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Skin Cancer: त्वचा पर दिखने वाला मामूली दाना कहीं ‘बेसल सेल कार्सिनोमा’ तो नहीं? पहचानें इसके लक्षण और उपचार

Basal Cell Carcinoma: त्वचा पर दिखने वाला मामूली दाना या मस्सा कहीं स्किन कैंसर तो नहीं? त्वचा कैंसर (Skin Cancer) का यह रूप लाइलाज नहीं है। यह शत प्रतिशत ठीक हो सकता है। यह बहुत धीमी गति से फैलता है, लेकिन समय रहते इसका उपचार शुरू होना भी जरूरी है। सवाई मानसिंह अस्पताल, जयपुर के डॉ. पुनीत अग्रवाल से जानें 'बेसल सेल कार्सिनोमा' (BCC) के शुरुआती लक्षण, मुख्य कारण और इलाज।

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May 16, 2026
बेसल सेल कार्सिनोमा त्वचा से जुड़ा कैंसर है। (Photo : AI Generated)

Skin Cancer : बदलती जीवनशैली, बढ़ते प्रदूषण और धूप के अत्यधिक संपर्क (Sun Exposure) के कारण आजकल त्वचा से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें सबसे गंभीर और चिंताजनक बीमारी है- स्किन कैंसर (Skin Cancer)। त्वचा के कैंसर की जब भी बात आती है, तो बेसल सेल कार्सिनोमा (Basal Cell Carcinoma या BCC) का ध्यान सबसे पहले आता है। राहत की बात यह है कि अन्य कैंसर की तुलना में यह बहुत धीमी गति से फैलता है और यदि सही समय पर इसकी पहचान कर ली जाए, तो इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर बेसल सेल कार्सिनोमा क्या है और यह हमारी स्किन को किस तरह नुकसान पहुंचाता है।

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बेसल सेल कार्सिनोमा (BCC) क्या है?

हमारी त्वचा की सबसे बाहरी परत को एपिडर्मिस (Epidermis) कहा जाता है। इस एपिडर्मिस के सबसे निचले हिस्से में बेसल कोशिकाएं (Basal Cells) पाई जाती हैं। इन कोशिकाओं का मुख्य काम पुरानी त्वचा कोशिकाओं के मृत होने पर नई त्वचा कोशिकाओं का निर्माण करना होता है। इन बेसल कोशिकाओं के डीएनए (DNA) में जब किसी कारणवश खराबी या म्यूटेशन (Mutation) आ जाता है, तो ये कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। कोशिकाओं की इसी असामान्य और अनियंत्रित वृद्धि को बेसल सेल कार्सिनोमा कहा जाता है।

मुख्य बात: बेसल सेल कार्सिनोमा आमतौर पर शरीर के उन हिस्सों पर होता है जो धूप के सीधे संपर्क में आते हैं, जैसे कि चेहरा, गर्दन, सिर, हाथ और कंधे। यह कैंसर शरीर के अन्य अंगों (जैसे फेफड़े या लीवर) में बहुत ही दुर्लभ मामलों में फैलता है, लेकिन अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह आस-पास की हड्डियों और टिश्यूज को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

Symptoms of BCC : बेसल सेल कार्सिनोमा के लक्षण

BCC की शुरुआत अक्सर एक छोटे, हानिरहित दिखने वाले दाने या मस्से से होती है, जिसे लोग अक्सर सामान्य त्वचा की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसके मुख्य लक्षण हैं।

  • चमकदार, सफेद या गुलाबी रंग का उभार: त्वचा पर एक छोटा, चिकना, चमकदार या मोम जैसा दिखने वाला उभार (Bump) बन जाता है। कभी-कभी इसमें बारीक खून की नसें (Blood vessels) भी दिखाई देती हैं।
  • घाव जो ठीक नहीं होता: त्वचा पर एक ऐसा घाव या छाला होना जो हफ्तों तक ठीक नहीं होता, या ठीक होने के बाद बार-बार वापस आ जाता है। इस घाव से खून या पपड़ी भी निकल सकती है।
  • पपड़ीदार पैच: पीठ या छाती पर एक चपटा, भूरा या लाल रंग का पपड़ीदार पैच दिखाई देना, जो समय के साथ बड़ा होने लगता है।
  • निशान जैसा दिखना (Scar-like lesion): बिना किसी चोट या कट के त्वचा पर एक सफेद, पीला या मोम जैसा सख्त निशान दिखाई देना। यह दिखने में किसी पुराने घाव के निशान जैसा हो सकता है।
  • काले या नीले रंग का धब्बा: कुछ मामलों में विशेषकर गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों में, यह गहरे नीले, भूरे या काले रंग के धब्बे के रूप में भी दिखाई दे सकता है।

