
प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT
गर्मी में आम का 'मौसम' भी दस्तक देता है, और हर कोने में आम की खुशबू और स्वाद फैल जाता है। लेकिन आमरस, पन्ना या लस्सी तक ही सीमित नहीं - भारत की विविधता में आम ने कई अनसुने, स्वादिष्ट और सांस्कृतिक रूपों को जन्म दिया है। आइए, इस आम के त्योहार में उन कम‑ज्ञात व्यंजनों की खोज करें, जो स्वाद और परंपरा दोनों में गहराई लिए हुए हैं।
भारत की विविधता का स्वाद आम के व्यंजनों में स्पष्ट झलकता है। केरल की “Meen Manga” यानी मछली‑आम करी, कच्चे आम, नारियल के दूध और स्थानीय मछली के साथ बनती है - एक तीखी, मलाईदार और सुगंधित डिश, जो चावल पर परोसी जाती है।
कर्नाटक के मैंगलोर में “मैंगलोर‑स्टाइल मैंगो करी” तैयार की जाती है, जिसमें छोटे, मीठे‑खट्टे आमों का उपयोग होता है और यह करी मीठा‑खट्टा स्वाद लिए होती है।
गुजरात में “मांगो कढ़ी” एक अनूठा व्यंजन है, जिसमें बेसन, दही, मसाले और मीठे पके आम के टुकड़े मिलाए जाते हैं - मीठा, नमकीन और खट्टा स्वाद का संगम। बंगाल और ओडिशा के ग्रामीण इलाकों में आम के फूलों से बनी “मैंगो ब्लॉसम चटनी” तैयार की जाती है - गुलाबी‑सफेद फूलों को अदरक और मिर्च के साथ पीसकर बनाई जाने वाली यह चटनी स्वाद में हल्की कड़वाहट और फूलों की खुशबू लिए होती है।
महाराष्ट्र में “मैंगो झुणका” पारंपरिक झुणका का नया रूप है - इसमें कच्चे आम को कद्दूकस करके बेसन, प्याज और मसालों के साथ मिलाया जाता है, जिससे झुणके में आम की रसदार मिठास और खट्टापन जुड़ जाता है।
ओडिशा का “अंबुला” भी एक अनूठा व्यंजन है - यह सूखे आम से बनता है, जिसे धूप में सुखाकर तैयार किया जाता है और पारंपरिक व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है।
दिल्ली में हर साल आयोजित “इंटरनेशनल मैंगो फेस्टिवल” में आम की विविधता और उससे बने व्यंजनों का जश्न मनाया जाता है। इस दो‑दिवसीय उत्सव में 550 से अधिक आम की किस्में प्रदर्शित की जाती हैं, और पांच‑सितारा होटलों के शेफ आम से बने असाधारण व्यंजन प्रस्तुत करते हैं—जैसे जाम, अचार, जूस और कैन्ड फ्रूट्स। यह आयोजन आम की विविधता को समझने और पर्यटन व निर्यात को बढ़ावा देने का मंच भी है।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में 2026 में आयोजित मैंगो फेस्टिवल में दुर्लभ “नवाबी” आमों जैसे कोहितूर, चंपा, अनारस आदि को प्रमुखता मिली। साथ ही पारंपरिक व्यंजनों जैसे आम पन्ना, कच्चे आम की खीर, मैंगो संडे, चटनी और मौसमी शर्बत भी परोसे गए—ये व्यंजन शेहरवाली पाक परंपरा से जुड़े थे और सांस्कृतिक अनुभव को समृद्ध करते थे।
इन व्यंजनों में केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि संस्कृति, मौसम और स्थानीय संसाधनों की कहानी भी छिपी है। जैसे केरल की मछली‑आम करी में समुद्री स्वाद और आम की खटास का संगम है, वहीं गुजरात की आम कढ़ी में मीठा‑खट्टा संतुलन और गर्मी से राहत का संदेश है। महाराष्ट्र का आम झुणका घर की रसोई में नए स्वाद की खोज का प्रतीक है, और ओडिशा का अंबुला पारंपरिक संरक्षण और मौसम‑अनुकूलता की मिसाल है।
ये व्यंजन दिखाते हैं कि आम केवल फल नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर है, जो हर क्षेत्र की पहचान में समाहित है। त्योहारों में आम की विविधता और उससे बने व्यंजन हमें यह याद दिलाते हैं कि स्वाद के साथ‑साथ हमारी परंपराएं, यादें और पहचान भी जुड़ी होती हैं।
आम का त्योहार केवल फल का उत्सव नहीं, बल्कि स्वाद, संस्कृति और यादों का संगम है—और इन अनसुने व्यंजनों में वह संगम सबसे खूबसूरती से झलकता है।
Updated on:
01 Aug 2026 12:45 pm
Published on:
01 Aug 2026 12:43 pm
