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चीनी सेना ने अपने लॉन्ग-रेंज रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम को बनाया और खतरनाक, भारत के लिए खतरे की घंटी?

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अहम कामयाबी हासिल की है। PLA ने PCL-191 मल्टीपल-लॉन्च रॉकेट सिस्टम से नए 'स्टील रेन' एयरबर्स्ट गोला-बारूद का प्रदर्शन किया है। यह हथियार मुख्य रूप से सैनिकों और हल्के सुरक्षित उपकरणों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है।
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Sep 04, 2026
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सांकेतिक इमेज (Chatgpt)

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने हाल ही में एक वीडियो जारी कर अपने लॉन्ग-रेंज रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम की एक नई क्षमता का प्रदर्शन किया है। PLA से जुड़े सोशल मीडिया चैनल "चाइना मिलिट्री बगल" पर जारी इस फुटेज को "स्टील रेन" नाम दिया गया है, जिसमें PHL-191 (जिसे PCL-191 या PHL-16 भी कहा जाता है) लॉन्चर से दागे गए कई रॉकेट रेगिस्तानी ट्रेनिंग रेंज के ऊपर हवा में ही फटते और नीचे बड़े इलाके में धातु के टुकड़े बिखेरते नजर आते हैं।

क्या है PCL-191 और उसकी खासियत?

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, PHL-191 एक पहियों पर चलने वाला (व्हील्ड) लॉन्ग-रेंज रॉकेट सिस्टम है, जिसे कुछ विश्लेषक अमेरिका के हिमार्स (HIMARS) का चीनी जवाब मानते हैं। यह सिस्टम पहली बार अक्टूबर 2019 में चीन की नेशनल डे परेड में बिना नाम बताए दिखाया गया था और नोरिंको (Norinco) द्वारा विकसित AR-3 मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर पर आधारित है। पिछले दिसंबर में ताइवान के पास हुए बड़े सैन्य अभ्यास में भी इस सिस्टम का इस्तेमाल हुआ था।

आर्मी रिकॉग्निशन की रिपोर्ट बताती है कि PHL-191 एक मॉड्यूलर सिस्टम है, यानी मिशन के हिसाब से इसमें अलग-अलग लॉन्चर मॉड्यूल लगाए जा सकते हैं। हाल की "स्टील रेन" फुटेज में दिखे लॉन्चर की बनावट पहले की परेड में दिखाए गए 370mm वैरिएंट से मिलती-जुलती पाई गई, जिसमें आठ रॉकेट कैनिस्टर की व्यवस्था होती है।

PCL-191 की रेंज कितनी है?

अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, PCL-191 परिवार की अलग-अलग रेंज है। PCL-191 परिवार में 300mm गाइडेड रॉकेटों की रेंज करीब 150 किलोमीटर, जबकि 370mm रॉकेटों की रेंज 280 से 350 किलोमीटर के बीच बताई गई है। चीनी सैन्य पत्रिका मॉडर्न शिप्स के हवाले से यह भी बताया गया है कि सिस्टम में 750mm की "फायर ड्रैगन 480" टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलें भी लगाई जा सकती हैं।

इन टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलों कि रेंज करीब 500 किलोमीटर तक होने का दावा किया जाता है। हालांकि, आर्मी रिकॉग्निशन और अन्य रक्षा विश्लेषकों का यह भी कहना है कि हालिया "स्टील रेन" एयरबर्स्ट गोला-बारूद की सटीक रेंज, सटीकता (एक्यूरेसी) या फ्यूज तकनीक की कोई पुष्टि नहीं हुई है। यानी असल आंकड़े अब भी अनुमान पर ही आधारित हैं।

एयरबर्स्ट हथियार का मकसद क्या है?

एयरबर्स्ट फ्रैगमेंटेशन वॉरहेड सीधे किसी इमारत या बंकर पर हमले के लिए नहीं, बल्कि खुले में मौजूद सैनिकों और हल्के सुरक्षा वाले उपकरणों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। जैसे- रडार क्रू, कम्युनिकेशन वाहन, एयर-डिफेंस यूनिट, मेंटेनेंस टीम और लॉजिस्टिक्स तत्व, जिन्हें काम के दौरान खुले में आना पड़ता है। मजबूत बंकरों या भारी बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ यह हथियार कारगर नहीं माना जाता है। उनके लिए अलग तरह के वॉरहेड इस्तेमाल किए जाते हैं।

भारत के लिए यह कितनी बड़ी चिंता?

PCL-191 का सीधा संबंध सिर्फ ताइवान स्ट्रेट से नहीं है। यह सिस्टम भारत सीमा के लिए भी नया नहीं है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की 2021 की रिपोर्टों के अनुसार, PLA ने इसे पहले ही तिब्बत पठार और शिनजियांग के ऊंचाई वाले इलाकों में भारत सीमा पर तैनात करना शुरू कर दिया था, ताकि यह भारत के लिए "डिटरेंट" के तौर पर काम करे।

चीनी सैन्य विश्लेषक सोंग झोंगपिंग ने उस समय कहा था कि भारतीय सेना की सीमा पर बढ़ती तैनाती के जवाब में सिर्फ एक लॉन्ग-रेंज MLRS ही प्रभावी दबाव बना सकता है। इस साल जुलाई 2026 में बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, PLA ने एक और सिमुलेशन वीडियो जारी किया था। जिसमें PCL-191 को भारत के S-400 "सुदर्शन चक्र" एयर डिफेंस सिस्टम पर निशाना साधते हुए दिखाया गया थ। जिसे विश्लेषक ज्यादातर एक मनोवैज्ञानिक (साइको-ऑप्स) प्रचार अभियान मानते हैं न कि किसी सत्यापित युद्धक क्षमता का प्रमाण।

रक्षा विश्लेषकों की तुलना में भारत की स्वदेशी पिनाका (Pinaka) MLRS प्रणाली से भी PCL-191 की तुलना होती रही है। रिपोर्टों के अनुसार चीनी 300mm रॉकेट करीब 280 किलोग्राम विस्फोटक ले जा सकता है, जबकि पिनाका मार्क-1 रॉकेट में यह क्षमता करीब 100 किलोग्राम है, यानी रेंज और पेलोड दोनों में चीन को फिलहाल बढ़त हासिल है।

Updated on:
04 Sept 2026 03:25 pm
Published on:
04 Sept 2026 03:25 pm