Causes of BCC: बेसल सेल कार्सिनोमा के मुख्य कारण

  • BCC का मुख्य कारण बेसल कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचना है। जब डीएनए क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से विभाजित होने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। इसके प्रमुख कारण और जोखिम कारक हैं।
  • अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें : सूरज की धूप से निकलने वाली पराबैंगनी (UV) किरणें इसका सबसे बड़ा कारण हैं। जो लोग लंबे समय तक धूप में काम करते हैं या सनबाथ ( Sun bath) लेते हैं, उनमें इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा, टैनिंग बेड (Tanning beds) का इस्तेमाल भी UV रेडिएशन का एक बड़ा स्रोत है।
  • गोरी त्वचा (Fair Skin) : जिन लोगों की त्वचा का रंग गोरा होता है, जिनके बाल लाल या सुनहरे होते हैं और आंखें नीली या हरी होती हैं, उनमें मेलानिन (Melanin) की मात्रा कम होती है। मेलानिन त्वचा को UV किरणों से बचाता है।इसलिए, गोरी त्वचा वाले लोगों में बेसल सेल कार्सिनोमा होने की संभावना अधिक होती है।
  • बढ़ती उम्र : BCC विकसित होने में सालों का समय लगता है, इसलिए यह आमतौर पर 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में देखा जाता है। हालांकि, आजकल खराब जीवनशैली और धूप के अत्यधिक संपर्क के कारण यह युवाओं में भी देखा जा रहा है।
  • रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy) : यदि किसी व्यक्ति को अतीत में किसी अन्य बीमारी (जैसे मुंहासे या अन्य कैंसर) के लिए चेहरे या शरीर पर रेडिएशन थेरेपी दी गई है, तो उस हिस्से पर BCC होने का जोखिम बढ़ जाता है।
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (Weak Immune System) : दवाओं या किसी बीमारी (जैसे HIV/AIDS) के कारण जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उनमें त्वचा कैंसर होने का खतरा अधिक होता है।
  • आर्सेनिक का संपर्क : आर्सेनिक एक जहरीला तत्व है जो कभी-कभी दूषित पानी या कुछ औद्योगिक वातावरण में पाया जाता है। इसके संपर्क में आने से भी बेसल सेल कार्सिनोमा का खतरा बढ़ता है।

Diagnosis of BCC: निदान और जांच

शारीरिक परीक्षण (Physical Examination): डॉक्टर आपकी त्वचा का ध्यानपूर्वक निरीक्षण करेंगे, घाव के आकार, रंग और बनावट की जांच करेंगे।

स्किन बायोप्सी (Skin Biopsy): यह BCC की पुष्टि करने का एकमात्र निश्चित तरीका है। इस प्रक्रिया में डॉक्टर प्रभावित त्वचा का एक छोटा सा हिस्सा सुन्न करके निकाल लेते हैं और उसे लैब में जांच के लिए भेजते हैं। यदि बायोप्सी में कैंसर कोशिकाओं की पुष्टि होती है, तो आगे का इलाज शुरू किया जाता है।

Treatment Options : बेसल सेल कार्सिनोमा के उपचार के विकल्प

BCC का उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि ट्यूमर का आकार क्या है, वह शरीर के किस हिस्से पर है और कितना गहरा है। इसके मुख्य उपचार हैं।

