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Patrika Interview: एक तस्वीर ने बदल दी जिंदगी, अखबार में फोटो छपवाने की जिद से शुरू हुआ हॉकी का सफर, युवराज ने सुनाई कहानी

Yuvraj Walmiki: छठवीं कक्षा में सहपाठी की तस्वीर अखबार में देखकर युवराज वाल्मीकि ने भी हॉकी खेलकर अपनी फोटो छपवाने की जिद ठान ली। बचपन की यही चाह उन्हें भारतीय सीनियर हॉकी टीम तक ले गई।
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Oct 22, 2026
Chhattisgarh News
युवराज वाल्मीकि (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Indian Hockey Player: देश में हॉकी की नई पौध तैयार करने के लिए हर राज्य में छत्तीसगढ़ की तर्ज पर लीग शुरू करने की सख्त जरूरत है। इससे जमीनी स्तर पर छिपी प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें तराशने में मदद मिलेगी। यह कहना है पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी युवराज वाल्मीकि का। ’छत्तीसगढ़ हॉकी लीग’ (सीएचएल-1) में ’चक्रधर चैंपियंस’ टीम की ओर से खेलने रायपुर पहुंचे युवराज वाल्मीकि ने ’पत्रिका’ से विशेष बातचीत में अपने अनुभव, खेल के भविष्य और युवाओं के लिए जरूरी मंत्र साझा किए।

पत्रिका: सीएचएल के आयोजन से छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को क्या फायदा होगा?
युवराज:
जब हम युवा थे, तब इस तरह का मंच उपलब्ध नहीं था। आज खुशी की बात है कि 15-16 साल के उभरते खिलाड़ियों को देश के अनुभवी और सीनियर ओलंपियनों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने, खेलने और सीखने का सीधा अवसर मिल रहा है। खिलाड़ियों को इस सुनहरे मौके को भुनाना चाहिए। छत्तीसगढ़ हॉकी फेडरेशन की यह ऐतिहासिक पहल अन्य राज्यों को भी अपने यहां ऐसी राज्य स्तरीय लीग शुरू करने की प्रेरणा देगी।

पत्रिका: चक्रधर चैंपियंस की खिताबी जीत के लिए कैसी रणनीति बनाई है?
युवराज:
टीम की कमान ओलंपियन एसवी सुनील के हाथों में है। सुनील और मैंने भारतीय टीम में करीब 6 साल तक एक साथ खेला है, इसलिए हमारा तालमेल बेहतरीन है। टीम के अभ्यास सत्र में युवा खिलाडिय़ों को यही सिखा रहे हैं कि वे किसी दबाव के बिना अपनी स्वाभाविक क्षमता का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें।

पत्रिका: मोबाइल और स्क्रीन टाइम के दौर में पैरेंट्स के लिए आपका क्या संदेश है?
युवराज:
मेरी अभिभावकों से अपील है कि वे बच्चों को मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन से दूर कर खेल के मैदान से जोड़ें। हॉकी को एक मजबूत करियर विकल्प के रूप में अपनाने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करें। साथ ही आम दर्शकों को भी स्टेडियम आकर खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाना चाहिए।

पत्रिका: आपने हॉकी को करियर के रूप में कब और कैसे चुना?
युवराज:
यह किस्सा बेहद दिलचस्प है। साल 1999 में जब मैं छठवीं कक्षा में था, तब अखबार में अपने एक सहपाठी की छपी तस्वीर देखी। उस दिन मन में यह जिद ठान ली कि मुझे भी हॉकी खेलनी है और अखबार में अपनी फोटो लानी है। वहीं से मेरा सफर शुरू हुआ। इसके बाद वर्ष 2010 में मुझे भारतीय सीनियर टीम में जगह मिली और 2015 तक तिरंगे की शान के लिए देश का प्रतिनिधित्व करने का गौरव हासिल हुआ।

पत्रिका: भारतीय हॉकी को वैश्विक स्तर पर और मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए?
युवराज:
इसके लिए ग्रासरूट स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना होगा। यदि जमीनी स्तर पर आधुनिक प्रशिक्षण, अच्छे कोच और सालभर नियमित प्रतियोगिताएं मिलें, तो देश के कोने-कोने से निकलकर खिलाड़ी नेशनल टीम तक पहुंचेंगे।

Updated on:
22 Oct 2026 12:58 pm
Published on:
22 Oct 2026 12:58 pm