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थकान मिटाएं और मूड को करें बेहतरीन! ऑफिस में सिर्फ 5 मिनट का वर्कआउट क्यों है जरूरी

क्या आपके ऑफिस की कुर्सी पर बैठकर थकान महसूस हो रही है? सोचिए, सिर्फ 5 मिनट की हल्की-फुल्की हरकत से आप न सिर्फ अपनी ऊर्जा को फिर से बूस्ट कर सकते हैं, बल्कि मानसिक ताजगी भी पा सकते हैं! जानिए कैसे!
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भारत

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Ravi Gupta

Aug 12, 2026

5 min workout in office

प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT

काम के बीच लंबे समय तक बैठे रहना शरीर को थका देता है, खून का बहाव धीमा कर देता है, मांसपेशियों में जकड़न लाता है और मानसिक थकान भी बढ़ाता है। अगर आप हर घंटे सिर्फ पांच मिनट के छोटे-छोटे वर्कआउट को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें, तो इससे न केवल शरीर में खून का बहाव सुधरता है, बल्कि मूड और ऊर्जा में भी बढ़ोतरी होती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी सलाह देता है कि हर 20–30 मिनट में 3–5 मिनट की हल्की-फुल्की हरकत से मांसपेशियों की थकावट कम होती है और रक्त परिसंचरण बेहतर होता है।

5 मिनट का वर्कआउट: क्या सच में असरदार है?

एक अध्ययन में पाया गया कि ऑफिस कर्मचारियों द्वारा नियमित छोटे वर्कआउट से BMI, शरीर की चर्बी, VO₂max, HDL, कुल कोलेस्ट्रॉल और लचीलेपन में सुधार होता है। BMJ में प्रकाशित एक 2026 के अध्ययन में पाया गया कि सिर्फ पांच मिनट की तेज चलने जैसी मध्यम-तीव्रता वाली गतिविधि रोजाना करने से समय से पहले मृत्यु का जोखिम 10% तक कम हो सकता है। यह छोटे वर्कआउट्स की ताकत को दर्शाता है।

अन्य शोध बताते हैं कि लंबे समय तक बैठे रहने को तोड़ने से शरीर की ऊर्जा खर्च बढ़ती है और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। माइक्रो-वर्कआउट्स मूड, ऊर्जा और मानसिक ताजगी में सुधार लाते हैं, खासकर व्यस्त दिनचर्या में।

कैसे करें: ऑफिस के लिए 5 मिनट का वर्कआउट

असरदार और ऑफिस-फ्रेंडली वर्कआउट रूटीन है, जिसे आप बिना उपकरण के कर सकते हैं:

  1. चेयर स्क्वाट्स – कुर्सी के सामने खड़े होकर धीरे से नीचे बैठें और उठें (10 बार)
  2. वॉल पुश-अप्स – दीवार से थोड़ी दूरी पर खड़े होकर पुश-अप्स करें (10 बार)
  3. हील ड्रॉप्स – पैरों की एड़ी उठाकर धीरे से नीचे लाएं (10 बार)
  4. स्ट्रेचिंग – हाथ, गर्दन और पीठ की हल्की स्ट्रेचिंग करें (1–2 मिनट)

एक अध्ययन में इसी तरह के शरीर-भार आधारित व्यायामों से पुश-अप क्षमता, सिट-अप सहनशीलता, ताकत, लचीलापन और मानसिक ताजगी में सुधार पाया गया। यह दिखाता है कि बिना जिम या उपकरण के भी असरदार बदलाव संभव है।

क्यों काम करता है यह तरीका?

  • ब्रेक लें सक्रिय रहें: लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर की ऊर्जा और रक्त प्रवाह कम हो जाता है। छोटे-छोटे वर्कआउट इसे तोड़ते हैं और शरीर को सक्रिय रखते हैं।
  • माइक्रो-वर्कआउट्स का असर: छोटे समय में की गई गतिविधियां भी स्वास्थ्य पर बड़ा असर डालती हैं, जैसे कि मृत्यु जोखिम में कमी, मूड सुधार और ऊर्जा बढ़ना।
  • मानसिक लाभ: हल्की-फुल्की हरकत से तनाव कम होता है, ध्यान बेहतर होता है और काम में उत्पादकता बढ़ती है।

कौन-कौन कर सकता है और कब सावधानी बरतें?

यह रूटीन ज्यादातर वयस्कों के लिए सुरक्षित है, लेकिन अगर आपको किसी प्रकार की हृदय, जोड़ों या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। यह किसी मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है। अगर व्यायाम के दौरान दर्द, चक्कर या असहजता महसूस हो, तो तुरंत रोक दें और डॉक्टर से मिलें।

अगर आप इस 5-मिनट रूटीन को नियमित बना लेते हैं, तो धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर 10–15 मिनट तक ले जा सकते हैं या सप्ताह में कुछ दिन लंबी वॉक या योग शामिल कर सकते हैं। लेकिन शुरुआत हमेशा छोटे, आसान कदम से करें - यही सबसे टिकाऊ तरीका है।