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Jafar Panahi: क्यों चर्चा में आए ईरान के जाफर पनाही? अपने ही देश की सरकार ने लगाया 20 वर्ष का कठोर प्रतिबंध

Jafar Panahi: ईरान के मशहूर फिल्म डायरेक्टर जाफर पनाही पर उनके अपने ही देश की सरकार ने खूब सारे प्रतिबंध लगाए। उनको घर में नजरबंद रखा गया। इसके बावजूद वह महिलाओं और सामाजिक जुल्मों को लेकर फिल्म बनाते रहे। आइए उनके बारे में विस्तार से जानते हैं।
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Apr 09, 2026
Iranian Film Director Jafar Panahi
ईरान के मशहूर फिल्म डायरेक्टर जाफर पनाही (AI Generated)

Jafar Panahi : जाफर पनाही सिर्फ एक फिल्म निर्देशक नहीं है। दुनिया में उनके करोड़ों प्रशंसक उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रतीक के तौर पर देखते हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि कला को दबाया नहीं जा सकता। कठिन परिस्थितियों और तमाम तरह के प्रतिबंधों के बावजूद उन्होंने अपना काम जारी रखा और दुनिया के सामने यह मिसाल पेश की कि सिनेमा सामाजिक परिवर्तन का एक शक्तिशाली माध्यम हो सकता है। पनाही की कहानी यह प्रेरणा देती है कि अगर किसी के इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा दूर की जा सकती है। आइए जानते हैं उनकी संघर्षों से भरी कहानी।

Who is Jafar Panahi? जाफर पनाही समकालीन विश्व सिनेमा के सबसे साहसी और प्रभावशाली निर्देशकों में गिने जाते हैं। उनका नाम उन फिल्मकारों में लिया जाता है, जिन्होंने कठिन राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता को बनाए रखा और सिनेमा को सामाजिक व राजनीतिक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बनाया।

'मैं ईरान लौट जाउंगा, भले ही इसमें जोखिम क्यों न हो'

फिल्म निर्माता अपनी फिल्म It Was Just an Accident के प्रचार के लिए ईरान से बाहर थे, जिसके लिए उन्हें मई 2025 में 78वें कान फिल्म फेस्टिवल में प्रतिष्ठित पाल्मे डी’ओर पुरस्कार मिला था। यह फिल्म उन्होंने ईरान में गुप्त रूप से शूट की थी। इसके अलावा, इस फिल्म को 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स में बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म और बेस्ट ओरिजिनल स्क्रीनप्ले के लिए नामांकन भी मिला। पनाही ने फरवरी में दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि वह ऑस्कर अभियान समाप्त होने के बाद ईरान लौट आएंगे, भले ही इसमें जोखिम क्यों न हो। वह 31 मार्च को ईरान लौट चुके हैं। यह बताया जा रहा है कि पाल्मे डी’ओर विजेता पनाही उड़ान प्रतिबंधों के कारण तुर्की के रास्ते ज़मीनी मार्ग से देश में दाखिल हुए।

इस्लामिक रिपब्लिक अपने पतन को टालने के लिए कर रही खून-खराबा

13 जनवरी 2026 को नेशनल बोर्ड ऑफ रिव्यू अवॉर्ड्स गाला में कहा कि उनके देश की स्थिति 'नरसंहार' जैसी हो गई है। उन्होंने समारोह में कहा, 'इस्लामिक रिपब्लिक अपने पतन को टालने के लिए खून-खराबा कर रही है। लाशों पर लाशें जमा हो रही हैं, और जो लोग बच गए हैं, वे अपने प्रियजनों के निशान लाशों के ढेरों के बीच खोज रहे हैं। यह अब कोई रूपक नहीं है। यह कोई कहानी नहीं है। यह कोई फिल्म नहीं है। यह एक वास्तविकता है, जो हर दिन गोलियों से छलनी हो रही है।' उन्होंने यह भी कहा, 'इस पुरस्कार को स्वीकार करते हुए मैं इसे अपना कर्तव्य मानता हूं कि कलाकारों और वैश्विक फिल्म समुदाय से अपील करूं कि वे आवाज उठाएं और चुप न रहें।'

