
Bank Account Balance Negative Reasons : कई लोगों को बैंक पासबुक या मोबाइल बैंकिंग ऐप चेक करते समय यह देखकर हैरानी होती है कि उनके खाते का बैलेंस माइनस (Negative Balance) में चला गया है, जबकि उन्होंने कोई लेनदेन ही नहीं किया। ऐसे मामलों में सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि पैसा कहां गया, क्या बैंक को यह रकम चुकानी पड़ेगी और क्या इसका असर CIBIL स्कोर पर पड़ेगा? आइए आसान भाषा में समझते हैं और यह भी जानते हैं कि इसमें RBI के नियम आपके पक्ष में कहां खड़े हैं।
बैंक अकाउंट माइनस में क्यों चला जाता है? बिना किसी नए ट्रांजैक्शन के भी बैंक खाता कई कारणों से माइनस में जा सकता है। लेकिन इनमें से हर कारण जायज नहीं होता।
डेबिट कार्ड, SMS अलर्ट, अकाउंट मेंटेनेंस या अन्य बैंकिंग सेवाओं के शुल्क खाते से काटे जा सकते हैं। अगर खाते में पहले से बहुत कम बैलेंस हो, तो ऐसे चार्ज काटे जाने पर बैलेंस माइनस में जा सकता है।
बीमा प्रीमियम, EMI, SIP या किसी सब्सक्रिप्शन के लिए पहले से दी गई अनुमति के आधार पर ऑटो-डेबिट हो सकता है, जो कई बार खाते में मौजूद रकम से ज्यादा निकल जाता है।
अगर खाते के साथ ओवरड्राफ्ट (OD) सुविधा जुड़ी है, तो पहले से तय सीमा तक निकाली गई अतिरिक्त राशि की वजह से खाता वैध रूप से माइनस दिख सकता है। यह ग्राहक की सहमति से बनी व्यवस्था है, इसलिए यह बकाया चुकाना जरूरी होता है।
बैंक की तकनीकी या लेखा त्रुटि : कभी-कभी बैंकिंग सिस्टम में गलती के कारण भी बैलेंस गलत दिख सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत शिकायत करनी चाहिए।
यहां एक बात बहुत साफ समझ लेनी चाहिए: सिर्फ न्यूनतम बैलेंस (Minimum Balance) न रखने की वजह से बैंक आपके सेविंग अकाउंट को माइनस में नहीं ले जा सकता। RBI के नियमों के मुताबिक बैंकों को यह सुनिश्चित करना होता है कि मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगाया गया पेनल्टी चार्ज कभी भी खाते को शून्य से नीचे न ले जाए — यानी बैलेंस ज्यादा से ज्यादा ₹0 तक जा सकता है, माइनस में नहीं। अगर आपका सामान्य बचत खाता सिर्फ इसी वजह से माइनस दिख रहा है, तो यह ग्राहक की गलती नहीं बल्कि बैंक की तरफ से नियम का उल्लंघन है, और आप सीधे इसकी शिकायत कर सकते हैं।
यह इस बात पर निर्भर करता है कि माइनस बैलेंस किस वजह से बना है। अगर यह ऑटो-डेबिट, ओवरड्राफ्ट सुविधा या किसी वैध बैंकिंग सेवा शुल्क (जो मिनिमम बैलेंस से जुड़ा न हो) के कारण है, तो बैंक उस राशि की वसूली कर सकता है। अगर यह बैंक की तकनीकी गलती है, तो ग्राहक पर भुगतान की जिम्मेदारी नहीं होती। अगर यह सिर्फ मिनिमम बैलेंस न रखने की वजह से बना माइनस बैलेंस है, तो यह RBI के नियमों का उल्लंघन है। ऐसे में बैंक को यह राशि रिवर्स करनी होगी, ग्राहक को नहीं।
इसलिए सबसे पहले बैंक से माइनस बैलेंस का विस्तृत विवरण (Statement) मांगना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि माइनस बैलेंस किस श्रेणी में आता है।
