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चेहरे पर ही नहीं, बॉडी के अंगों में भी बढ़ती है उम्र, AI ‘टिशू क्लॉक’ और ब्लड टेस्ट बता देगा आपकी बायोलॉजिकल एज कितनी?

Blood test biological age: सिर्फ चेहरे पर नहीं, अंगों की भी बढ़ती है उम्र, AI ने बनाया टिशु क्लॉक, अब खून की एक बूंद बताएगी आपके शरीर के अलग-अलग अंग की कितनी उम्र? कहीं आपकी उम्र से बूढ़ा तो नहीं हो रहा आपका शरीर!
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Aug 19, 2026
Blood test biological age
Blood test biological age: AI टिशू क्लॉक तैयार, वैज्ञानिक शोध जारी, जानिए क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा बायोलॉजिकल एज पता करने वाला ये शोध? (AI Creative)

Blood test biological age: क्या 50 साल की उम्र में किसी व्यक्ति का शरीर भी 50 साल का ही होता है? जरूरी नहीं। किसी का दिल, दिमाग या किडनी अपनी वास्तविक उम्र से ज्यादा तेजी से बूढ़े हो सकते हैं, जबकि दूसरे अंग अपेक्षाकृत स्वस्थ रह सकते हैं। अब वैज्ञानिकों ने इस अंतर को समझने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित 'टिशू क्लॉक' विकसित की है, जो शरीर के अलग-अलग अंगों की जैविक उम्र (Biological Age) का अंदाजा लगाने की कोशिश करती है।

यह रिसर्च ऑस्ट्रियन अकादमी ऑफ साइंसेज के सीईएमएम (CeMM) रिसर्च सेंटर और वियना यूनिवर्सिटी के एलबीआई-नेटमेड के वैज्ञानिकों ने की है और 14 अगस्त 2026 को नेचर मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित की गई है। स्टडी के मुख्य लेखक आंद्रे रेंदेइरो (André Rendeiro) के मुताबिक, हमारे ऊतक (Tissue) उम्र बढ़ने की प्रक्रिया का बेहद बारीक रिकॉर्ड अपने भीतर संजोए रखते हैं और हिस्टोलॉजी (सूक्ष्म टिशू परीक्षण) की तस्वीरों को एआई के साथ जोड़कर वैज्ञानिक ऐसे जैविक बदलाव देख सकते हैं जो इंसानी आंख के लिए अदृश्य होते हैं।

नई रिसर्च की खास बात यह है कि वैज्ञानिकों ने सिर्फ टिशू की सूक्ष्म तस्वीरों से उम्र का अनुमान नहीं लगाया, बल्कि उसी जानकारी को खून-आधारित आणविक संकेतों (Blood-based Molecular Signals) से जोड़कर यह देखने की कोशिश की कि क्या एक साधारण रक्त नमूने (Blood Sample) से शरीर के अलग-अलग ऊतकों की उम्र बढ़ने का संकेत मिल सकता है।

25 हजार से ज्यादा तस्वीरों से बनी नई 'क्लॉक'

शोधकर्ताओं ने जीटीएक्स (GTEx) परियोजना से 983 दिवंगत व्यक्तियों के 40 अलग-अलग ऊतकों और 29 अंगों की कुल 25,712 पूर्ण-स्लाइड हिस्टोपैथोलॉजी तस्वीरों का विश्लेषण किया है। वो करीब 48 करोड़ माइक्रो-टुकड़ों (Image Tiles) के बराबर है। इन लोगों की औसत उम्र लगभग 53 वर्ष थी।

डीप लर्निंग एल्गोरिदम ने इन सूक्ष्म तस्वीरों में टिशू की बनावट और संरचना (Architecture और Morphology) में उम्र के साथ आने वाले बदलावों को पहचानना सीखा। दिलचस्प बात यह रही कि बिना किसी विशेष निर्देश के भी, एआई मॉडल के लिए सभी 40 टिशू प्रकारों में उम्र ही वह सबसे मजबूत कारक निकली जो, ऊतक की बनावट तय करती है। इसी आधार पर वैज्ञानिकों ने ऐसे मॉडल तैयार किए, जिन्हें टिशू क्लॉक कहा गया।

