Kerala Election 2026: केरल में विधानसभा चुनाव के लिए आज मतदान संपन्न हो गया। 4 मई को चुनाव के परिणाम आएंगे। राज्य में पिनाराई सरकार के दो कार्यकाल में किए गए कार्य को जनता तवज्जो देगी या बीजेपी के प्रयास अपना रंग दिखाएंगे? आइए जानते हैं।
Kerala Election 2026: केरल में वामपंथी नेता पिनाराई विजयन के नेतृत्व में राज्य के पिछले दो कार्यकाल में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला है। कई मामलों में राज्य का हाल देश में सबसे बेहतर है। यही वजह है कि पिनाराई के कार्यकाल को अक्सर “मानव विकास मॉडल” के सुदृढ़ीकरण का दौर कहा जाता है। पिनाराई के नेतृत्व में केरल ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। आइए जानते हैं कि केरल में पिछले 10 वर्षों में कितनी तरक्की हुई है?
किसी भी समाज के विकास को, वहां की शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार व्यवस्था के मोर्चे पर तरक्की के जरिए समझ जा सकता है। कुछ महीने पहले ही केरल देश का पहला अत्यधिक गरीबी उन्मूलन करने वाला राज्य बना। देश में केरल पहला ऐसा राज्य बना, जिसने शत-प्रतिशत साक्षरता हासिल की। केरल पहले से ही उच्च साक्षरता, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा के लिए जाना जाता रहा है। विजयन सरकार ने इन आधारों को मजबूत करते हुए “समावेशी विकास” पर जोर दिया।
हिंदी राज्यों से जहां एक ओर सरकारी स्कूलों के लगातार बंद किए जाने की खबर आती रही, वहीं केरल ने इस मोर्चे पर जोरदार काम किया। यही वजह है कि शिक्षा के मामले राज्य शीर्ष पर है। राज्य में निजी स्कूलों से लोग अपने बच्चों को निकाल कर सरकारी स्कूलों में डालते रहे। खास बात यह है कि पिनराई सरकार ने सरकारी शिक्षा के बुनियादी ढांचा और सरकारी स्कूलों को पुनर्जीवन देने का काम किया है। पिनाराई विजयन ने वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने पहले कार्यकाल में ही “पब्लिक एजुकेशन रेजुवेनेशन मिशन” के तहत सरकारी स्कूलों का बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण करवाया।
केरल में राज्य स्तरीय अस्पतालों में ही नहीं, बल्कि ब्लॉक लेवल के अस्पतालों में बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। पिनाराई सरकार के नेतृत्व मे केरल के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूती प्रदान की गई है। मशहूर साहित्यकार रति सक्सेना जो कई दशकों पहले राजस्थान से केरल में रह रही हैं, उन्होंने पत्रिका से बातचीत में बताया कि स्वास्थ्य सेवा ही कारण था, जिसके चलते वामपंथ की दूसरी बार सरकार बनने में मदद की। राज्य में कई लेवल पर स्वास्थ्य केंद्र होते हैं। पंचायत स्तर के स्वास्थ्य केंद्र भी अच्छे होते हैं। उत्तर भारत की तरह कामगार, मजदूर झोलाछाप या कम्पाउंडर के पास जाकर सुई नहीं लगवा लेते हैं। यहां उन्हें भी राज्य की बेहतर चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलता है। अभी केरल के हर गली और सड़क पर बड़े प्राइवेट अस्पताल खुल चुके हैं। यहां मजदूरी अच्छी है तो लोग प्राइवेट में भी इलाज कराने भी जाने लगे हैं।
रति बताती हैं कि कोरोना काल में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री के. के. शैलजा कुमारी ने बहुत अच्छा काम किया था। वह पहले स्कूल में शिक्षिका थीं, इसलिए बहुत से डॉक्टर उनके विद्यार्थी रह चुके थे। उनके छात्र रहे डॉक्टर उनका बहुत ज्यादा सम्मान करते थे। शैलजा को मंत्रिमंडल में दोबारा शामिल नहीं करना पिनाराई सरकार की सबसे बड़ी गलती थी। वह कहती हैं कि वामपंथी सरकार ऐसा करती आई है। गौरी अम्मा के साथ भी बुरा किया था।
केरल में गरीबी दर 0.48%–0.55% है, जो देश में सबसे कम है। राज्य सरकार ने इस मामले में उल्लेखनीय प्रयास करते हुए करीब 59,000 परिवारों को “अत्यधिक गरीबी” से बाहर निकालने में कामयाबी हासिल की। वर्ष 2021 में पिनाराई विजयन ने राज्य की दूसरी बार सत्ता संभालने के बाद गरीबी उन्मूलन का फैसला लिया। राज्य-स्तरीय सर्वेक्षण के जरिए करीब 60 हजार बेहद गरीब परिवारों को चिन्हित किया। आगामी चार वर्षों में राज्य में स्थानीय स्वशासी निकायों के माध्यम से प्रत्येक परिवार के लिए विशेष रूप से सूक्ष्म योजनाएं क्रियान्वित की गईं। फरवरी 2024 में कुट्टियाट्टूर पंचायत को राज्य का पहला स्थानीय निकाय घोषित किया गया जो 'अत्यधिक गरीबी' से मुक्त हुआ। इसके बाद करीब डेढ़ साल से ज्यादा समय में पूरे राज्य को अत्यधिक गरीब उन्मूलन कराने वाले राज्य का गौरव हासिल किया।
रति बताती हैं कि ऐसा नहीं कि पिनाराई सरकार बहुत अच्छा कर रही है। बहुत भ्रष्टाचार भर गया है। अहंकार भी बहुत ज्यादा बढ़ गया है। मैं जितने ड्राइवर, कामगारों आदि को जानती हूं, वे बीजेपी की तरफ झुके हैं। इस बार लेफ्ट को क्रिश्चियन मतदाताओं के वोट मिलेंगे, जो उनके आमतौर पर वोटर नहीं रहे हैं। हालांकि, इससे वामपंथ और कांग्रेस दोनों को ही नुकसान होगा।