  • सर्जिकल एक्सीजन (Surgical Excision) : इस प्रक्रिया में डॉक्टर कैंसर वाले हिस्से और उसके आस-पास की थोड़ी सी सामान्य त्वचा को काटकर निकाल देते हैं। इसके बाद घाव पर टांके लगा दिए जाते हैं। यह छोटे और शुरुआती दौर के BCC के लिए सबसे प्रभावी तरीका है।
  • मोस माइक्रोग्राफिक सर्जरी (Mohs Micrographic Surgery) : यह चेहरे, नाक या आंखों के पास के ट्यूमर के लिए सबसे उन्नत और सटीक सर्जरी है। इसमें सर्जन कैंसर की परत को एक-एक करके निकालते हैं और तुरंत माइक्रोस्कोप के नीचे उसकी जांच करते हैं। यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक कि पूरी तरह से कैंसर-मुक्त कोशिकाएं नहीं मिल जातीं। इससे स्वस्थ त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचता।
  • क्युरेटेज और इलेक्ट्रोडेसिकेशन (Curettage and Electrodesiccation) : इस विधि में पहले ट्यूमर को एक विशेष चम्मच जैसे उपकरण (Curette) से खुरच कर निकाला जाता है, और फिर एक इलेक्ट्रिक सुई की मदद से बची हुई कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर दिया जाता है और ब्लीडिंग को रोका जाता है।
  • क्रायोसर्जरी (Cryosurgery) : इस उपचार में लिक्विड नाइट्रोजन (Liquid Nitrogen) का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को जमाकर (Freezing) नष्ट कर दिया जाता है। यह सतही और छोटे ट्यूमर के लिए उपयुक्त है।
  • फोटोडायनामिक थेरेपी (Photodynamic Therapy PDT) : इस थेरेपी में त्वचा पर एक विशेष दवा (जेल या क्रीम) लगाई जाती है, जो कैंसर कोशिकाओं को प्रकाश के प्रति संवेदनशील बनाती है। इसके बाद उस हिस्से पर एक विशेष लेजर लाइट डाली जाती है, जिससे कैंसर कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं।
  • टोपिकल मेडिसिन (Topical Medications) : यदि कैंसर केवल त्वचा की ऊपरी परत पर है, तो डॉक्टर कुछ विशेष कीमोथेरेपी या इम्यूनोथेरेपी क्रीम (जैसे Imiquimod या 5-Fluorouracil) लगाने की सलाह दे सकते हैं।

Prevention Tips : बेसल सेल कार्सिनोमा से बचाव के उपाय

  • सनस्क्रीन का नियमित उपयोग: घर से बाहर निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले कम से कम SPF 30-50 (Sun Protection Factor) वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन जरूर लगाएं। यदि आप लंबे समय तक धूप में हैं, तो हर दो घंटे में इसे दोबारा लगाएं।
  • दोपहर की धूप से बचें: सुबह 10 बजे से दोपहर 4 बजे के बीच सूरज की किरणें सबसे तेज होती हैं। इस दौरान जितना हो सके धूप में जाने से बचें।
  • सुरक्षात्मक कपड़े पहनें: धूप में निकलते समय पूरी आस्तीन (Full sleeves) के कपड़े, चौड़े किनारे वाली टोपी (Wide-brimmed hat) और UV-प्रोटेक्टेड धूप का चश्मा (Sunglasses) पहनें।
  • टैनिंग बेड को कहें ना: कृत्रिम रूप से त्वचा को टैन करने वाले टैनिंग बेड या लैंप से पूरी तरह दूरी बनाएं, क्योंकि इनसे निकलने वाली UV किरणें त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं।
  • त्वचा का आत्म-परीक्षण (Self-Examination): महीने में एक बार शीशे के सामने खड़े होकर अपने पूरे शरीर की त्वचा की जांच करें। यदि कोई नया मस्सा, दाग या पुराना घाव दिखे जो ठीक नहीं हो रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

डॉ.पुनीत अग्रवाल के साथ पत्रिका के सवाल-जवाब

क्या यह बेसल सेल कार्सिनोमा त्वचा की ऊपरी सतह तक ही सीमित है या गहराई में मांसपेशियों और टिश्यूज तक फैलता है?

उन्होेंने बताया, बेसल सेल कार्सिनोमा (BCC) आमतौर पर त्वचा की ऊपरी सतह (एपिडर्मिस) पर बेहद धीमी गति से बढ़ता है। हालांकि, लंबे समय तक इलाज न मिलने पर यह त्वचा की गहराई में उतरकर नीचे मौजूद मांसपेशियों, टिश्यूज (ऊतकों) और हड्डियों तक फैल सकता है। यह शरीर के दूर के अंगों में नहीं जाता, लेकिन स्थानीय स्तर पर गहराई में बढ़कर गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए शुरुआती चरण में ही इसकी पहचान और इलाज जरूरी है।

क्या इस कैंसर के आकार और सटीक स्थिति को समझने के लिए किसी अन्य इमेजिंग टेस्ट की जरूरत है?

