Textile Dermatitis: अक्सर हम फैशन के चक्कर में 'टेक्सटाइल डर्मेटाइटिस' को दावत दे बैठते हैं। नए कपड़ों की डाई, सिंथेटिक फैब्रिक और केमिकल फिनिशिंग आपकी स्किन पर लाल चकत्ते और खुजली की वजह बन सकते हैं। डॉ. पुनीत अग्रवाल से जानिए कैसे आपका पसंदीदा आउटफिट आपकी स्किन के लिए 'साइलेंट किलर' हो सकता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
Textile Dermatitis: फैशन के इस दौर में हम अक्सर कपड़ों का रंग, डिजाइन और फिटिंग तो देखते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि वही कपड़ा हमारी त्वचा के लिए कितना सुरक्षित है। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि नया सूट या टाइट जींस पहनने के बाद शरीर पर लाल चकत्ते पड़ गए हों या अचानक खुजली शुरू हो गई हो? अगर हां, यह सामान्य खुजली नहीं बल्कि 'टेक्सटाइल डर्मेटाइटिस' हो सकती है। आइए समझते हैं कि आखिर क्यों हमारे पसंदीदा कपड़े कभी-कभी हमारी त्वचा के लिए 'जहर' बन जाते हैं।
टेक्सटाइल डर्मेटाइटिस त्वचा की एक ऐसी स्थिति है जिसमें कपड़ों के सीधे संपर्क में आने से जलन, खुजली या सूजन होने लगती है। आसान शब्दों में कहें तो यह कपड़ों के रेशों या उनमें मौजूद रसायनों से होने वाली एलर्जी है। डिजिटल युग में जहां हम ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए नए-नए फैब्रिक ट्राई कर रहे हैं, वहां इस बीमारी के बारे में जानना बहुत जरूरी हो गया है। यह एलर्जी दो कारणों से हो सकती है
कपड़ों के वजह से त्वचा की एलर्जी के बारे में एसएमएस के सीनियर डॉ. पुनीत अग्रवाल से पत्रिका की खास बातचीत।
टेक्सटाइल डर्मेटाइटिस सामान्य स्किन एलर्जी या एक्जिमा से कैसे अलग है? क्या इसके कोई विशिष्ट 'पैटर्न' होते हैं जिन्हें देखकर पहचाना जा सके?
इस सवाल के जवाब में डॉक्टर ने कहा कि सामान्य स्किन एलर्जी या जिसे हम 'एटोपिक एक्जिमा' कहते हैं, वह अक्सर जेनेटिक होती है या आपके शरीर के अंदरूनी इम्यून सिस्टम से जुड़ी होती है। लेकिन टेक्सटाइल डर्मेटाइटिस पूरी तरह से 'बाहरी संपर्क' का मामला है। इसे पहचानने का सबसे आसान तरीका है 'रिएक्शन की जगह'। सामान्य एक्जिमा शरीर के किसी भी हिस्से में, खासकर कोहनी या घुटनों के अंदरूनी मोड़ पर हो सकता है। लेकिन टेक्सटाइल डर्मेटाइटिस केवल वहीं होगा जहां कपड़ा आपकी त्वचा को सीधा छू रहा है। यहीं इसका सबसे बड़ा सबूत है।
आजकल 'जिम वियर' और 'स्पैन्डेक्स' (Spandex) का इस्तेमाल बढ़ा है। क्या पसीने और टाइट सिंथेटिक कपड़ों का मेल इस समस्या को गंभीर बना देता है?
जिम वियर या स्पैन्डेक्स को शरीर से चिपके रहने के लिए बनाया जाता है, ताकि वे शरीर को शेप दे सकें। लेकिन त्वचा के स्वास्थ्य के नजरिए से यह एक 'डेंजरस कॉम्बिनेशन' है। इसके पीछे तीन मुख्य वैज्ञानिक कारण हैं-
क्या कुछ खास रंग (जैसे गहरा नीला या काला) अन्य रंगों की तुलना में अधिक एलर्जी पैदा करते हैं? इसके पीछे क्या वैज्ञानिक कारण है?
जी हां, यह पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है। क्लिनिक में हमारे पास आने वाले टेक्सटाइल डर्मेटाइटिस के 70-80% मामलों में देखा गया है यह गहरे रंग के कपड़ों की वजह से होता है। इसमें सबसे बड़ा विलेन का काम 'डिस्पर्स डाई' (Disperse Dyes) करता है।
इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों को हम तीन बिंदुओं में समझ सकते हैं:
जो लोग ऑफिस में पूरे दिन फॉर्मल (टाइट फिटिंग और सिंथेटिक मिक्स) कपड़े पहनते हैं, उनके लिए आपकी क्या सलाह है?
ऑफिस की 'ड्रेस कोड' अक्सर हमारी त्वचा की 'सांस' लेने की क्षमता को छीन लेती है। पूरे दिन बंद जूतों, टाइट कॉलर और सिंथेटिक ड्रेस में रहने से त्वचा पर 'क्रॉनिक इरिटेशन' (लगातार जलन) पैदा होती है।
जो लोग ऐसे कपड़े पहनते हैं, उनके लिए मेरी ये 4 मुख्य सलाह हैं
डिटर्जेंट चुनते समय हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि कपड़ों में जलन पैदा करने वाले तत्व न बचें?
यह एक बहुत ज़रूरी पॉइंट है। हम अक्सर 'सफेदी' और 'खुशबू' के पीछे भागते हैं, लेकिन त्वचा के लिए ये दोनों ही चीजें खतरनाक हो सकती हैं। जब हम कपड़े धोते हैं, तो डिटर्जेंट के कण कपड़े के रेशों के अंदर फंस जाते हैं। जब हम वह कपड़ा पहनते हैं और हमें पसीना आता है, तो वह पसीना उन रसायनों को फिर से सक्रिय कर देता है, जिससे 'डिटर्जेंट डर्मेटाइटिस होता है।
मेरी सलाह है कि डिटर्जेंट चुनते और इस्तेमाल करते समय इन 4 बातों का खास ख्याल रखें:
बच्चों के कपड़ों के लिए क्या अलग सावधानी चाहिए?
बच्चों की त्वचा वयस्कों की तुलना में 30% पतली होती है। उनके लिए हमेशा 'बेबी-सेफ' या 'हाइपोएलर्जेनिक' (Hypoallergenic) डिटर्जेंट का ही उपयोग करें। उनके कपड़ों में कभी भी 'ब्लीच' या कड़क 'नील' का इस्तेमाल न करें।