
भारत को दुनिया का बड़ा विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार देश के अलग-अलग हिस्सों में नए औद्योगिक शहर और औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर रही है। इसी कड़ी में अगस्त 2024 में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (NICDP) के तहत 10 राज्यों में 12 नए औद्योगिक नोड/शहरों को मंजूरी दी गई।
सरकार ने इन 12 परियोजनाओं के लिए 28,602 करोड़ रुपये की परियोजना लागत मंजूर की है। इनका कुल क्षेत्रफल 25,975 एकड़ है, जबकि सरकार के मुताबिक इनसे करीब 1.53 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने और 9.39 लाख रोजगार पैदा होने की संभावना है।
इन परियोजनाओं को सिर्फ कारखानों का समूह नहीं बनाया जाना है। सरकार इन्हें सड़क, रेल, बिजली, पानी, सीवेज, हरित क्षेत्र और दूसरी सुविधाओं से लैस आधुनिक औद्योगिक शहरों के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है। लेकिन जैसे-जैसे यहां उद्योग और आबादी आएगी, एक सवाल सबसे अहम होगा—इन शहरों के लिए पानी कहां से आएगा?
ऊधमसिंह नगर में बनने वाला खुरपिया औद्योगिक क्षेत्र 1,002 एकड़ में फैलेगा। इसकी परियोजना लागत 1,265 करोड़ रुपये, निवेश क्षमता 6,180 करोड़ रुपये और रोजगार क्षमता 75,057 है।
यह रुद्रपुर से करीब 17 किलोमीटर दूर है और एनएच-09, एनएच-109 तथा एसएच-44 से जुड़ा है। यहां ऑटोमोबाइल, ऑटो-पार्ट्स और इंजीनियरिंग उद्योगों पर जोर रहेगा।
पंजाब में यह औद्योगिक नोड 1,099 एकड़ में विकसित होगा। परियोजना लागत 1,367 करोड़ रुपये, निवेश क्षमता 7,500 करोड़ रुपये और रोजगार क्षमता 64,204 है।
यह एनएच-44 और एनएच-64 के जंक्शन के पास है। राजपुरा रेलवे जंक्शन और पूर्वी समर्पित माल ढुलाई गलियारे से इसकी कनेक्टिविटी होगी। यहां इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा, रसायन, दवा, मशीनरी और रबर-प्लास्टिक उद्योगों पर ध्यान दिया जाएगा।
हिसार का औद्योगिक शहर 2,988 एकड़ में विकसित किया जा रहा है। परियोजना लागत 4,680 करोड़ रुपये, निवेश क्षमता 32,417 करोड़ रुपये और रोजगार क्षमता 1.25 लाख है।
यह हिसार हवाई अड्डे के पास है और एनएच-52, एनएच-09 तथा रेल नेटवर्क से जुड़ा है। यहां एयरोस्पेस, रक्षा, विमान रखरखाव, इंजीनियरिंग, खाद्य प्रसंस्करण और कपड़ा उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा।
आगरा में 1,058 एकड़ में औद्योगिक नोड विकसित होगा। इसकी लागत 1,812 करोड़ रुपये, निवेश क्षमता 3,447 करोड़ रुपये और रोजगार क्षमता 69,516 है।
यह आगरा के आंतरिक रिंग रोड और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के पास है। यहां चमड़ा, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, इंजीनियरिंग, चिकित्सा उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों पर जोर रहेगा।
प्रयागराज की सरस्वती हाईटेक सिटी में 352 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। परियोजना लागत 658 करोड़ रुपये, निवेश क्षमता 1,600 करोड़ रुपये और रोजगार क्षमता 17,700 है।
यह एनएच-35, रेल और पूर्वी समर्पित माल ढुलाई गलियारे से जुड़ा है। यहां इलेक्ट्रिक वाहन, खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा, साइकिल, चमड़ा और पैकेजिंग जैसे उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना है।
बिहार के गया जिले में डोभी के पास 1,670 एकड़ में औद्योगिक नोड विकसित होगा। परियोजना लागत 1,339 करोड़ रुपये, निवेश क्षमता 16,524 करोड़ रुपये और रोजगार क्षमता 1,09,185 है।
एनएच-22 और एनएच-19 के साथ इसकी कनेक्टिविटी होगी। गया रेलवे स्टेशन, गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और माल ढुलाई नेटवर्क भी इसके आसपास हैं। यहां खाद्य प्रसंस्करण, इंजीनियरिंग, भवन निर्माण सामग्री, चमड़ा, कपड़ा और चिकित्सा उपकरण जैसे उद्योगों पर जोर है।