पिछले साल भी उनपर ईरानी सरकार ने लगाया था बैन

दिसंबर 2025 में पनाही को ईरान की क्रांतिकारी अदालत ने अनुपस्थिति में एक साल की जेल की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही 'राज्य के खिलाफ प्रचार' के आरोप में उन पर दो साल का यात्रा प्रतिबंध भी लगाया गया था।

ईरानी सरकार ने पनाही पर 20 वर्षों का लगाया था कठोर प्रतिबंध

जाफर पनाही के सिनेमा और वक्तव्यों में प्रकट हुए विचारों से सत्तानशीन लोगों को ठेस पहुंचती है। वह इस बात को जानते हुए भी बार—बार यह गुनाह करते हैं। वह गुनाह का हश्र भी जानते हैं, लेकिन इंसानियत के बारे में पक्के विचारों के कारण उन्हें गंभीर राजनीतिक दमन का सामना भी करना पड़ा। ईरानी फिल्म निर्देशक जाफर पनाही को 2010 में ईरान सरकार ने गिरफ्तार कर लिया। इतना ही नहीं सरकार ने उनपर 20 वर्ष तक फिल्म बनाने, पटकथा लिखने, देश से बाहर जाने और मीडिया से बातचीत तक पर रोक लगा दी। उन पर "व्यवस्था के विरुद्ध प्रचार" और सरकार विरोधी प्रदर्शनों का समर्थन करने के आरोप में यह प्रतिबंध लगाया गया, क्योंकि उनकी फिल्में ईरान की स्थिति की आलोचना करती थीं। पनाही ने इसके बावजूद पनाही ने हार नहीं मानी। उन्होंने प्रतिबंधों के बीच ही फिल्में बनाना जारी रखा। यह उनकी रचनात्मकता और साहस का प्रमाण है। उन्होंने प्रतिबंध के दौरान कई फिल्में बनाई।

This Is Not a Film: बंदिशों के बावजूद बना डाली फिल्म

दिस इज़ नॉट अ फिल्म (This Is Not a Film) उन्होंने 2010 में खुद पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद अगले ही साल यानी 2011 में बनाई। उन्हें घर के अंदर नजरबंद कर दिया गया था। यह फिल्म उनके घर में ही बनाई गई और इसे एक पेन ड्राइव में छुपाकर विदेश भेजा गया। यह एक तरह की वीडियो डायरी या आत्मकथात्मक दस्तावेज है। इसमें पनाही अपने अपार्टमेंट में रहते हुए अपने दिनचर्या, विचारों और उस फिल्म की कहानी को साझा करते हैं, जिसे वे बना नहीं पा रहे थे। वे कैमरे के सामने बैठकर बताते हैं कि अगर उन्हें फिल्म बनाने की अनुमति होती, तो वे उसे कैसे बनाते।

टैक्सी में खुद ही निभाई ड्राइवर की भूमिका

टैक्सी फिल्म में पनाही खुद एक टैक्सी ड्राइवर की भूमिका निभाते हैं और समाज के विभिन्न पहलुओं को दिखाते हैं। यह फिल्म बेहद सीमित संसाधनों से बनाई गई थी। इस फिल्म की शूटिंग टैक्सी के अंदर ही की गई। टैक्सी के अंदर छोटे-छोटे कैमरे लगाए गए थे, ताकि यात्रियों से होने वाली उनकी बातचीत को रिकॉर्ड किया जा सके। इस फिल्म में कलाकार की भूमिका उनकी टैक्सी में सफर करने वाले यात्रियों ने ही निभाई थी। इस फिल्म ने बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ‘गोल्डन बेयर’ पुरस्कार जीता। इन फिल्मों ने यह साबित कर दिया कि सिनेमा केवल संसाधनों पर निर्भर नहीं होता, बल्कि विचार और दृष्टिकोण ही उसकी असली ताकत होते हैं।