इन घड़ियों ने किसी टिश्यू की अनुमानित जैविक उम्र और व्यक्ति की वास्तविक कालानुक्रमिक उम्र (Chronological Age) के बीच अंतर निकाला। इसे आयु-अंतर (Age Gap) कहा गया। यानी यदि किसी व्यक्ति की उम्र 50 साल है, लेकिन किसी ऊतक का मॉडल उसे 58 साल का बताता है, तो उस ऊतक में लगभग 8 साल का त्वरित जैविक बुढ़ापा (Accelerated Biological Aging) दिखाई देता है।

शरीर के सभी अंग एक ही रफ्तार से बूढ़े नहीं होते

वैज्ञानिकों ने शोध में पाया कि जैविक उम्र बढ़ना पूरे शरीर में एक जैसा नहीं होता। टिशू क्लॉक के आयु-अंतर का संबंध टीलोमेयर के छोटा होने, ऊतक-रोगविज्ञान (Tissue Pathology) और सह-रुग्णता के बोझ (Comorbidity Burden) जैसे स्थापित उम्र-संकेतकों से था।

विशेष रूप से भोजन-नली (Esophagus), पेट, अग्न्याशय (Pancreas), प्रोस्टेट और किडनी में ऊतक की आयु-अंतर और स्वास्थ्य से जुड़े बदलावों के बीच संबंध दिखाई दिए। कुछ नमूनों में जैविक उम्र ने मांसपेशी क्षरण (Muscle Atrophy) और ऊतक-विशिष्ट रोगात्मक बदलावों को कालानुक्रमिक उम्र की तुलना में अधिक स्पष्ट रूप से पकड़ा।

महाधमनी (Aorta) में ज्यादा जैविक आयु-अंतर वाले नमूनों में वाहिका-भित्ति का मोटा होना (Vessel Wall Thickening) और संरचनात्मक अखंडता में कमी जैसे बदलाव दिखे, जो धमनी काठिन्य (Atherosclerosis) तथा वाहिका रोग से जुड़े हो सकते हैं। सेरिबेलम (Cerebellum) में माइलिन क्षरण और इस्कीमिक बदलावों से जुड़े रूपात्मक संकेत भी देखे गए।

एआई ने कितनी सटीकता दिखाई?

गहन अधिगम मॉडल की औसत त्रुटि (Mean Absolute Error) 4.9 वर्ष रही और निर्धारण गुणांक (Coefficient of Determination, R²) 0.69 रहा। अलग-अलग टिशू में बाहरी सत्यापन (External Validation) के दौरान अनुमानित और वास्तविक उम्र के बीच कोरिलेशन फेफड़े के लिए 0.76, दिमाग के लिए 0.56 और त्वचा के लिए 0.46 रहा। यह नतीजे बताते हैं कि मॉडल जैविक उम्र बढ़ने के कई संरचनात्मक पैटर्न पकड़ सकता है, हालांकि यह अभी परफेक्ट उम्र-पहचान यंत्र नहीं है।

असली रोमांच क्या? टिशू की जानकारी खून से!

ऊतक की जांच (Tissue Biopsy) या मृत्यु के बाद का नमूना हर व्यक्ति से लेना संभव नहीं है। इसलिए वैज्ञानिकों ने अगला कदम उठाया। क्या ऊतक की उम्र बढ़ने का आणविक निशान (Molecular Footprint) खून में दिखाई देता है?

इसके लिए हिस्टोलॉजिकल जानकारी को जीन-एक्सप्रेशन डेटा के साथ जोड़ा गया। इसके बाद रक्त नमूनों से ऊतक-विशिष्ट आयु-अंतर का अनुमान लगाने वाले पूर्वानुमानक विकसित किए गए।

बाहरी सत्यापन में 577 स्वस्थ व्यक्तियों और 628 ऐसे लोगों, जिन्हें सात दीर्घकालिक यानी क्रोनिक बीमारियां या लकवा था, के रक्त जीन-अभिव्यक्ति डेटा का इस्तेमाल किया गया।

