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पर्यावरण परिवर्तन से बढ़ रहा बीमारियों का खतरा, जानिए सरकार के कदम और आपके लिए सेफ्टी टिप्स

Pollution Health Hazards : पर्यावरण परिवर्तन और प्रदूषण से बढ़ती बीमारियों से कैसे बचें? जानिए वायु प्रदूषण, हीट वेव, डेंगू-मलेरिया के बढ़ते खतरे और खुद को सुरक्षित रखने के प्रभावी उपाय।
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Aug 05, 2026
pollution health hazards
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आज के दौर में स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़े खतरों में सिर्फ वायरस या बैक्टीरिया ही नहीं, बल्कि हमारे आसपास का बदलता पर्यावरण भी शामिल है। बढ़ता वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक गर्मी, दूषित पानी और रासायनिक प्रदूषण लोगों की सेहत पर गहरा असर डाल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इन चुनौतियों को नहीं समझा गया, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण से जुड़ी बीमारियों का बोझ और बढ़ सकता है।

प्रदूषण बन रहा है बड़ी स्वास्थ्य चुनौती

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, प्रदूषित हवा के कारण हर साल दुनिया भर में लगभग 70 लाख लोगों की समय से पहले मौत हो जाती है। वायु प्रदूषण से स्ट्रोक, हृदय रोग, फेफ ड़ों का कैंसर, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
भारत में यह समस्या और गंभीर है। खासकर उत्तर भारत के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता अक्सर सुरक्षित सीमा से कई गुना खराब दर्ज की जाती है। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ता है।

जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहा संक्रामक रोगों का खतरा

बदलते मौसम ने मच्छर जनित बीमारियों के प्रसार को भी प्रभावित किया है। बढ़ते तापमान, अनियमित बारिश और बढ़ती आर्द्रता के कारण डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां उन क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं, जहां पहले इनका प्रभाव कम था।
विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन ने इन रोगों के फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार की हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है।

दूषित पानी और रसायनों का बढ़ता असर

आज पानी, मिट्टी और हवा में विभिन्न रसायन, भारी धातुएं और माइक्रोप्लास्टिक पाए जा रहे हैं। इनका लंबे समय तक संपर्क कैंसर, हार्मोन संबंधी समस्याओं, श्वसन रोगों और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में कमी जैसी परेशानियों को जन्म दे सकता है।
कम आय वाले और औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों में यह जोखिम अधिक देखा जाता है।

हीट वेव अब सिर्फ मौसम नहीं, स्वास्थ्य संकट है

भारत में हाल के वर्षों में अत्यधिक गर्मी यानी हीट वेव के मामलों में तेजी आई है। गर्मी के लंबे और तीव्र दौर के कारण हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अन्य गर्मी संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और बाहर काम करने वाले लोग इसके प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।

सरकार क्या कर रही है?

पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कई पहल की जा रही हैं। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के अंतर्गत Centre for Environmental & Occupational Health, Climate Change and Health (CEOH-CCH) कार्य करता है। यह संस्था वायु प्रदूषण, हीट वेव, जलवायु परिवर्तन और वेक्टर जनित रोगों से जुड़ी रणनीतियां तैयार करने और राज्यों के साथ समन्वय करने का काम करती है।

आप खुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं?

  • पर्यावरणीय खतरों से बचाव के लिए कुछ साधारण लेकिन प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
  • खराब वायु गुणवत्ता वाले दिनों में बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करें।
  • घर में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें और संभव हो तो एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
  • पीने के पानी को फिल्टर या उबालकर उपयोग करें।
  • मच्छरों से बचाव के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें और मच्छरदानी या जाली का उपयोग करें।
  • गर्मी के मौसम में पर्याप्त पानी पिएं और दोपहर के समय धूप में निकलने से बचें।
  • पौष्टिक भोजन, फल और हरी सब्जियों को आहार का हिस्सा बनाएं ताकि प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहे।
  • दिल, फेफड़े या मधुमेह जैसी पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोग नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें।

समुदाय और समाज की भी है जिम्मेदारी

  • पर्यावरणीय स्वास्थ्य की चुनौतियों से केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयासों से भी निपटा जा सकता है।
  • स्कूलों में पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाई जाए।
  • स्थानीय स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाए जाएं।
  • जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जाए।
  • स्वच्छता और कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए।
  • स्थानीय निकायों और समुदायों को प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों में शामिल किया जाए।

पर्यावरण और स्वास्थ्य का संबंध पहले से कहीं अधिक स्पष्ट हो चुका है। प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव आने वाले वर्षों में नई चुनौतियां पैदा कर सकता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि जागरूकता, बेहतर नीतियों और व्यक्तिगत सावधानियों के जरिए इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आखिरकार, स्वच्छ हवा, सुरक्षित पानी और स्वस्थ पर्यावरण केवल प्रकृति की जरूरत नहीं, बल्कि हमारी और आने वाली पीढ़ियों की बेहतर सेहत की बुनियाद हैं। इसलिए पर्यावरण की रक्षा करना केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण कदम भी है।

Updated on:
05 Aug 2026 02:52 pm
Published on:
05 Aug 2026 02:52 pm