सामान्य बचत खाते के माइनस बैलेंस का सीधे CIBIL स्कोर पर असर नहीं पड़ता। हालांकि कुछ परिस्थितियों में असर पड़ सकता है। अगर खाते में ओवरड्राफ्ट सुविधा है और बकाया राशि लंबे समय तक नहीं चुकाई जाती, तो इसकी जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को भेजी जा सकती है। अगर माइनस बैलेंस किसी ऋण या क्रेडिट उत्पाद से संबंधित है, तो डिफॉल्ट की स्थिति में CIBIL प्रभावित हो सकता है।
बैंक आमतौर पर पहले ग्राहक को सूचना देता है। मिनिमम बैलेंस शॉर्टफॉल की स्थिति में भी RBI के नियमों के तहत बैंक को SMS, ईमेल या पत्र के जरिए पहले सूचित करना होता है और बैलेंस सुधारने का मौका देना होता है, इससे पहले कि कोई पेनल्टी लगे।
बैंक स्टेटमेंट निकालें
पिछले कुछ महीनों के सभी डेबिट और चार्ज जांचें।
यह पहचानें कि माइनस बैलेंस किस वजह से बना
अगर यह सिर्फ मिनिमम बैलेंस पेनल्टी की वजह से है, तो याद रखें, यह नियम के खिलाफ है।
बैंक शाखा से लिखित रूप में संपर्क करें
पूछें कि माइनस बैलेंस किस कारण बना, और अगर यह मिनिमम बैलेंस पेनल्टी से बना है तो इसे रिवर्स करने की मांग करें, RBI के नियम का हवाला देते हुए।
गलत कटौती पर शिकायत करें
यदि कोई शुल्क गलत लगा है तो उसे रिवर्स करने का अनुरोध करें।
शिकायत का रिकॉर्ड रखें
ईमेल, शिकायत संख्या और बैंक का जवाब सुरक्षित रखें।
जरूरत पड़ने पर RBI इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम में शिकायत करें
अगर बैंक संतोषजनक जवाब नहीं देता, तो मामला RBI की मौजूदा शिकायत निवारण व्यवस्था — Reserve Bank Integrated Ombudsman Scheme (RB-IOS 2026), जो 1 जुलाई 2026 से लागू है — के तहत आगे बढ़ाया जा सकता है। यह स्कीम बैंक, NBFC और अन्य नियमित संस्थाओं की सेवा से जुड़ी शिकायतों के लिए एक निशुल्क और तेज़ शिकायत निवारण तंत्र है, जिसमें नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे का भी प्रावधान है। इसमें शिकायत RBI के ऑनलाइन पोर्टल (cms.rbi.org.in) या टोल-फ्री नंबर 14448 के जरिए दर्ज की जा सकती है।
| सवाल | जवाब |
|---|---|
| बैलेंस माइनस क्यों हुआ? | बैंक शुल्क, ऑटो-डेबिट, ओवरड्राफ्ट या तकनीकी त्रुटि |
| क्या सिर्फ मिनिमम बैलेंस न रखने पर माइनस हो सकता है? | नहीं। RBI नियमों के तहत यह गलत है |
| क्या बैंक को पैसा देना होगा? | ओवरड्राफ्ट या वैध शुल्क का बकाया देना होगा |
| मिनिमम बैलेंस पेनल्टी से बना माइनस बैलेंस? | ग्राहक को नहीं चुकाना चाहिए, बैंक से शिकायत कर सकते हैं |
| क्या CIBIL पर असर पड़ेगा? | सामान्य सेविंग अकाउंट में नहीं |
| कब CIBIL प्रभावित हो सकता है? | ओवरड्राफ्ट/क्रेडिट सुविधा में डिफॉल्ट होने पर |
| पहला कदम क्या होना चाहिए? | बैंक स्टेटमेंट निकालें और वजह जांचें |
| शिकायत कहां करें? | बैंक शाखा → RB-IOS 2026 |
| RBI शिकायत पोर्टल | cms.rbi.org.in |
| हेल्पलाइन नंबर | 14448 |