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Kerala Election 2026: क्या केरल में फिर से बनेगी पिनाराई विजयन की सरकार या इन गलतियों के चलते सत्ता से होगी दूर?

Kerala Election 2026: केरल में विधानसभा चुनाव के लिए आज मतदान संपन्न हो गया। 4 मई को चुनाव के परिणाम आएंगे। राज्य में पिनाराई सरकार के दो कार्यकाल में किए गए कार्य को जनता तवज्जो देगी या बीजेपी के प्रयास अपना रंग दिखाएंगे? आइए जानते हैं।

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Apr 09, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पिनाराई विजयन (Photo: IANS)

Kerala Election 2026: केरल में वामपंथी नेता पिनाराई विजयन के नेतृत्व में राज्य के पिछले दो कार्यकाल में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला है। कई मामलों में राज्य का हाल देश में सबसे बेहतर है। यही वजह है कि पिनाराई के कार्यकाल को अक्सर “मानव विकास मॉडल” के सुदृढ़ीकरण का दौर कहा जाता है। पिनाराई के नेतृत्व में केरल ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। आइए जानते हैं कि केरल में पिछले 10 वर्षों में कितनी तरक्की हुई है?

किसी भी समाज के विकास को, वहां की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार व्यवस्था के मोर्चे पर तरक्की के जरिए समझ जा सकता है। कुछ महीने पहले ही केरल देश का पहला अत्यधिक गरीबी उन्मूलन करने वाला राज्य बना। देश में केरल पहला ऐसा राज्य बना, जिसने शत-प्रतिशत साक्षरता हासिल की। केरल पहले से ही उच्च साक्षरता, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा के लिए जाना जाता रहा है। विजयन सरकार ने इन आधारों को मजबूत करते हुए “समावेशी विकास” पर जोर दिया।

केरल: शिक्षा क्षेत्र में प्रगति

हिंदी राज्यों से जहां एक ओर सरकारी स्कूलों के लगातार बंद किए जाने की खबर आती रही, वहीं केरल ने इस मोर्चे पर जोरदार काम किया। यही वजह है कि शिक्षा के मामले राज्य शीर्ष पर है। राज्य में निजी स्कूलों से लोग अपने बच्चों को निकाल कर सरकारी स्कूलों में डालते रहे। खास बात यह है कि पिनराई सरकार ने सरकारी शिक्षा के बुनियादी ढांचा और सरकारी स्कूलों को पुनर्जीवन देने का काम किया है। पिनाराई विजयन ने वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने पहले कार्यकाल में ही “पब्लिक एजुकेशन रेजुवेनेशन मिशन” के तहत सरकारी स्कूलों का बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण करवाया।

केरल की सरकारी स्कूलों में पिछले 10 वर्षों में शिक्षा हुई बेहतर

  • केरल में 2016–2021 के बीच 45,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाए गए।
  • कक्षा 8 से 12 तक लगभग 100% स्कूलों को हाई-टेक बनाया गया
  • प्राथमिक स्तर (कक्षा 1–7) के 12,000+ स्कूलों को भी डिजिटल बनाया गया
  • प्रोजेक्टर, लैपटॉप, इंटरनेट और डिजिटल कंटेंट की सुविधा उपलब्ध कराई गई
  • 5,000 से ज्यादा नए या स्कूल भवनों का पुर्ननिर्माण किया गया
  • 3 लाख वर्गमीटर से अधिक नया इंफ्रास्ट्रक्चर
  • आधुनिक लैब, लाइब्रेरी, आईटी लैब और स्पोर्ट्स सुविधाएं विकसित
  • कई स्कूलों को अतंरराष्ट्रीय मानकों के बराबर अपग्रेड किया गया। इनमें रोबोटिक्स लैब, 3D प्रिंटिंग और STEM शिक्षा सुविधाएं बहाल की गईं।
  • स्टेम शिक्षा यानी विज्ञान (Science), प्रौद्योगिकी (Technology), अभियांत्रिकी (Engineering) और गणित (Mathematics) का एकीकृत अध्ययन। इसमें सिर्फ थ्योरी नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट आधारित सीखना होता है।

केरल के सरकारी स्कूलों में जीरो ड्रॉपआउट, बढ़ रहे विद्यार्थी

  • 2016 के बाद से 2025 तक सरकारी स्कूलों में 10 लाख से अधिक अतिरिक्त छात्र जुड़े
  • वर्ष 2016–2021 तक यानी पहले कार्यकाल में लगभग 6.8 लाख नए छात्र-छात्राओं ने सरकारी स्कूलों में नामांकण कराया
  • कोरोना काल में लगभग 4–5 लाख छात्रों ने प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में नामांकन कराया। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और मुफ्त सुविधाओं के कारण यह ट्रेंड जारी रहा।
  • केरल में ड्रॉपआउट रेट लगभग शून्य पर पहुंच गया, जो भारत में सबसे कम है।
  • केरल में प्रवासी और श्रमिक बच्चों के लिए ''ज्योति'' जैसी योजनाओं के जरिए शिक्षा से जोड़ने की पहल

