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जंगलों में आग कैसे लगती है? उत्तराखंड, हिमाचल और मध्य भारत में हर साल क्यों धधक उठते हैं जंगल?

Forest Fires In India : जंगलों में आग कैसे लगती है? जानिए उत्तराखंड के चीड़ के जंगलों से लेकर मध्य भारत तक हर साल क्यों धधकते हैं जंगल और इसके पीछे इंसानी लापरवाही व मौसम का क्या हाथ है।
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Aug 09, 2026
जंगलों की आग कैसे लगती है?
जंगलों की आग कैसे लगती है?

हर साल गर्मियां शुरू होते ही उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से जंगलों में आग लगने की खबरें आने लगती हैं। कई बार ये आग इतनी व्यापक हो जाती है कि हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र इसकी चपेट में आ जाता है। इससे न केवल पेड़-पौधों और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचता है, बल्कि आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी धुएं और प्रदूषण का सामना करना पड़ता है।

अक्सर माना जाता है कि जंगलों में आग सिर्फ तेज गर्मी या बिजली गिरने से लगती है, लेकिन हकीकत इससे कहीं अधिक जटिल है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में लगने वाली अधिकांश वनाग्नियां किसी न किसी रूप में मानव गतिविधियों से जुड़ी होती हैं। मौसम और जलवायु परिस्थितियां आग को फैलाने में मदद जरूर करती हैं, लेकिन शुरुआत अक्सर इंसानी कारणों से होती है।

  • भारत का बड़ा वन क्षेत्र हर साल आग के खतरे का सामना करता है।
  • अधिकांश वनाग्नियां मानव गतिविधियों से जुड़ी होती हैं।
  • उत्तराखंड में चीड़ की सूखी पत्तियां आग फैलाने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
  • बढ़ता तापमान और लंबे सूखे दौर खतरे को और बढ़ा रहे हैं।
  • सैटेलाइट और ड्रोन से अब आग की निगरानी की जा रही है।

आग लगती कैसे है?

भारत में जंगलों में आग लगने के पीछे प्राकृतिक और मानवीय दोनों तरह के कारण हो सकते हैं। हालांकि प्राकृतिक कारणों की तुलना में मानवीय कारण कहीं अधिक जिम्मेदार माने जाते हैं।

प्राकृतिक कारण

  • बिजली गिरना
  • लंबे समय तक सूखा पड़ना
  • अत्यधिक गर्मी
  • तेज हवाएं
  • जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ता तापमान

बिजली गिरने से लगने वाली आग दुनिया के कई देशों में आम है, लेकिन भारत में ऐसे मामले अपेक्षाकृत कम देखे जाते हैं। यहां आग फैलने में मौसम की भूमिका अधिक होती है, जबकि शुरुआत अक्सर अन्य कारणों से होती है।

इंसानी लापरवाही कैसे बनती है वजह?

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कई बार लोग अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो बड़े वनाग्नि संकट में बदल जाती हैं। जंगल में फेंकी गई जलती बीड़ी, सिगरेट या माचिस की तीली सूखी घास और पत्तियों को आग पकड़ने के लिए पर्याप्त होती है।

किन मानवीय कारणों से लगती है जंगल में आग

  • बीड़ी-सिगरेट या माचिस फेंकना
  • पिकनिक और कैंपिंग के दौरान छोड़ी गई आग
  • खेत साफ करने के लिए लगाई गई आग
  • नई घास उगाने के लिए सूखी झाड़ियों को जलाना
  • शहद या अन्य वन उत्पाद इकट्ठा करने के दौरान आग लगना
  • कुछ मामलों में जानबूझकर आग लगाना

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में होने वाली अधिकांश वनाग्नियां इन्हीं कारणों से शुरू होती हैं।

उत्तराखंड में आग ज्यादा क्यों लगती है?

उत्तराखंड के जंगलों में चीड़ (पाइन) के पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। इन पेड़ों की सूखी पत्तियां, जिन्हें स्थानीय भाषा में पिरुल कहा जाता है, बेहद ज्वलनशील होती हैं। गर्मियों में जंगल की जमीन पर पिरुल की मोटी परत जमा हो जाती है। ऐसे में एक छोटी सी चिंगारी भी देखते ही देखते बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले सकती है।

इसके अलावा पहाड़ी ढलानों पर तेज हवाएं आग को तेजी से ऊपर की ओर फैलाती हैं। दुर्गम इलाकों में आग बुझाने का काम भी कठिन हो जाता है, जिससे नुकसान बढ़ जाता है।

मध्य भारत में क्या स्थिति है?

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कई जंगल शुष्क पर्णपाती (Dry Deciduous) वन हैं। गर्मियों में पेड़ों की बड़ी मात्रा में पत्तियां जमीन पर गिर जाती हैं और सूख जाती हैं। यह सूखी वनस्पति आग के लिए ईंधन का काम करती है।

कई क्षेत्रों में महुआ, तेंदूपत्ता और अन्य वन उत्पादों के संग्रह के दौरान भी आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। एक बार आग लगने के बाद तेज हवा और सूखा मौसम इसे तेजी से फैलाते हैं।

जलवायु परिवर्तन क्यों बढ़ा रहा है खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन वनाग्नि की समस्या को और गंभीर बना रहा है। कई क्षेत्रों में गर्मियों का मौसम पहले की तुलना में अधिक गर्म और लंबा हो गया है। इससे जंगलों में नमी कम होती है और सूखी वनस्पति की मात्रा बढ़ जाती है।

जलवायु परिवर्तन का असर

  • लंबे समय तक सूखा
  • तापमान में वृद्धि
  • जंगलों में नमी की कमी
  • आग का मौसम लंबा होना
  • आग फैलने की गति बढ़ना

यानी जिन परिस्थितियों में पहले आग लगना मुश्किल था, वे अब अधिक सामान्य होती जा रही हैं।

जंगलों की आग से क्या नुकसान होता है?

वनाग्नि का असर सिर्फ पेड़ों तक सीमित नहीं रहता। इससे पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है। जंगलों में लगने वाली की वजह से क्या क्या नुकसान होते हैं, कुछ प्वाइंट्स में समझे।

  • वन्यजीवों की मौत या विस्थापन
  • जैव विविधता को नुकसान
  • वायु प्रदूषण में वृद्धि
  • मिट्टी की उर्वरता में कमी
  • कार्बन उत्सर्जन बढ़ना
  • जल स्रोतों पर असर

कई बार आग के बाद जंगलों की मिट्टी कमजोर हो जाती है, जिससे बारिश के मौसम में कटाव और भूस्खलन का खतरा भी बढ़ जाता है।

आग का पता कैसे चलता है?

आज वन विभाग सैटेलाइट, ड्रोन और रियल-टाइम फायर अलर्ट सिस्टम की मदद से आग की निगरानी कर रहा है। भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) सैटेलाइट के जरिए देशभर में वनाग्नि की घटनाओं पर नजर रखता है और राज्यों को अलर्ट भेजता है।

भारत में जंगलों की आग सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं है। अधिकांश मामलों में इसके पीछे मानवीय गतिविधियां होती हैं, जबकि गर्मी, सूखी वनस्पति और तेज हवाएं आग को बड़े संकट में बदल देती हैं। उत्तराखंड में चीड़ की पत्तियां, हिमाचल के सूखे जंगल और मध्य भारत की शुष्क वनस्पति इस जोखिम को बढ़ाती हैं।

Updated on:
09 Aug 2026 02:04 pm
Published on:
09 Aug 2026 01:39 pm