
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) किसानों को खेती-किसानी से जुड़ी जरूरतों के लिए कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। समय के साथ खेती की लागत बढ़ने, जमीन का रकबा बढ़ने या नई फसलें लगाने पर किसानों को अधिक पूंजी की जरूरत पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में किसान अपने KCC की लिमिट बढ़वाने के लिए बैंक में आवेदन कर सकते हैं।
KCC की लिमिट मुख्य रूप से किसान के भूमि क्षेत्र, बोई जाने वाली फसल, प्रति हेक्टेयर लागत, सिंचाई की स्थिति, खेती से जुड़ी अन्य जरूरतों और पुनर्भुगतान क्षमता के आधार पर तय की जाती है। बैंक जिला स्तरीय तकनीकी समिति (DLTC) द्वारा निर्धारित फसल लागत को भी ध्यान में रखते हैं।
बैंक आमतौर पर तब लिमिट बढ़ाने पर विचार करता है जब किसान की खेती का रकबा बढ़ गया हो, फसल उत्पादन की लागत बढ़ गई हो, किसान ने नई या अधिक लागत वाली फसल शुरू की हो या उसका ऋण चुकाने का रिकॉर्ड अच्छा रहा हो। नियमित रूप से ऋण चुकाने वाले किसानों को बैंक प्राथमिकता देते हैं।
हां। यदि खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल, मजदूरी या अन्य कृषि लागतों में वृद्धि हुई है, तो बैंक संशोधित लागत के आधार पर KCC लिमिट बढ़ा सकता है। कई बैंकों में हर वर्ष कार्यशील पूंजी की जरूरत को देखते हुए लिमिट में क्रमिक वृद्धि का प्रावधान भी होता है।
KCC लिमिट बढ़ाने के लिए सामान्यतः निम्न दस्तावेज मांगे जाते हैं:
बैंक अपनी आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त दस्तावेज भी मांग सकते हैं।
किसान को अपनी बैंक शाखा में जाकर KCC लिमिट वृद्धि का आवेदन देना होता है। बैंक दस्तावेजों की जांच करता है और आवश्यकता पड़ने पर भूमि व फसल संबंधी विवरण का सत्यापन करता है। पात्रता पूरी होने पर बैंक नई लिमिट मंजूर कर देता है।
यदि किसान ने अतिरिक्त जमीन खरीदी है, पट्टे पर जमीन ली है या अधिक लागत वाली फसलें उगानी शुरू की हैं, तो बैंक इन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ऋण सीमा बढ़ा सकता है। इससे किसान को खेती के लिए अधिक कार्यशील पूंजी उपलब्ध हो जाती है।
आवेदन और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद बैंक आमतौर पर कुछ दिनों से लेकर कुछ सप्ताह के भीतर निर्णय ले सकता है। समय बैंक की प्रक्रिया और दस्तावेजों की उपलब्धता पर निर्भर करता है।
लिमिट बढ़ने से ब्याज दर स्वतः नहीं बढ़ती। KCC पर लागू ब्याज दर और सरकार द्वारा दी जाने वाली ब्याज सब्सिडी के नियम पहले की तरह लागू रहते हैं। समय पर ऋण चुकाने वाले पात्र किसानों को ब्याज में राहत का लाभ मिलता रहता है।
KCC की कोई एक समान अधिकतम सीमा सभी किसानों के लिए तय नहीं है। यह किसान की भूमि, फसल पैटर्न, लागत और बैंक के आकलन पर निर्भर करती है। पात्रता के अनुसार बैंक आवश्यकता के अनुरूप लिमिट निर्धारित करता है।
यदि बैंक लिमिट बढ़ाने का आवेदन अस्वीकार कर देता है, तो किसान रिजेक्शन का कारण लिखित रूप में मांग सकते हैं। दस्तावेजों की कमी या अन्य कमियों को दूर कर दोबारा आवेदन किया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर बैंक के उच्च अधिकारियों या शिकायत निवारण तंत्र से भी संपर्क किया जा सकता है।