किशोरवस्था में ही फिल्में बनाने लगे थे जाफर पनाही

जाफर पनाही का जन्म 11 जुलाई 1960 को ईरान के मियानेह शहर में हुआ था। वे एक साधारण परिवार से आते हैं, लेकिन बचपन से ही कला और कहानी कहने में उनकी रुचि थी। उन्होंने किशोरावस्था में ही लघु फिल्में बनाना शुरू कर दिया था। बाद में उन्होंने तेहरान फिल्म स्कूल से फिल्म निर्माण की शिक्षा प्राप्त की। उनका जीवन ईरान के सामाजिक और राजनीतिक माहौल से गहराई से प्रभावित रहा। यही कारण है कि उनकी फिल्मों में आम लोगों के संघर्ष, सामाजिक असमानता और राजनीतिक दमन जैसे विषय प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं।

फिल्म निर्देशक कियारोस्तामी की शार्गिदी में शुरू हुआ करियर

जफर पनाही ने अपने करियर की शुरुआत प्रसिद्ध ईरानी निर्देशक अब्बास कियारोस्तामी के साथ सहायक निर्देशक के रूप में की। कियारोस्तामी के साथ काम करने से उन्हें यथार्थवादी सिनेमा की समझ मिली, जिसका प्रभाव उनकी फिल्मों में साफ देखा जा सकता है। पनाही की फिल्मों की खासियत यह है कि वे साधारण कहानियों के माध्यम से गहरे सामाजिक और राजनीतिक संदेश देते हैं।

पनाही ने पहली फीचर फिल्म द व्हाइट बैलून बनाई

उनकी पहली फीचर फिल्म द व्हाइट बैलून थी, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना मिली। इस फिल्म ने कान फिल्म फेस्टिवल में ‘कैमरा डी'ओर’ पुरस्कार जीता, जो सर्वश्रेष्ठ फिल्म की कैटिगिरी में पहली फिल्म के लिए दिया जाता है।

सामाजिक बराबरी की वकालत करती हैं पनाही की फिल्में

द सर्कल: यह फिल्म ईरान में महिलाओं की स्थिति को उजागर करती है। इसे कई देशों में सराहा गया, लेकिन ईरान में इसे प्रतिबंधित कर दिया गया।

क्रिमसन गोल्ड: यह फिल्म सामाजिक असमानता और वर्ग विभाजन पर केंद्रित है।

ऑफसाइड: इसमें महिलाओं को फुटबॉल स्टेडियम में प्रवेश न मिलने की समस्या को दिखाया गया है।

इन फिल्मों में पनाही ने समाज के उन पहलुओं को सामने लाने की कोशिश की, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।

जाफर को गैर-पेशेवर कलाकारों के साथ काम करना भाता था

जाफर पनाही की फिल्मों की शैली यथार्थवादी (Realist) है। वे अक्सर गैर-पेशेवर कलाकारों के साथ काम करते हैं और वास्तविक लोकेशनों पर शूटिंग करते हैं। उनकी फिल्मों में डॉक्यूमेंट्री और फिक्शन का मिश्रण देखने को मिलता है, जिससे उनकी कहानियां और भी प्रभावशाली बन जाती हैं। उनकी फिल्मों में आम आदमी की कहानी तवज्जो पाती हैं। उनकी पहचान खासतौर पर महिलाओं, गरीबों और समाज के हाशिए पर खड़े लोगों की कहानी पर फिल्म बनाने के चलते है।

अंतरराष्ट्रीय पहचान और पुरस्कार

पनाही को दुनिया भर में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं। वे उन कुछ फिल्मकारों में से हैं, जिन्हें कान, वेनिस और बर्लिन जैसे बड़े फिल्म समारोहों में सम्मानित किया गया है। उनकी फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जाता है, क्योंकि वे न केवल ईरान की वास्तविकता को दिखाती हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार और स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को भी उजागर करती हैं।