
देश की संसद में 5 अगस्त 2026 यानी आज दोनों सदनों में लंबित विधेयकों को विचार और पारित करने के लिए पेश करेगी। इनमें बैंकर्स बुक्स एविडेंस विधेयक 2026 और कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक 2026 शामिल हैं। आज दोनों विधेयक लोकसभा में विचार और पारित करने के लिए रखा जाएगा। वहीं, राज्यसभा में सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा और पारित करने की प्रक्रिया होगी।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) बैंकर्स बुक्स एविडेंस विधेयक, 2026 पेश करेंगी। इस विधेयक का उद्देश्य बैंकों के रिकॉर्ड से जुड़े साक्ष्यों के संबंध में कानून को आधुनिक बनाना और उसे डिजिटल बैंकिंग की मौजूदा व्यवस्था के अनुरूप तैयार करना है।
बैंकिंग का डिजिटल युग अब केवल खातों में बदलाव नहीं ला रहा, बल्कि अदालतों में सबूत पेश करने के तरीके को भी बदल रहा है। बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 (Bankers’ Books Evidence Act, 1891) अब डिजिटल रिकॉर्ड्स को भी कानूनी रूप से मान्यता देता है। यह बदलाव आम ग्राहकों, जांच एजेंसियों और न्यायालयों के लिए नए अवसर और चुनौतियाँ दोनों लेकर आया है।
बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 एक पुराना कानून है, जिसे 1 अक्टूबर 1891 को लागू किया गया था। यह कानून बैंक की बही-खातों (जैसे लेजर, कैश-बुक, डे-बुक आदि) की प्रतियों को अदालत में ‘प्राइमा फेसी’ (prima facie) सबूत के रूप में स्वीकार करता है, अर्थात् ये प्रतियाँ मूल दस्तावेज़ की तरह वैध मानी जाती हैं, बशर्ते वे प्रमाणित (certified) हों।
इस कानून में 2002 में संशोधन हुआ, जिससे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स- जैसे कंप्यूटर में संग्रहीत डेटा, प्रिंटआउट, माइक्रोफिल्म आदि भी शामिल किए गए। अब बैंक की इलेक्ट्रॉनिक प्रविष्टियों की प्रमाणित प्रतियाँ अदालत में पेश की जा सकती हैं, बशर्ते वे सेक्शन 2A और सेक्शन 4 के अनुसार प्रमाणित हों।
डिजिटल बैंकिंग के आने से बैंक रिकॉर्ड अब पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक हो गए हैं- मोबाइल ऐप, नेट बैंकिंग, यूपीआई, डिजिटल लेनदेन आदि। अदालतों में अब इन डिजिटल रिकॉर्ड्स को प्रमाणित प्रतियों के रूप में पेश किया जा सकता है। जानिए इससे बैंकों और ग्राहकों को क्या होगा फायदा।
ग्राहकों के लिए यह बदलाव कई मायनों में लाभकारी साबित होने वाला है।
हालांकि, यह सुविधा तभी प्रभावी होगी जब बैंक प्रमाणित प्रतियां समय पर और सही तरीके से जारी करें।
कोर्ट और जांच एजेंसियों को डिजिटल रिकॉर्ड्स से कई लाभ मिलते हैं।
हालांकि यह व्यवस्था सुविधाजनक है, लेकिन इसकी कुछ चुनौतियां भी हैं।
बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 अब भी लागू है, लेकिन 1 जुलाई 2024 से लागू हुआ नया “भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023” (Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023) डिजिटल सबूतों के नियमों को और आधुनिक बना रहा है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स की परिभाषा विस्तृत की गई है और बैंक रिकॉर्ड्स के प्रमाणन के लिए विशेष प्रावधान (Section 130 BSA) जोड़े गए हैं।
इसका अर्थ है कि आने वाले समय में बैंक रिकॉर्ड्स को अदालत में पेश करने की प्रक्रिया और अधिक स्पष्ट, तेज़ और सुरक्षित होगी। बैंक और ग्राहक दोनों को इस बदलाव से लाभ होगा, लेकिन इसके लिए बैंकिंग और कानूनी प्रक्रियाओं में प्रशिक्षण और जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।
डिजिटल बैंकिंग ने बैंक रिकॉर्ड्स को अदालत में सबूत के रूप में पेश करने का तरीका बदल दिया है। बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 ने इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को मान्यता दी है और नया साक्ष्य अधिनियम इसे और अधिक मजबूत बना रहा है। आम ग्राहकों को अब डिजिटल स्टेटमेंट्स का प्रमाणित उपयोग करना सीखना होगा, और बैंक तथा न्याय व्यवस्था को इस बदलाव के अनुरूप अपनी प्रक्रियाएँ तेज़ और पारदर्शी बनानी होंगी।