
Personal Loan Mistakes : जब अचानक पैसे की आवश्यकता पड़ती है तो पर्सनल लोन लेना सबसे आसान लगता है। लेकिन, जल्दबाजी में कुछ गलतियां हो सकती हैं जिसके कारण आप पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। इसमें कई चीजें छिपी होती हैं और कुछ हम समझ नहीं पाते। इसलिए, आज हम आपको उनके बारे में बताने जा रहे हैं।
जैसे- जून 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, Axis Bank पर्सनल लोन पर 8.95% सालाना से शुरुआती ब्याज दर की पेशकश की। साथ ही HDFC Bank समेत कई अन्य बैंक 9.99% या उससे अधिक की शुरुआती ब्याज दर पर पर्सनल लोन उपलब्ध करा रहे हैं। इस तरह की जानकारी चेक कर लें।
हालांकि, किसी भी लोन का चयन केवल ब्याज दर के आधार पर नहीं करना चाहिए। प्रोसेसिंग फीस, लोन अवधि, कुल पुनर्भुगतान राशि (Total Repayment), प्रीपेमेंट नियम और आपकी क्रेडिट प्रोफाइल जैसे कई अन्य पहलू भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
अब विस्तार से समझते हैं कि अपने लिए सबसे उपयुक्त पर्सनल लोन चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
सबसे पहले तय करें कि आपको वास्तव में कितनी राशि की आवश्यकता है और उसका उद्देश्य क्या है - जैसे शादी, मेडिकल इमरजेंसी, शिक्षा या अन्य जरूरी खर्च। कई बार बैंकर्स के लुभावने बातों में आकर हम आवश्यकता से अधिक लोन ले लेते हैं। इस कारण आपकी मासिक EMI और कुल ब्याज, दोनों बढ़ सकते हैं।
ब्याज दरें अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों में भिन्न हो सकती हैं। इसलिए विभिन्न बैंकों की दरों की तुलना करें। ब्याज दर में मामूली अंतर भी बड़े लोन और लंबी अवधि में हजारों या लाखों रुपये की बचत करा सकता है।
केवल ब्याज दर देखकर निर्णय न लें। प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट चार्ज, फोरक्लोजर शुल्क, लेट पेमेंट पेनल्टी और अन्य शुल्कों को भी ध्यान से समझें। ये सभी मिलकर आपके लोन की कुल लागत को बढ़ा सकते हैं।
कम अवधि चुनने पर EMI अधिक होती है, लेकिन कुल ब्याज कम देना पड़ता है। वहीं, लंबी अवधि में EMI कम होती है, पर कुल ब्याज अधिक चुकाना पड़ सकता है। इसलिए अपनी आय और मासिक बजट के अनुसार संतुलित अवधि चुनें।
ध्यान रखें कि लोन की अवधि बढ़ने पर ब्याज दर नहीं बढ़ती, लेकिन कुल चुकाया जाने वाला ब्याज बढ़ सकता है। उदाहरण के लिए, यदि ब्याज दर 10% सालाना है, तो दो या तीन साल के लोन पर भी दर 10% सालाना ही रहेगी। हालांकि, लंबी अवधि के कारण कुल ब्याज भुगतान अधिक हो सकता है। इसलिए लोन की अवधि चुनते समय केवल EMI ही नहीं, बल्कि कुल पुनर्भुगतान (Total Repayment) और कुल ब्याज पर भी ध्यान दें।
केवल कम ब्याज दर ही पर्याप्त नहीं है। बैंक या NBFC की ग्राहक सेवा, आवेदन प्रक्रिया की पारदर्शिता, शिकायत निवारण और लोन राशि जारी करने (Disbursal) की गति भी महत्वपूर्ण होती है। यदि आपका पहले से किसी बैंक में खाता, FD या क्रेडिट कार्ड है, तो आपको प्री-अप्रूव्ड ऑफर या बेहतर शर्तें मिल सकती हैं। इसके लिए बैंक की हेल्पलाइन या रिलेशनशिप मैनेजर से बात कर सकते हैं।
आपका CIBIL स्कोर लोन मंजूरी और ब्याज दर, दोनों को प्रभावित करता है। सामान्यतः 750 या उससे अधिक का स्कोर अच्छा माना जाता है, जबकि 800 या उससे अधिक का स्कोर होने पर बेहतर ब्याज दर मिलने की संभावना बढ़ जाती है। कम क्रेडिट स्कोर होने पर ब्याज दर अधिक हो सकती है।
लोन के लिए आवेदन करने से पहले अपना CIBIL स्कोर जांच लें। साथ ही पहचान पत्र, पते का प्रमाण, बैंक स्टेटमेंट, आय प्रमाण और सैलरी स्लिप जैसे आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखें। पात्रता (Eligibility) की शर्तों को समझकर आवेदन करने से मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
यदि आप पीयर-टू-पीयर (P2P) लेंडिंग प्लेटफॉर्म से लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो केवल RBI से पंजीकृत NBFC-P2P प्लेटफॉर्म का ही चयन करें। साथ ही आवेदन करने से पहले प्लेटफॉर्म की वर्तमान शर्तों और RBI के लागू नियमों की जांच अवश्य करें। बार-बार लोन के लिए आवेदन करने से आपके क्रेडिट स्कोर पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
कम EMI हमेशा सस्ता लोन नहीं होती। कई बार थोड़ी अधिक EMI चुनने पर कुल ब्याज कम चुकाना पड़ता है। इसलिए निर्णय लेते समय केवल मासिक किस्त नहीं, बल्कि कुल पुनर्भुगतान राशि (Total Repayment) पर भी ध्यान दें।
लोन लेने से पहले थोड़ा समय लेकर यह जरूर सोचें कि क्या खर्च को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है या बचत से पूरा किया जा सकता है। यदि खर्च आवश्यक और तत्काल है, जैसे मेडिकल इमरजेंसी, तो लोन एक उचित विकल्प हो सकता है। लेकिन गैर-जरूरी खर्चों (पार्टी, लग्जरी शॉपिंग आदि) के लिए लोन लेना भविष्य में वित्तीय बोझ बढ़ा सकता है।
सही पर्सनल लोन चुनने के लिए ब्याज दर, प्रोसेसिंग शुल्क, कुल पुनर्भुगतान राशि, लोन अवधि आदि समझने के लिए आप उनसे एक लिखित ड्राफ्ट मंगा लें। उसे पढ़िए और कही गई बातों के साथ मैच करिए। अगर लिखित रूप से सबकुछ सही है तो तभी लोन के लिए फाइनल कॉल लें।