महाराष्ट्र का दिघी पोर्ट औद्योगिक क्षेत्र इन 12 परियोजनाओं में सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है। इसका क्षेत्रफल 6,056 एकड़ है। परियोजना लागत 5,469 करोड़ रुपये, निवेश क्षमता 38,000 करोड़ रुपये और रोजगार क्षमता 1,14,183 है।
बंदरगाह आधारित इस क्षेत्र में इंजीनियरिंग, खाद्य एवं पेय पदार्थ और दवा उद्योग प्रमुख होंगे। इसकी सबसे बड़ी ताकत समुद्री बंदरगाह से कनेक्टिविटी है।
राजस्थान में यह औद्योगिक क्षेत्र 1,578 एकड़ में विकसित होगा। परियोजना लागत 922 करोड़ रुपये, निवेश क्षमता 7,500 करोड़ रुपये और रोजगार क्षमता 40,000 है।
यह जोधपुर और पाली के बीच है और सड़क तथा रेल के जरिए पश्चिमी माल ढुलाई गलियारे से जुड़ता है। यहां कपड़ा, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, इंजीनियरिंग, भवन निर्माण सामग्री और हस्तशिल्प जैसे उद्योगों पर जोर रहेगा।
कडप्पा जिले में कोप्पर्थी औद्योगिक क्षेत्र 2,596 एकड़ में विकसित होगा। इसकी लागत 2,137 करोड़ रुपये, निवेश क्षमता 8,860 करोड़ रुपये और रोजगार क्षमता 54,500 है।
यह एनएच-40 और एसएच-51 से जुड़ा है और कडप्पा हवाई अड्डे के पास है। यहां नवीकरणीय ऊर्जा, ऑटो-पार्ट्स, धातु, कपड़ा, रसायन और इंजीनियरिंग उद्योगों पर ध्यान दिया जाएगा।
कुरनूल जिले का ओरवाकल औद्योगिक क्षेत्र 2,621 एकड़ में विकसित होगा। परियोजना लागत 2,786 करोड़ रुपये, निवेश क्षमता 12,000 करोड़ रुपये और रोजगार क्षमता 45,071 है।
यह एनएच-40 और एनएच-44 से जुड़ा है और कुरनूल हवाई अड्डे के करीब है। यहां ऑटो-पार्ट्स, एयरोस्पेस, रक्षा, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और कपड़ा उद्योगों पर जोर रहेगा।
तेलंगाना के जहीराबाद में पहले चरण के लिए 3,245 एकड़ क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। परियोजना लागत 2,361 करोड़ रुपये, निवेश क्षमता 10,000 करोड़ रुपये और रोजगार क्षमता 1.74 लाख बताई गई है।
यह हैदराबाद से करीब 80 किलोमीटर दूर है और एनएच-65 के जरिए जुड़ा है। यहां ऑटोमोबाइल, परिवहन उपकरण, बिजली उपकरण, धातु और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
केरल का पलक्कड़ औद्योगिक क्षेत्र 1,710 एकड़ में विकसित होगा। इसकी परियोजना लागत 3,806 करोड़ रुपये, निवेश क्षमता 8,729 करोड़ रुपये और रोजगार क्षमता 51,000 है।
यह कोच्चि और कोयंबटूर के बीच महत्वपूर्ण स्थान पर है और एनएच-544 से जुड़ा है। यहां औषधीय रसायन, वनस्पति उत्पाद, रबर-प्लास्टिक, मशीनरी और धातु उत्पाद जैसे उद्योगों पर जोर दिया जाएगा।
इन परियोजनाओं को विकसित करते समय सरकार ने पानी और अपशिष्ट जल प्रबंधन को बुनियादी ढांचे का हिस्सा बनाया है। फरवरी 2026 की सरकारी जानकारी में औद्योगिक गलियारों के लिए जल संरक्षण और पानी के पुनर्चक्रण को टिकाऊ विकास का हिस्सा बताया गया है।
लेकिन सभी 12 परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक दस्तावेजों में कच्चे पानी के स्रोत की जानकारी समान रूप से स्पष्ट नहीं है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर औद्योगिक शहर का पानी किसी खास नदी या बांध से आएगा।
जहां जानकारी उपलब्ध है, वहां तस्वीर ज्यादा स्पष्ट है। उदाहरण के लिए आगरा परियोजना में यमुना से पानी लेने की व्यवस्था का प्रस्ताव है, जबकि कोप्पर्थी के लिए पानी की आपूर्ति की विस्तृत योजना तैयार की गई है।
यानी सरकार की योजना सिर्फ उद्योग लगाने की नहीं, बल्कि पानी को उपचारित करके दोबारा इस्तेमाल करने की भी है। फिर भी सवाल बना रहेगा कि जब यहां बड़ी संख्या में उद्योग और कर्मचारी आएंगे, तब स्थानीय जलस्रोतों पर कितना अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
सरकार के फरवरी 2026 के आंकड़ों के मुताबिक इन 12 परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल 25,975 एकड़, कुल परियोजना लागत 28,602 करोड़ रुपये, निवेश क्षमता 1,52,757 करोड़ रुपये और रोजगार क्षमता 9,39,416 है।
यानी आने वाले वर्षों में ये सिर्फ औद्योगिक इलाके नहीं होंगे। इनके आसपास नए बाजार, आवासीय क्षेत्र, परिवहन व्यवस्था और दूसरी शहरी सुविधाएं भी विकसित हो सकती हैं।