी किसी एक कारण से नहीं होता है। ये कई प्राकृतिक और मानव-जनित कारणों का मिलाजुला असर है। ये ग्लोबल वॉर्मिंग, ओज़ोन परत का क्षरण, साफ आसमान, मौसम में बदलाव के कारण बढ़ता और घटता है। सीधा तात्पर्य यह है कि गर्मी का तेज पड़ना और साफ आसमान के साथ ओज़ोन लेयर कमज़ोर होना इसके बढ़े कारण है।

शाम 4 से पहले कहीं राहत नहीं

पर्यावरण विशेषज्ञों की मानें तो जलवायु परिवर्तन और ओजोन परत में हो रही क्षति से यूवी किरणों की तीव्रता लगातार बढ़ रही है। इससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। सुबह 9 से 10 बजे के बीच भी यह स्तर 5 से 8 के बीच रह रहा है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर में दोपहर में यह 12 तक पहुंच रहा है। शाम 4 बजे के बाद ही इसमें गिरावट दर्ज की जा रही है। इससे पहले घर से बाहर निकलने पर आप बीमार पड़ सकते है।

हो सकती है सनबर्न की समस्या

तापमान बढऩे के साथ ही सनबर्न का खतरा उत्पन्न हो जाता है। सनबर्न के शिकार लोगों की त्वचा लाल सूखी हुई हो जाती है। इससे त्वचा में दर्द भी होने लगता है। दरअसल यह सीधे सूर्य की पराबैंगनी किरणों के संपर्क में आ जाती हैं। पराबैंगनी किरणों के संपर्क में त्वचा आते ही लालिमा होने लगती है। त्वचा पर धब्बे बनने लगते हैं। जहां तक शरीर के अंग खुले हुए हैं, काले अथवा लाल दिखने लगते हैं। आगे चलकर यह पूरे शरीर में डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) पैदा कर देता है। ऐसी स्थिति में मरीजों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

बचने के लिए करें ये उपाय

- अगर किसी काम से बाहर जाना पड़े तो दोपहर 12 से 4 बजे तक जाने से बचे।

-बाहर निकलते समय टोपी, छाता और फुल स्लीव कपड़े पहनें।

-घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन क्रीम इस्तेमाल करें।

- यूवी प्रोटेक्टिव चश्मा लगाएं।

-पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।

-बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सुरक्षा दें।

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Published on:
01 May 2026 07:00 am
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