
Watery Eyes Disease: आज के दौर में हमारा स्क्रीन टाइम बहुत ज्यादा बढ़ गया है। लैपटॉप पर काम करना हो, स्मार्टफोन पर रील्स स्क्रॉल करना हो या टीवी देखना, हमारी आंखें हर वक्त किसी न किसी स्क्रीन पर टिकी रहती हैं। ऐसे में आंखों में थकान, धुंधलापन या पानी आने जैसी शिकायतें आम हो चुकी हैं।
अक्सर जब आंखों से पानी आता है, तो लोग सोचते हैं कि आंखें खुद को साफ कर रही हैं या यह एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट (आंखों के डॉक्टर) ने बताया है कि आंखों से लगातार पानी आना हमेशा स्वस्थ आंखों की निशानी नहीं होता बल्कि यह 'ड्राई आई डिजीज' (Dry Eye Disease) का एक बड़ा लक्षण हो सकता है। सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है कि सूखी आंखों (Dry Eyes) से पानी कैसे आ सकता है, लेकिन इसके पीछे का मेडिकल साइंस बेहद अलग है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह छिपी हुई बीमारी क्या है, और इससे कैसे बचा जाए।
मेडिकल सांइस में इस स्थिति को 'रिफ्लेक्स टियरिंग' (Reflex Tearing) कहा जाता है। इसे समझने के लिए हमें आंसुओं की बनावट को जानना होगा। हमारे आंसू केवल पानी नहीं होते, बल्कि यह तीन परतों से मिलकर बनते हैं:
आंखों में आने वाले सामान्य पानी (जैसे प्याज काटते समय या धूल जाने पर) और ड्राई आई के कारण आने वाले पानी में क्या फर्क होता है?
सामान्य रूप से प्याज काटने या धूल जाने पर आने वाला पानी आंखों का 'इमरजेंसी रिस्पॉन्स' (Reflex Tears) है। यह बाहरी केमिकल या कचरे को तुरंत साफ करने के लिए निकलता है। यह पानी एकदम शुद्ध, पतला और अस्थायी होता है, जो कारण हटने पर तुरंत बंद हो जाता है। इसके विपरीत, ड्राई आई के कारण आने वाला पानी 'आंसुओं की खराब क्वालिटी' की वजह से आता है। इसमें आंखों को नम रखने वाले जरूरी तेल (लिपिड) की कमी होती है। यह पानी आंखों की सतह सूखी होने के कारण दिमाग के गलत सिग्नल से बार-बार आता है, जिससे आंखें साफ नहीं होतीं बल्कि उनके अंदर लगातार जलन, चुभन और लाली बनी रहती है।
आजकल वर्क फ्रॉम होम और बढ़ते स्क्रीन टाइम के कारण यह समस्या महामारी की तरह बढ़ रही है। स्क्रीन देखते वक्त हमारी आंखों में ऐसा क्या बदल जाता है जो ड्राई आई का कारण बनता है?
जब हम लगातार कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन देखते हैं, तो हमारी आंखें दो बड़े बदलावों से गुजरती हैं जो ड्राई आई का कारण बनते हैं।
क्या वातानुकूलित (AC) कमरों में लंबे समय तक बैठना या हीटर/ब्लोअर का इस्तेमाल भी आंखों के इस सूखेपन को बढ़ाता है?
हां, AC और हीटर सीधे तौर पर आंखों का सूखापन बढ़ाते हैं। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं।
क्या कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले लोगों को इस बीमारी का खतरा दूसरों से ज्यादा होता है?
हां, कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले लोगों को ड्राई आई डिजीज का खतरा सामान्य लोगों के मुकाबले काफी ज्यादा होता है।
आंखों से पानी आने के अलावा, ऐसे कौन से शुरुआती लक्षण हैं जिन्हें देखकर किसी व्यक्ति को तुरंत सचेत हो जाना चाहिए?
अक्सर लोग मेडिकल स्टोर से बिना पर्चे के (Over-the-Counter) कोई भी आई ड्रॉप खरीदकर डाल लेते हैं। यह आदत कितनी खतरनाक हो सकती है और इसके क्या नुकसान हैं?
बिना डॉक्टरी सलाह के मेडिकल स्टोर से आई ड्रॉप (OTC Drops) लेकर डालना आंखों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। अक्सर इन सामान्य ड्रॉप्स में 'वैसोकॉन्स्ट्रिक्टर्स' (Vasoconstrictors) या 'स्टेरॉइड्स' (Steroids) होते हैं, जो अस्थाई रूप से आंखों की लाली तो कम कर देते हैं, लेकिन अंदरूनी बीमारी को और बढ़ा देते हैं। स्टेरॉइड वाले ड्रॉप्स का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से आंखों का दबाव बढ़ सकता है, जिससे काला मोतिया (Glaucoma) या सफेद मोतिया (Cataract) जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा, गलत ड्रॉप्स आंसुओं की प्राकृतिक परत को पूरी तरह नष्ट कर देते हैं, जिससे कॉर्निया पर घाव (Ulcers) होने और आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जाने का खतरा रहता है।
हमारी डाइट का आंखों की सेहत और आंसुओं की क्वालिटी से क्या कनेक्शन है? क्या ओमेगा-3 या कोई खास विटामिन इसमें मदद करते हैं?
हमारी डाइट का आंसुओं की क्वालिटी से सीधा कनेक्शन है। आंसुओं की सबसे ऊपरी तैलीय परत (Lipid Layer) को स्वस्थ रखने में ओमेगा-3 फैटी एसिड सबसे महत्वपूर्ण है। यह आंखों की 'मीबोमियन ग्रंथियों' में तेल के फ्लो को सुधारता है, जिससे आंसू जल्दी सूखते नहीं हैं। इसके लिए डाइट में अखरोट, अलसी के बीज (Flaxseeds) और चिया सीड्स शामिल करने चाहिए। इसके अलावा, विटामिन A आंखों की कॉर्निया को सुरक्षित रखता है और म्यूकस परत बनाता है, जो गाजर और हरी पत्तेदार सब्जियों से मिलता है। साथ हीं, विटामिन C और E जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स आंखों की नसों को डिजिटल स्ट्रेन और डैमेज से बचाते हैं।