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Bastar Water Crisis: जल संरक्षण का संकल्प! किशोरियों ने संभाली जागरूकता की कमान

Bastar Water Crisis: विश्व जल दिवस पर दरभा, बस्तर और तोकापाल ब्लॉकों में जल संरक्षण अभियान चलाया गया।

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दरभा में जल संरक्षण का संकल्प (Photo Source- Patrika)

दरभा में जल संरक्षण का संकल्प (Photo Source- Patrika)

Bastar Water Crisis: 22 मार्च को विश्व जल दिवस के अवसर पर बस्तर में जल संरक्षण और सुरक्षित पानी के महत्व को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर संस्था चेतना चाइल्ड एंड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा दरभा, बस्तर और तोकापाल ब्लॉकों में कार्यक्रम आयोजित कर ग्रामीणों को जल संरक्षण, स्वच्छता और पानी के सही उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस दिन का मुख्य उद्देश्य मीठे पानी के महत्व को रेखांकित करना और जल संकट के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।

Bastar Water Crisis: आयरन और फ्लोराइड युक्त पानी की समस्या गंभीर

दरभा ब्लॉक के 7 गांवों में किशोरियों ने सूखते जल स्रोत, भूजल के गिरते स्तर, जलवायु परिवर्तन और कृषि एवं खाद्यान्न सुरक्षा पर पड़ रहे प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर समुदाय के बीच चर्चा कर जल बचाने का संकल्प लिया। किशोरियों के समूह छोटे-छोटे दल बनाकर बच्चों, युवाओं, पंचायत और ग्राम सभाओं में जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। बस्तर के कई गांवों में आयरन और फ्लोराइड युक्त पानी की समस्या गंभीर बनी हुई है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जल संकट केवल पानी की कमी नहीं, बल्कि सुरक्षित और स्वच्छ पानी की कमी भी है। दूषित पानी के कारण हैजा, डायरिया, टाइफाइड जैसी बीमारियां फैल रही हैं, वहीं आर्सेनिक और फ्लोराइड से कैंसर और हड्डियों से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। स्वच्छता की कमी से संक्रमण का जोखिम और अधिक बढ़ जाता है, जिसका असर ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा देखने को मिलता है।

दूषित पानी से होने वाली समस्या पर चर्चा की गई

विश्व जल दिवस के तहत विभिन्न गांवों में अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों के साथ जल स्रोतों, पानी की गुणवत्ता और गंदा पानी पीने से होने वाली बीमारियों पर चर्चा की गई। इससे लोगों में पानी के महत्व को लेकर समझ विकसित हुई। विशेषज्ञों ने कुपोषण और पानी की गुणवत्ता के बीच गहरे संबंध की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। कुपोषित बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिससे वे जलजनित बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।

Bastar Water Crisis: विशेषकर महिलाओं और किशोरियों की भागीदारी

विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित भूजल दोहन और पारंपरिक जल स्रोतों (जैसे कुएं, तालाब) की उपेक्षा ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और जल प्रबंधन के प्रति जागरूकता की कमी भी इस संकट को बढ़ाती है। सरकार द्वारा जल जीवन मिशन जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिनका लक्ष्य हर घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है।

हालांकि, बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में स्थानीय समुदाय, विशेषकर महिलाओं और किशोरियों की भागीदारी, जल संरक्षण और सुरक्षित पानी के उपयोग को बढ़ावा देने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। समुदाय आधारित पहल और जागरूकता अभियान ही इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में सबसे प्रभावी कदम साबित हो सकते हैं।