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भूकंप से बचे… अब जानलेवा गर्मी से जंग, जापान में राहत अभियान के बीच ‘100° F तापमान’ में हीटस्ट्रोक का बढ़ता खतरा

Japan Earthquake Heatwave: जापान में हालिया भूकंप के बाद राहत अभियान जारी है। 100°F तक पहुंची गर्मी का कहर शुरू हो गया है। ऐसे में राहत कार्यों के बीच हीट स्ट्रोक का खतरा बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। जानिए कैसे जापान में दोहरी प्राकृतिक आपदा ने जान-माल ही नहीं, बल्कि मानवता पर भी संकट खड़ा कर दिया है
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Aug 01, 2026
Japan Earthquake Heatwave
Japan Earthquake Heatwave: जापान में हाल ही में आए भूकंप के बाद अब बढ़ता तापमान, पानी की कमी से हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा(AI Creative)

Japan Earthquake Heatwave: जापान के क्यूशू क्षेत्र में आए भीषण भूकंप के बाद राहत और बचाव अभियान अभी पूरी तरह संभल भी नहीं पाया था कि भीषण गर्मी ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं। राहत शिविरों में 100°F (करीब 38°C) तक पहुंचते तापमान, पानी की कमी के कारण अब हीटस्ट्रोक का खतरा मंडरा रहा है। दोहरी प्राकृतिक आपदा ने हजारों विस्थापित लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। बचाव दल आफ्टरशॉक और तपती धूप के बीच लगातार काम कर रहे हैं, जबकि सरकार राहत शिविरों में ठंडक, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की कोशिश कर रही है। यह घटना दिखाती है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में प्राकृतिक आपदाएं अब अकेले नहीं आतीं, बल्कि उनके साथ जुड़ी नई चुनौतियां राहत और आपदा प्रबंधन को पहले से कहीं ज्यादा कठिन बना रही हैं।

जापान में हाल ही में आए भूकंप और जानलेवा गर्मी

क्यूशू क्षेत्र के कुमामोटो प्रान्त में 28 जुलाई 2026 को आए 7.1 तीव्रता के भूकंप ने कई घरों को ध्वस्त कर दिया। इस आपदा में कम से कम 28 लोगों की मौत हो चुकी है और मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, कई घायल हैं। भूकंप के बाद मॉल में विस्फोट और फैक्ट्री की चिमनी गिरने जैसी घटनाएं हुईं।

राहत शिविरों में गर्मी का कहर

राहत शिविरों में गर्मी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। कुमामोटो शहर में तापमान 36°C तक पहुंच गया है, जिससे हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। बिजली बहाल हो चुकी है, लेकिन लगभग 58,000 घरों में पानी की आपूर्ति बाधित है। हजारों लोग स्कूलों और अन्य स्थानों पर बने शिविरों में रह रहे हैं, जहां एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था की जा रही है।

पानी और ईंधन की कमी

शिविरों में पानी और ईंधन की कमी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। कई लोग अपनी कारों में सोने को मजबूर हैं, लेकिन ईंधन की कमी के कारण एयर कंडीशनिंग चलाना मुश्किल हो रहा है।

हीटस्ट्रोक का बढ़ता खतरा

हीटस्ट्रोक का खतरा सिर्फ राहत शिविरों तक सीमित नहीं है। पूरे जापान में गर्मी से होने वाली स्वास्थ्य आपात स्थितियाँ बढ़ रही हैं। 13-19 जुलाई 2026 के बीच, 10,857 लोग हीटस्ट्रोक के कारण अस्पताल ले जाए गए, जो पिछले सप्ताह की तुलना में लगभग 2.4 गुना अधिक है।

राहत कार्यों पर गर्मी का असर

बचाव दलों को लगातार गर्मी और आफ्टरशॉक के बीच काम करना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा है कि 'हर जीवन की रक्षा' प्राथमिकता है और उन्होंने आश्वासन दिया है कि 'जो कुछ भी करना पड़े' जरूर करेंगे।

आपदा प्रबंधन में सुधार

जापान की आपदा प्रबंधन प्रणाली ने इस चुनौती को पहचानते हुए सुधार किए हैं। जुलाई 2026 में केंद्रीय आपदा प्रबंधन परिषद ने आपदा प्रबंधन योजना में संशोधन किया, जिसमें राहत शिविरों में हीटस्ट्रोक और ठंड से बचाव के उपाय शामिल किए गए हैं। इसमें आपातकालीन शिविरों में पीने का पानी, ठंड से बचाव के साधन और छाया के लिए तंबू जैसी सुविधाएँ स्टॉक करने का निर्देश है।

जलवायु परिवर्तन की भूमिका

जलवायु परिवर्तन इस दुहरी आपदा की पृष्ठभूमि में एक महत्वपूर्ण कारक है। जापान में गर्मी से होने वाली मौतें पिछले दशक में बढ़कर प्रति वर्ष 1,000 से अधिक हो गई हैं। 2018 में मई से सितंबर के बीच हीटस्ट्रोक के कारण 95,137 आपातकालीन मरीजों में से 32,496 अस्पताल में भर्ती हुए और 160 की मौत हुई।

सरकार की पहल

सरकार ने 2018 में क्लाइमेट चेंज एडैप्टेशन कानून लागू किया और 2023 में ‘हीट इलनेस प्रिवेंशन एक्शन प्लान’ को मंजूरी दी, जिसका लक्ष्य 2030 तक हीट-इलनेस से होने वाली वार्षिक मौतों को आधा करना है।

जापान की यह त्रासदी बताती है कि आज प्राकृतिक आपदाएं केवल भूकंप, बाढ या तूफान तक सीमित नहीं रह गई हैं। जलवायु परिवर्तन के दौर में इनके साथ भीषण गर्मी जैसी चुनौतियां भी जुड़ रही हैं, जो राहत और बचाव कार्यों के बीच मुश्किल हालात पैदा कर रही हैं। ऐसे में आपदा प्रबंधन का मतलब केवल लोगों को सुरक्षित निकालना नहीं, बल्कि राहत शिविरों में स्वच्छ पेयजल, ठंडक, स्वास्थ्य सेवाएं और हीटस्ट्रोक से बचाव जैसी बुनियादी सुविधाएं भी समय पर उपलब्ध कराना होंगी। भविष्य में ऐसी दोहरी आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जलवायु अनुकूल वैज्ञानिक और मानव केंद्रित आपदा प्रबंधन प्रणाली विकसित करना ही अब समय की सबसे बड़ी मांग है।

Updated on:
01 Aug 2026 02:53 pm
Published on:
01 Aug 2026 02:50 pm