Chhattisgarh Water Harvesting Tank: ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत जिले में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाया जा रहा है। 74 हजार जल संरचनाओं और 1005 सोकपिट-वाटर हार्वेस्टिंग टैंक के निर्माण से भू-जल स्तर बढ़ाने की दिशा में बड़ा काम हो रहा है।
छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान अब गांवों में बड़ा बदलाव लाता नजर आ रहा है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देश पर कृषि विभाग सहित कई विभाग मिलकर जिले में जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। अभियान के जरिए ग्रामीणों और किसानों को वर्षा जल बचाने, पानी के सही उपयोग और भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
जिले में जल संरक्षण को मजबूत करने के लिए अब तक 74 हजार से अधिक विभिन्न जल संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है। इसमें जिला पंचायत, जनपद पंचायत, जल संसाधन विभाग, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, वन विभाग और कृषि विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गांव-गांव में छोटे-छोटे जल संरक्षण कार्यों के जरिए बारिश के पानी को सहेजने की कोशिश की जा रही है, ताकि आने वाले समय में पानी की कमी से निपटा जा सके।
अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसमें ग्रामीण और महिला किसान भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। कृषि विभाग की प्रेरणा से जिले में किसानों और महिला कृषकों द्वारा स्व-प्रेरणा से 1005 सोकपिट और वाटर हार्वेस्टिंग टैंक बनाए जा चुके हैं। इन संरचनाओं से घरों और खेतों से निकलने वाले पानी का बेहतर प्रबंधन हो रहा है। साथ ही वर्षा जल सीधे जमीन में पहुंच रहा है, जिससे भू-जल स्तर बढ़ने की उम्मीद है।
विकासखंड के ग्राम बानीपाली की किसान दीपिका पटेल ने अपने घर और खेत में सोकपिट टैंक बनवाया है। उनका कहना है कि इससे घर का बेकार पानी अब सीधे जमीन में जा रहा है, जिससे आसपास की जमीन में नमी बनी रहती है। उन्होंने बताया कि इसका फायदा घरेलू कामों के साथ खेती में भी मिल रहा है। खेतों में नमी रहने से फसलों को भी लाभ हो रहा है।
ग्राम उमरिया की शीला तिवारी और बरतियाभाठा की सीमा सहित कई ग्रामीण महिलाएं भी अपने घर और खेत में सोकपिट और वाटर हार्वेस्टिंग टैंक तैयार करवा रही हैं। इससे गांवों में जल संरक्षण को लेकर नई जागरूकता देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले बारिश का पानी बहकर निकल जाता था, लेकिन अब उसी पानी को बचाने की कोशिश की जा रही है, जिससे आने वाले समय में पानी की समस्या कम होगी।
प्रशासन का मानना है कि यदि हर गांव और हर घर स्तर पर पानी बचाने की छोटी-छोटी पहल की जाए, तो भविष्य में जल संकट से काफी हद तक बचा जा सकता है। यही वजह है कि ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान को केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी वाला आंदोलन बनाने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोकपिट और वाटर हार्वेस्टिंग जैसी संरचनाएं भू-जल रिचार्ज करने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका हैं। इससे खेती, पेयजल और पर्यावरण तीनों को लंबे समय तक फायदा मिलेगा।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में हर साल गर्मियों के दौरान जल संकट और भू-जल स्तर में गिरावट बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इसी समस्या को देखते हुए प्रशासन द्वारा ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देना है। अभियान के तहत गांवों में वर्षा जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और पानी के समुचित उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रशासन, पंचायतों और विभिन्न विभागों की मदद से जल संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है, ताकि बारिश के पानी को अधिक से अधिक जमीन में उतारा जा सके।
जिले में अब तक 74 हजार से ज्यादा जल संरक्षण संरचनाएं तैयार की जा चुकी हैं। इनमें सोकपिट, वाटर हार्वेस्टिंग टैंक और अन्य जल पुनर्भरण संरचनाएं शामिल हैं। खास बात यह है कि इस अभियान में महिला किसानों और ग्रामीणों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है।
कृषि विभाग की पहल पर कई किसान अपने घर और खेतों में स्व-प्रेरणा से सोकपिट और वाटर हार्वेस्टिंग टैंक बनवा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी संरचनाएं वर्षा जल को सीधे जमीन में पहुंचाकर भू-जल स्तर बढ़ाने में मदद करती हैं। इससे खेती, घरेलू उपयोग और पर्यावरण संरक्षण तीनों क्षेत्रों में सकारात्मक असर देखने को मिलता है। प्रशासन का लक्ष्य इस अभियान को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखकर जनभागीदारी आधारित मॉडल बनाना है, ताकि आने वाले वर्षों में जल संकट की समस्या को कम किया जा सके।
भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए: बारिश का पानी सीधे जमीन में पहुंचने से बोरवेल, कुएं और हैंडपंप का जलस्तर सुधरता है।
गर्मी में पानी की कमी कम करने के लिए: छत्तीसगढ़ के कई जिलों में गर्मी के समय पेयजल संकट बढ़ जाता है। वाटर हार्वेस्टिंग इससे राहत दे सकती है।
खेती-किसानी के लिए फायदेमंद: खेतों में नमी बनी रहती है और सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध होता है।
बारिश के पानी की बर्बादी रोकने के लिए: हर साल लाखों लीटर पानी बहकर निकल जाता है। टैंक और सोकपिट इसे बचाने का आसान तरीका हैं।
शहर और गांव दोनों के लिए जरूरी: रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग जैसे शहरों में जलभराव और गांवों में जल संकट—दोनों समस्याओं का समाधान वाटर हार्वेस्टिंग से हो सकता है।
इसी वजह से ‘मोर गांव मोर पानी’ जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि लोग खुद आगे आकर घर, खेत और गांव स्तर पर पानी बचाने की व्यवस्था तैयार करें। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हर घर और खेत में छोटे स्तर पर भी वाटर हार्वेस्टिंग शुरू हो जाए, तो आने वाले वर्षों में जल संकट काफी हद तक कम किया जा सकता है।