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Paper Leak पर उबाल: झारखंड में भी दिखा जंतर-मंतर जैसा विरोध , देश में पिछले 3 साल में कितने पेपर लीक?

Paper Leak Protest: देश में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता लगातार सवालों में हैं। अब झारखंड में भी स्टूडेंट्स और युवा सड़क पर हैं। जंतर-मंतर की तर्ज पर देशव्यापी CJP (Cockroach Janta Party) आंदोलन के बाद भी पेपर लीक जारी है, आक्रोशित युवा सड़क पर हैं, जानिए भारत में पेपर लीक को लेकर पिछले 3 साल तक की स्थिति
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 01, 2026

Paper Leak Protest

Paper Leak Protest India: CJP के जंतर-मंतर पर देशव्यापी आंदोलन के बाद भी भारत में नहीं रुक रहे पेपर लीक, अब झारखंड में उठी आवाज। (AI Creative)

Paper Leak Protest: पेपर लीक अब सिर्फ किसी एक परीक्षा की गड़बड़ी नहीं रही, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सबसे बड़ा सवाल बन चुका है। पिछले तीन साल (2024–2026) में NEET-UG 2024, SSC भर्ती विवाद, विभिन्न राज्यों की भर्ती परीक्षाओं और NEET-UG 2026 समेत कई बड़ी परीक्षाएं पेपर लीक या अनियमितताओं के आरोपों से घिरीं हैं। यदि दायरा बढ़ाकर देखा जाए, तो 2015 से 2026 के बीच AIPMT, SSC CGL, CBSE कक्षा 12 अर्थशास्त्र, REET, NEET और अन्य भर्ती परीक्षाओं समेत दर्जनों बड़े विवाद सामने आए हैं, जिन्होंने करोड़ों अभ्यर्थियों का भरोसा हिला दिया है। इसी बढ़ते असंतोष के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर के बाद अब झारखंड में भी स्टूडेंट्स सड़कों पर उतर आए हैं। सवाल सिर्फ एक राज्य या एक परीक्षा का नहीं, बल्कि यह है कि आखिर बार-बार होने वाले पेपर लीक पर अब तक स्थायी रोक क्यों नहीं लग पा रही?

झारखंड में विरोध की लहर

झारखंड में AISA और RYA जैसे छात्र संगठनों ने 6 जुलाई 2026 को रांची में राजभवन की ओर मार्च निकालकर विरोध दर्ज कराया। भारी बारिश और पुलिस बैरिकेड के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने 'पेपर लीक बंद करो' और 'शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो' जैसे नारे लगाए। उन्होंने केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों से जवाबदेही की मांग की, साथ ही NTA और NEP 2020 को रद्द करने की भी आवाज उठाई।

देश में पेपर लीक की संख्या: 2024–2026

  • NEET-UG 2024: 5 मई 2024 को पटना में पेपर लीक हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई 2024 को माना कि कम से कम 155 छात्रों को इसका लाभ मिला, लेकिन व्यापक प्रणालीगत विफलता नहीं पाई गई, इसलिए परीक्षा रद्द नहीं की गई।
  • NEET-UG 2026: हाल ही में NEET-UG 2026 का पेपर लीक हुआ, जिसके संदर्भ में CBI ने 'किंगपिन' की पहचान कर गिरफ्तारी की घोषणा की है।
  • अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं: इंडिया टुडे की OSINT टीम ने पिछले दशक में 17 दर्ज मामलों में से पांच राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं (AIPMT 2015, SSC CGL 2017–18, CBSE कक्षा XII अर्थशास्त्र 2018, NEET UG 2024, NEET UG 2026) को शामिल किया है।

इन घटनाओं को मिलाकर, 2024 से 2026 तक कम से कम दो बड़े राष्ट्रीय पेपर लीक की पुष्टि होती है। अन्य राज्यों और परीक्षाओं में भी इसी तरह अन्य पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

पेपर लीक पर CJP आंदोलन का पूरा घटनाक्रम

  • CJP आंदोलन (Cockroach Janta Party) की शुरुआत मई 2026 में हुई, जब सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत की 'cockroaches' टिप्पणी ने युवाओं में आक्रोश पैदा किया। यह आंदोलन NEET 2026 के पेपर लीक और CBSE ऑन-स्क्रीन मार्किंग की अनियमितताओं के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ।
  • जंतर-मंतर पर यह आंदोलन जून से जुलाई तक जारी रहा। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने वापस आकर विरोध जारी रखा।
  • केंद्र सरकार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए फास्ट-ट्रैक अदालतों की घोषणा की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसे अपर्याप्त बताया। इसके बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। तब लोकसभा मानसून सत्र के दौरान एंटी पेपर लीक बिल 2026 (संशोधित) भी पास किया गया।

झारखंड में जंतर-मंतर जैसा विरोध

झारखंड में यह आंदोलन CJP आंदोलन की लहर में शामिल हुआ। AISA और RYA ने रांची में विरोध प्रदर्शन कर केंद्र और राज्य सरकारों से जवाबदेही की मांग की। यह विरोध केवल NEET लीक तक सीमित नहीं था, बल्कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की मांग भी इसमें शामिल थी।

क्या यह आंदोलन असर दिखा रहा है?