नतीजा दिलचस्प था। लकवाघात वाले लोगों में खून से अनुमानित दिमाग की आयु-अंतर अधिक पाई गई, जबकि सिस्टिक फाइब्रोसिस वाले लोगों में किडनी की आयु-अंतर बढ़ी हुई थी। कई रोग वर्गीकरणों में रक्त-आधारित ऊतक आयु-अंतर का पॉजिटिव प्रीडिक्टिव वैल्यू 0.3 से अधिक रहा।

इसका मतलब यह नहीं कि अभी एक सामान्य रक्त परीक्षण से किसी व्यक्ति को बीमारी का निश्चित निदान दिया जा सकता है। लेकिन यह रिसर्च भविष्य में ऑर्गन स्पेसिफिक रिस्क असेस्मेंट का रास्ता खोल सकती है।

बीमारी से पहले खतरे का संकेत?

यहीं से इस तकनीक का सबसे बड़ा भविष्य सामने आता है। अगर किसी व्यक्ति के रक्त नमूने में उसके दिमाग, किडनी, लिवर या किसी दूसरे अंग के लिए असामान्य रूप से ऊंचा जैविक उम्र संकेत मिले, तो भविष्य में डॉक्टर शायद उस व्यक्ति के रिस्क प्रोफाइल को ज्यादा बारीकी से देख सकें।

लेकिन यहां एक जरूरी सावधानी है। मौजूदा अध्ययन क्रॉस-सेक्शनल यानी मृत्यु के बाद के डेटा पर आधारित था। इसलिए यह साबित नहीं करता कि बढ़ा हुआ ऊतक आयु-अंतर बीमारी का कारण है या बीमारी के कारण ऊतक तेज़ी से बूढ़ा हुआ। शोधकर्ताओं ने भी प्रोस्पेक्टिव लॉन्गिट्यूडनल स्टडीज की जरूरत बताई है, ताकि यह पता चल सके कि रक्त-आधारित उम्र संकेत बीमारी शुरू होने से पहले दिखाई देते हैं या नहीं।

क्या इससे अभी इलाज संभव है?

वैज्ञानिकों के मुताबिक फिलहाल इससे अभी इलाज संभव नहीं है। यह कोई स्वीकृत निदान परीक्षण (Approved Diagnostic Test) या एंटी-एजिंग इलाज नहीं है। इसका सबसे बड़ा महत्व रिसर्च में है। वैज्ञानिक भविष्य में यह समझ सकते हैं कि कौन-से जीवनशैली कारक (Lifestyle Factors), आणविक मार्ग (Molecular Pathways) या चिकित्सकीय हस्तक्षेप किसी खास अंग की जैविक उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। इससे व्यक्तिगत रोकथाम (Personalized Prevention) और अंग-विशिष्ट चिकित्सा पद्धतियों (Organ-specific Therapies) के विकास में मदद मिल सकती है।

इस दिशा में पहले से मौजूद रिसर्च भी बताती है कि जैविक उम्र व्यक्ति और अंग के अनुसार अलग-अलग गति से बढ़ सकती है। उदाहरण के लिए, रक्त-प्रोटीन (Plasma Proteins) से बनाए गए अंग-विशिष्ट उम्र-मॉडलों में भी त्वरित अंग-उम्र और रोग जोखिम के बीच संबंध देखे गए हैं।

कहना होगा कि नई टिशू क्लॉक टेक्नोलॉजी उम्र बढ़ने को केवल एक सामान्य प्रक्रिया मानने के बजाय, अलग-अलग अंगों की अलग-अलग जैविक यात्रा के रूप में देखने का रास्ता खोलती है।

आज यह तकनीक रिसर्च चरण में है। लेकिन भविष्य में संभव है कि किसी व्यक्ति की जन्म-तिथि आधारित उम्र पूछने के साथ डॉक्टर यह भी जान सकें कि उसका दिमाग कितना बूढ़ा है, किडनी कितनी तेजी से उम्रदराज हो रही है और कौन-सा अंग सबसे ज्यादा जैविक तनाव में है। वह भी सिर्फ खून की एक बूंद से। यानी आने वाले समय में उम्र शायद जन्मतिथि से नहीं, बल्कि शरीर के भीतर छिपी जैविक घड़ी से भी समझी जाएगी।

Updated on:
19 Aug 2026 11:57 am
Published on:
19 Aug 2026 11:54 am