
हर दिन की भाग-दौड़ में हम अक्सर भूल जाते हैं कि हमारा शरीर क्या चाहता है और क्या नहीं। प्रोटीन, जो शरीर की मरम्मत, ऊर्जा और प्रतिरक्षा के लिए जरूरी है, अक्सर या तो कम मिलता है या जरूरत से ज्यादा। चलिए जानते हैं कि प्रोटीन का सही संतुलन कैसे बनाए रखें और क्यों यह खासकर महिलाओं के लिए मायने रखता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वयस्कों के लिए कुल दैनिक ऊर्जा का लगभग 10–15 प्रतिशत प्रोटीन से आना पर्याप्त होता है। भारत में ICMR‑NIN (भारतीय पोषण संस्थान) की सिफारिश है कि स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रति किलोग्राम शरीर वजन पर लगभग 0.83 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन पर्याप्त है।
शाकाहारियों के लिए यह 1 ग्राम प्रति किलोग्राम तक बढ़ाया जा सकता है, क्योंकि पौधे आधारित प्रोटीन की गुणवत्ता थोड़ी कम होती है। यह संतुलन बनाए रखना इसलिए जरूरी है क्योंकि प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों, त्वचा, एंजाइम और हार्मोन जैसे महत्वपूर्ण अंगों के निर्माण और मरम्मत में मदद करता है।
उदाहरण के साथ समझिए-
अगर किसी महिला का वजन 60 किलो है और वह सामान्य दैनिक गतिविधियां करती हैं, तो ICMR-NIN के 0.83–1 ग्राम/किलो के हिसाब से उनकी रोजाना प्रोटीन जरूरत लगभग 50–60 ग्राम होगी।
फॉर्मूला:
वजन × 0.83–1 ग्राम = दैनिक प्रोटीन जरूरत
60 × 0.83 = 49.8 ग्राम
60 × 1 = 60 ग्राम
यानी 60 किलो वजन वाली महिला को करीब 50–60 ग्राम प्रोटीन प्रतिदिन की जरूरत हो सकती है। हालांकि, उम्र, गर्भावस्था/स्तनपान, बीमारी और शारीरिक गतिविधि के स्तर के अनुसार जरूरत अलग हो सकती है।
भारत में पारंपरिक आहार जैसे चावल, रोटी और सब्जियां अक्सर कार्बोहाइड्रेट पर आधारित होते हैं, जिससे प्रोटीन की मात्रा कम रह जाती है। यह कमी खासकर युवा छात्राओं, कामकाजी महिलाओं और नई माताओं में देखी जाती है, क्योंकि इन अवस्थाओं में शरीर को अतिरिक्त प्रोटीन की जरूरत होती है। प्रोटीन की कमी से थकान, कमजोर प्रतिरक्षा, बालों और त्वचा की समस्याएं, और मांसपेशियों में कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
प्रोटीन जरूरत से ज्यादा लेने से शरीर पर दबाव बढ़ सकता है विशेषकर गुर्दों (किडनी) पर। WHO बताता है कि अत्यधिक प्रोटीन सेवन गुर्दों पर मेटाबॉलिक बोझ डाल सकता है। हाल ही में प्रकाशित एक समीक्षा में पाया गया कि उच्च‑प्रोटीन आहार से शरीर की वसा प्रतिशत कम हो सकती है, लेकिन यह मांसपेशियों की मात्रा पर खास असर नहीं डालता।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक प्रोटीन से अतिरिक्त वसा जमा हो सकती है और मधुमेह का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए, बिना किसी चिकित्सकीय सलाह के अत्यधिक प्रोटीन सप्लीमेंट्स या पाउडर का सेवन जोखिम भरा हो सकता है।
WHO सुझाव देती है कि पौधे आधारित प्रोटीन स्रोतों को प्राथमिकता देना बेहतर होता है - यह दिल और अन्य बीमारियों के जोखिम को कम करता है। ICMR‑NIN की गाइडलाइन में भी यह बात शामिल है कि भारतीय आहार में दाल‑अनाज‑दूध का संतुलित मिश्रण होना चाहिए, जिससे प्रोटीन की कमी पूरी हो सके।
एक सामान्य दिनचर्या में प्रोटीन शामिल करने के आसान तरीके:
यदि आप व्यायाम करती हैं या नई मां हैं, तो एक बार में अधिक प्रोटीन लेने की बजाय दिनभर में छोटे हिस्सों में लेना बेहतर होता है—इससे शरीर उसे बेहतर तरीके से उपयोग कर पाता है।
यदि आपको कोई गुर्दे की बीमारी, मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने से पहले डॉक्टर या पंजीकृत आहार विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। सप्लीमेंट्स या पाउडर लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि वे केवल तभी उपयोगी हैं जब भोजन से पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिल पा रहा हो। प्राकृतिक स्रोत हमेशा प्राथमिकता में होने चाहिए।