देश में पेपर लीक की घटनाओं ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। CJP आंदोलन ने केंद्र सरकार को फास्ट-ट्रैक अदालतों की घोषणा तक मजबूर किया। झारखंड में भी विरोध ने शिक्षा नीतियों और परीक्षा सुरक्षा पर ध्यान आकर्षित किया है।

देश में क्यों नहीं रुक रहे पेपर लीक

  1. संगठित पेपर लीक गैंग: कई राज्यों में सक्रिय गिरोह करोड़ों रुपये लेकर प्रश्नपत्र बेचने का नेटवर्क चला रहे हैं।
  2. अंदरूनी मिलीभगत: प्रिंटिंग प्रेस, परीक्षा केंद्र, परिवहन और गोपनीय शाखाओं से जुड़े कुछ लोगों की संलिप्तता कई मामलों में सामने आई है।
  3. डिजिटल तकनीक का दुरुपयोग: एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप, सोशल मीडिया और स्क्रीनशॉट के जरिए कुछ ही मिनटों में प्रश्नपत्र हजारों लोगों तक पहुंच जाता है।
  4. कमजोर सुरक्षा व्यवस्था: प्रश्नपत्र की छपाई, पैकिंग, परिवहन और वितरण की हर कड़ी पर समान स्तर की निगरानी नहीं होती।
  5. भर्ती परीक्षाओं का बढ़ता दबाव: कम सरकारी नौकरियां और लाखों अभ्यर्थियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा से पेपर खरीदने का अवैध बाजार तैयार हो जाता है।
  6. जांच और सजा में देरी: कई मामलों में कार्रवाई वर्षों तक चलती रहती है, जिससे दोषियों में कानून का डर कम हो जाता है।
  7. राज्यों में अलग-अलग व्यवस्था: हर भर्ती एजेंसी और राज्य की परीक्षा सुरक्षा प्रणाली अलग होने से एक समान सुरक्षा मानक लागू नहीं हो पाते।

दुनिया में क्या है पेपर लीक रोकने की व्यवस्था?

चीन- परीक्षा केंद्रो पर AI कैमरे, फेस रिकग्निशन, सिग्नल जैमर और कड़ी डिजिटल निगरानी।

दक्षिण कोरिया- प्रश्नपत्रों की एन्क्रिप्टेड डिजिटल सुरक्षा, सीमित एक्सेस और बहुस्तरीय गोपनीयता।

अमेरिका- SAT, GRE जैसी परीक्षाओं में सुरक्षित डिजिटल बैंक, अलग-अलग प्रश्न सेट और कड़ी साइबर सुरक्षा।

ब्रिटेन- प्रश्नपत्रों की सुरक्षित पैकेजिंग, ट्रैकिंग और परीक्षा से ठीक पहले नियंत्रित वितरण।

सिंगापुर- प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर वितरण तक हर चरण का ऑडिट और सीमित मानव हस्तक्षेप।

अब आगे क्या: भारत को कितने बदलावों की जरूरत?

  • एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से प्रश्नपत्र तैयार होने से परीक्षा केंद्र तक पूरी प्रक्रिया सुरक्षित हो।
  • GPS ट्रैकिंग के जरिए प्रश्नपत्र ले जाने वाले वाहनों की रियल-टाइम निगरानी हो।
  • AI आधारित रिस्क मॉनिटरिंग से संदिग्ध गतिविधियों और असामान्य पैटर्न की तुरंत पहचान हो।
  • बायोमेट्रिक सत्यापन से फर्जी अभ्यर्थियों और सॉल्वर गैंग पर रोक लगे।
  • डिजिटल ऑडिट ट्रेल ताकि प्रश्नपत्र किसने, कब और कहां एक्सेस किया, इसका पूरा रिकॉर्ड रहे।
  • फास्ट-ट्रैक कोर्ट और समयबद्ध सजा ताकि पेपर लीक मामलों का निपटारा महीनों नहीं, तय समय सीमा में हो।
  • एक राष्ट्रीय परीक्षा सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हो, जिसे सभी केंद्रीय और राज्य भर्ती एजेंसियां अनिवार्य रूप से अपनाएं।

देश में 2024 से 2026 के बीच दो बड़े राष्ट्रीय पेपर लीक (NEET 2024, NEET 2026) की पुष्टि होती है, साथ ही SSC और CBSE जैसी परीक्षाओं में भी लीक की घटनाएं रही हैं। CJP आंदोलन ने इस समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया और झारखंड में भी इस पर प्रतिक्रिया स्वरूप विरोध हुआ। अब सवाल यह है कि सरकार कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से इस परीक्षा संकट को सुलझाती है और क्या छात्रों को फिर से भरोसा दिला पाती है।