आमतौर पर बेसल सेल कार्सिनोमा (BCC) का निदान डॉक्टर केवल शारीरिक परीक्षण और स्किन बायोप्सी (Biopsy) के जरिए ही कर लेते हैं। इसके लिए किसी अन्य इमेजिंग टेस्ट (जैसे एक्स-रे या सीटी स्कैन) की जरूरत नहीं होती है। हालांकि, कुछ गंभीर मामलों में इमेजिंग टेस्ट की आवश्यकता पड़ सकती है। यदि ट्यूमर का आकार बहुत बड़ा है, वह काफी पुराना हो चुका है, या कही बार डॉक्टर को यह संदेह है कि कैंसर त्वचा की गहराई में उतरकर नीचे मौजूद मांसपेशियों, नसों या हड्डियों तक फैल चुका है, तो इसकी सटीक स्थिति और फैलाव का पता लगाने के लिए सीटी स्कैन (CT Scan) या एमआरआई (MRI) कराने की सलाह दी जाती है।

क्या इस स्थिति में 'मोस माइक्रोग्राफिक सर्जरी' सबसे बेहतर विकल्प है, या सामान्य सर्जिकल एक्सीजन (Surgical Excision) से काम चल जाएगा?

यह निर्णय बेसल सेल कार्सिनोमा (BCC) के आकार, प्रकार और स्थान पर निर्भर करता है। यदि ट्यूमर चेहरे, नाक, कान या आंखों के पास है, जहां कम से कम त्वचा काटकर अधिकतम सफलता चाहिए, तो मोस माइक्रोग्राफिक सर्जरी (Mohs Surgery) सबसे बेहतर विकल्प है। इसमें स्वस्थ त्वचा सुरक्षित रहती है और ठीक होने की दर 99% तक होती है। इसके विपरीत, यदि कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों (जैसे पीठ, हाथ या पैर) पर है, आकार में छोटा है और आक्रामक नहीं है, तो सामान्य सर्जिकल एक्सीजन से आसानी से काम चल जाएगा।

क्या बिना सर्जरी के, जैसे टोपिकल क्रीम (Topical Creams) या रेडिएशन थेरेपी के जरिए भी इसका इलाज संभव है?

हां, बेसल सेल कार्सिनोमा (BCC) का इलाज बिना सर्जरी के भी संभव है, लेकिन यह केवल कुछ विशेष स्थितियों में ही किया जाता है। अगर कैंसर शुरुआती चरण में है और केवल त्वचा की ऊपरी सतह तक सीमित है (Superficial BCC), तो टोपिकल क्रीम (जैसे Imiquimod या 5-Fluorouracil) प्रिस्क्राइव करते हैं, जो मरीज को खुद लगानी होती है। वहीं, रेडिएशन थेरेपी का उपयोग तब किया जाता है जब ट्यूमर ऐसी जगह हो जहां सर्जरी करना मुश्किल हो (जैसे पलकें या नाक का कोना), या मरीज की उम्र अधिक हो और वह सर्जरी के लिए फिट न हो।

इस ट्यूमर को पूरी तरह हटाने के लिए कितने सत्र (Sessions) या किस तरह की सर्जिकल प्रक्रिया की आवश्यकता होगी?

बेसल सेल कार्सिनोमा (BCC) को पूरी तरह हटाने के लिए आमतौर पर सिर्फ एक ही मुख्य सर्जिकल सत्र (Single Session) की आवश्यकता होती है। यह एक डे-केयर प्रक्रिया है, यानी मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ती और सर्जरी के बाद उसी दिन छुट्टी मिल जाती है।

सामान्य सर्जिकल एक्सीजन: इसमें लोकल एनेस्थीसिया देकर ट्यूमर और उसके आस-पास की थोड़ी सी सामान्य त्वचा को एक बार में ही काटकर निकाल दिया जाता है।

मोस (Mohs) सर्जरी: यदि ट्यूमर चेहरे पर है, तो डॉक्टर उसी एक सत्र में त्वचा की परतें तब तक निकालते और जांचते रहते हैं, जब तक कैंसर पूरी तरह खत्म न हो जाए।

सर्जरी के बाद प्रभावित हिस्से पर कितना बड़ा निशान (Scar) रहने की आशंका है?

