
MP Critical Minerals Hub: मध्यप्रदेश में ग्रेफाइट, तांबा, हीरा और अन्य खनिजों की समृद्धता तथा भारत की क्रिटिकल मिनरल्स रणनीति के बीच संबंध को समझना अब और ज्यादा जरूरी हो गया है। यहां हम आपको बताएंगे कि मध्यप्रदेश रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स का नया केंद्र कैसे बन सकता है? आपके लिए क्या होंगे इसके मायने?
मध्यप्रदेश देश का एकमात्र हीरा उत्पादक राज्य है और यह तांबे का भी सबसे बड़ा भंडार रखने वाला राज्य है। 2023-24 में राज्य ने लगभग 25.46 लाख टन तांबे का उत्पादन किया। साथ ही, 1 अप्रैल 2020 तक हीरे का अनुमानित भंडार 8,47,559 कैरेट था। राज्य में ग्रेफाइट के भंडार भी उपलब्ध हैं, विशेषकर बेतुल और सिंगरौली जिलों में।
भारत सरकार ने अगस्त 2023 में एमएमडीआर अधिनियम में संशोधन कर 24 क्रिटिकल मिनरल्स को विशेष सूची में शामिल किया, जिससे इन खनिजों की खोज और खनन को बढ़ावा मिला। इनमें ग्रेफाइट, तांबा, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई) जैसे खनिज शामिल हैं।
केंद्रीय कैबिनेट ने ग्रेफाइट, सीजियम, रूबिडियम और जिरकोनियम जैसे खनिजों पर रॉयल्टी दरों में सुधार को मंजूरी दी, इससे इन खनिजों के ब्लॉकों की नीलामी और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
ग्रेफाइट विशेष रूप से ईवी बैटरियों में एनोड के रूप में महत्वपूर्ण है और भारत अपनी ग्रेफाइट की 60% आवश्यकता आयात पर निर्भर करता है।
नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2070 तक ग्रेफाइट की मांग लगभग 46.4 मिलियन टन और तांबे की मांग लगभग 66 मिलियन टन होगी, जो भारत के नेट जीरो लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण है।
मध्यप्रदेश में ग्रेफाइट और तांबे के भंडार हैं, लेकिन रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई) के मामले में राज्य की स्थिति स्पष्ट नहीं है। भारत में आरईई के प्रमुख भंडार आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा और केरल में हैं।
जीएसआई ने मध्यप्रदेश को कुछ ब्लॉकों के लिए अन्वेषण लाइसेंस दिए हैं, जिनमें ग्रेफाइट, बेस मेटल और आरईई शामिल हैं। यह संकेत है कि राज्य में संभावित खोज जारी है, लेकिन अभी तक आरईई में ठोस सफलता नहीं मिली है।
भारत सरकार ने काबिल (खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड) नामक संयुक्त उपक्रम बनाया है, जो क्रिटिकल मिनरल्स की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने का कार्य करता है। साथ ही, जीएसआई ने 2024-25 तक अन्वेषण परियोजनाओं की संख्या 118 से बढ़ाकर 196 कर दी है।
बता दें कि मध्यप्रदेश में ग्रेफाइट और तांबे के भंडार हैं, जो ईवी बैटरियों और अन्य उच्च तकनीकी उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत की क्रिटिकल मिनरल्स नीति में ये खनिज प्रमुख हैं।
केंद्र सरकार ने इन पर नीलामी और उत्पादन को बढ़ावा देने वाले कदम उठाए हैं। मध्यप्रदेश में अन्वेषण गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन आरईई के मामले में राज्य अभी तक अग्रणी नहीं है।
इसका अर्थ यह है कि मध्यप्रदेश में क्रिटिकल मिनरल्स का केंद्र बनने की क्षमता है। खासतौर पर ग्रेफाइट और तांबे के क्षेत्र में लेकिन इसके लिए अन्वेषण, निवेश, प्रसंस्करण सुविधाओं और नीति समर्थन की आवश्यकता है। राज्य में आरईई की खोज और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर कार्य करना होगा।
यदि मध्यप्रदेश में ग्रेफाइट और तांबे के खनन और प्रसंस्करण में निवेश बढ़ता है, तो यह ईवी और बैटरी उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण आपूर्ति केंद्र बन सकता है। साथ ही, यदि आरईई में अन्वेषण सफल होता है, तो राज्य की भूमिका और भी सशक्त हो सकती है। काबिल और जीएसआई जैसी संस्थाएं इस दिशा में सहयोग कर सकती हैं।
यदि आप उद्योग, निवेश या रोजगार के दृष्टिकोण से देख रहे हैं, तो मध्यप्रदेश में खनिज क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ रही हैं। यह क्षेत्र भविष्य में ईवी, बैटरी और सेमीकंडक्टर जैसी उभरती तकनीकों के लिए महत्वपूर्ण आपूर्ति केंद्र बन सकता है। यदि आप नीति, निवेश या व्यवसाय से जुड़े हैं, तो इस क्षेत्र पर नजर बनाए रखना समझदारी होगी।
राज्य सरकार को चाहिए कि वह अन्वेषण को तेज करे, प्रसंस्करण सुविधाओं का विकास करे और निवेशकों को आकर्षित करे। साथ ही, केंद्र सरकार की क्रिटिकल मिनरल्स नीति का लाभ उठाते हुए, मध्यप्रदेश को ईवी और बैटरी सप्लाई चेन में एक मजबूत कड़ी बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए।
ऐसे में साफ है कि मध्यप्रदेश में रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स का केंद्र बनने की संभावना है। लेकिन यह तभी साकार होगी, जब खोज, नीति और निवेश एक साथ मिलकर कार्य करें।