उच्च शिक्षा में एससी और एसटी छात्रों को बड़े पैमाने पर छात्रवृत्ति

  • 2026 बजट में घोषणा फ्री डिग्री शिक्षा
  • विश्वविद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर और रिसर्च को बढ़ावा
  • स्टार्टअप और स्किल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा
  • अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को बड़े पैमाने पर छात्रवृत्ति
  • 80,000 अनुसूचित जाति और 4.5 लाख अनुसूचित जनजाति के छात्रों को सहायता

'बेहतर स्वास्थ्य सेवा के चलते वामपंथ को मिला दूसरा मौका'

केरल में राज्य स्तरीय अस्पतालों में ही नहीं, ​बल्कि ब्लॉक लेवल के अस्पतालों में बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। पिनाराई सरकार के नेतृत्व मे केरल के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूती प्रदान की गई है। मशहूर साहित्यकार रति सक्सेना जो कई दशकों पहले राजस्थान से केरल में रह रही हैं, उन्होंने पत्रिका से बातचीत में बताया कि स्वास्थ्य सेवा ही कारण था, जिसके चलते वामपंथ की दूसरी बार सरकार बनने में मदद की। राज्य में कई लेवल पर स्वास्थ्य केंद्र होते हैं। पंचायत स्तर के स्वास्थ्य केंद्र भी अच्छे होते हैं। उत्तर भारत की तरह कामगार, मजदूर झोलाछाप या कम्पाउंडर के पास जाकर सुई नहीं लगवा लेते हैं। यहां उन्हें भी राज्य की बेहतर चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलता है। अभी केरल के हर गली और सड़क पर बड़े प्राइवेट अस्पताल खुल चुके हैं। यहां मजदूरी अच्छी है तो लोग प्राइवेट में भी इलाज कराने भी जाने लगे हैं।

'शैलजा को मंत्रिमंडल से हटाना सरकार की सबसे बड़ी गलती'

रति बताती हैं कि कोरोना काल में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री के. के. शैलजा कुमारी ने बहुत अच्छा काम किया था। वह पहले स्कूल में शिक्षिका थीं, इसलिए बहुत से डॉक्टर उनके विद्यार्थी रह चुके थे। उनके छात्र रहे डॉक्टर उनका बहुत ज्यादा सम्मान करते थे। शैलजा को मंत्रिमंडल में दोबारा शामिल नहीं करना पिनाराई सरकार की सबसे बड़ी गलती थी। वह कहती हैं कि वामपंथी सरकार ऐसा करती आई है। गौरी अम्मा के साथ भी बुरा किया था।

  • 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के अस्पताल विकास प्रोजेक्ट पर खर्च किए गए।
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को “फैमिली हेल्थ सेंटर” में अपग्रेड किया गया।
  • जिला अस्पतालों में सुपर-स्पेशियलिटी तक की सुविधाएं।
  • शिशु मृत्यु दर 5 प्रति 1000, जो राष्ट्रीय औसत 25 से काफी कम है।
  • 80.7% लोगों को केरल में मृत्यु से पहले चिकित्सा सुविधा, जबकि राष्ट्रीय औसत सिर्फ 48.7% है।
  • जीवन प्रत्याशा के मामले में केरल लगभग 75 वर्ष से ज्यादा, यह भारत में सबसे अधिक है।
  • कोविड-19, निपाह, जीका जैसी बीमारियों से प्रभावी ढंग से मुकाबला में सक्षम।

देश में गरीबी उन्मूलन वाला पहला राज्य बना केरल

केरल में गरीबी दर 0.48%–0.55% है, जो देश में सबसे कम है। राज्य सरकार ने इस मामले में उल्लेखनीय प्रयास करते हुए करीब 59,000 परिवारों को “अत्यधिक गरीबी” से बाहर निकालने में कामयाबी हासिल की। वर्ष 2021 में पिनाराई विजयन ने राज्य की दूसरी बार सत्ता संभालने के बाद गरीबी उन्मूलन का फैसला लिया। राज्य-स्तरीय सर्वेक्षण के जरिए करीब 60 हजार बेहद गरीब परिवारों को चिन्हित किया। आगामी चार वर्षों में राज्य में स्थानीय स्वशासी निकायों के माध्यम से प्रत्येक परिवार के लिए विशेष रूप से सूक्ष्म योजनाएं क्रियान्वित की गईं। फरवरी 2024 में कुट्टियाट्टूर पंचायत को राज्य का पहला स्थानीय निकाय घोषित किया गया जो 'अत्यधिक गरीबी' से मुक्त हुआ। इसके बाद करीब डेढ़ साल से ज्यादा समय में पूरे राज्य को अत्यधिक गरीब उन्मूलन कराने वाले राज्य का गौरव हासिल किया।

लेफ्ट और कांग्रेस को नुकसान होगा, BJP की ओर झुकाव बढ़ा

रति बताती हैं कि ऐसा नहीं कि पिनाराई सरकार बहुत अच्छा कर रही है। बहुत भ्रष्टाचार भर गया है। अहंकार भी बहुत ज्यादा बढ़ गया है। मैं जितने ड्राइवर, कामगारों आदि को जानती हूं, वे बीजेपी की तरफ झुके हैं। इस बार लेफ्ट को क्रिश्चियन मतदाताओं के वोट मिलेंगे, जो उनके आमतौर पर वोटर नहीं रहे हैं। हालांकि, इससे वामपंथ और कांग्रेस दोनों को ही नुकसान होगा।

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