सर्जरी के बाद निशान (Scar) कितना बड़ा होगा, यह पूरी तरह से ट्यूमर के आकार, उसकी गहराई और इस्तेमाल की गई सर्जिकल प्रक्रिया पर निर्भर करता है। आमतौर पर, कैंसर कोशिकाओं को पूरी तरह निकालने के लिए डॉक्टर ट्यूमर के आकार से थोड़ा बड़ा कट लगाते हैं, इसलिए निशान ट्यूमर से थोड़ा बड़ा हो सकता है। यदि मोस सर्जरी (Mohs Surgery) की गई है, तो निशान न्यूनतम होता है क्योंकि इसमें केवल खराब टिश्यूज ही निकाले जाते हैं। शुरुआती हफ्तों में निशान लाल या उभरा हुआ दिख सकता है, लेकिन समय के साथ (लगभग 6 से 12 महीने में) यह हल्का और त्वचा के रंग का हो जाता है।

इलाज के बाद दर्द, सूजन, ब्लीडिंग या इन्फेक्शन जैसे संभावित साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए क्या सावधानियां रखनी चाहिए?

इलाज के बाद साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए घाव की सही देखभाल और स्वच्छता सबसे जरूरी है। डॉक्टर द्वारा बताई गई एंटीबायोटिक क्रीम नियमित रूप से लगाएं और घाव को साफ व सूखा रखें। शुरुआती 48 घंटों में दर्द और सूजन को कम करने के लिए आइस पैक (बर्फ) से सिकाई करें और दर्द निवारक दवाएं लें। घाव पर बनी पपड़ी को खुद न खुरचें। ब्लीडिंग या इन्फेक्शन से बचने के लिए भारी वजन उठाने और कड़े व्यायाम से दूर रहें। यदि घाव से अत्यधिक खून बहे, मवाद निकले या तेज बुखार आए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

इस प्रकार के त्वचा कैंसर के दोबारा (Recurrence) उसी स्थान पर या शरीर के किसी अन्य हिस्से पर उभरने की कितनी संभावना रहती है?

बेसल सेल कार्सिनोमा (BCC) के दोबारा होने (Recurrence) की संभावना आमतौर पर 5% से 10% के बीच होती है। यह जोखिम मुख्य रूप से ट्यूमर के आकार, उसके स्थान और इलाज के तरीके पर निर्भर करता है। यदि इलाज 'मोस सर्जरी' (Mohs Surgery) से किया गया है, तो दोबारा होने की आशंका सबसे कम (लगभग 1% से 2%) होती है। हालांकि, जिन लोगों को एक बार BCC हो चुका है, उनमें अगले 5 सालों के भीतर शरीर के किसी अन्य हिस्से पर नया त्वचा कैंसर विकसित होने का जोखिम लगभग 35% से 50% तक बढ़ जाता है। इसलिए परमानेंट फॉलो-अप जरूरी है।

पूरी तरह ठीक होने के बाद, स्किन री-चेकअप (Follow-up) के लिए साल में कितनी बार डॉक्टर के पास आना अनिवार्य है?

बेसल सेल कार्सिनोमा (BCC) के सफल इलाज के बाद, पहले साल में हर 3 से 6 महीने में डर्मेटोलॉजिस्ट के पास फॉलो-अप के लिए जाना अनिवार्य होता है। इसके बाद, अगले 5 सालों तक साल में कम से कम एक या दो बार (हर 6 से 12 महीने में) स्किन री-चेकअप कराना जरूरी है। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि जिन्हें एक बार BCC हो चुका है, उनमें दोबारा कैंसर उभरने या शरीर के किसी दूसरे हिस्से पर नया ट्यूमर होने का जोखिम काफी अधिक होता है। नियमित फॉलो-अप से किसी भी नए बदलाव की समय पर पहचान हो जाती है।

भविष्य में त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए किस सन प्रोटेक्शन फैक्टर (SPF) और स्किन केयर रूटीन को अपनाना सबसे सही रहेगा?

भविष्य में त्वचा की सुरक्षा और BCC से बचाव के लिए रोजाना कम से कम SPF 30 या उससे अधिक (जैसे SPF 50) का ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन इस्तेमाल करना सबसे सही रहता है, जो UVA और UVB दोनों किरणों से बचाए। साथ ही सनस्क्रीन में PA+ रेटिंग जरूर देखें।

स्किन केयर रूटीन: सुबह चेहरा धोने के बाद एंटीऑक्सीडेंट (जैसे विटामिन-सी सीरम) लगाएं, फिर मॉइस्चराइजर और अंत में सनस्क्रीन लगाएं। घर से निकलने के 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाएं और हर 2 घंटे में इसे दोबारा लगाएं। रात में चेहरा साफ करके मॉइस्चराइज़र जरुर लगाएं।

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