
ऑनलाइन शॉपिंग और डिजिटल पेमेंट्स के बढ़ते चलन के साथ ‘कैशबैक स्कैम’ यानी नकली कैशबैक का जाल भी तेजी से फैल रहा है। यह स्कैम केवल झांसा देने वाला नहीं है, बल्कि संगठित गिरोहों द्वारा बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। कैशबैक स्कैम अब केवल व्यक्तिगत ठगी नहीं, बल्कि तकनीकी और संगठित गिरोहों द्वारा किया जाने वाला अपराध बन चुका है। झारखंड के जामताड़ा जिले में ठगी के नेटवर्क और ई-कॉमर्स पर इंडस्ट्रियल फ्रॉड इसे और अधिक खतरनाक बनाते हैं। आइए समझते हैं कि यह स्कैम कैसे काम करता है? हाल में कौन-सी घटनाएं सामने आई हैं और आप ऐसे स्कैम से स्वयं को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं?
झारखंड के जामताड़ा जिले को साइबर फ्रॉड का गढ़ माना जाता है। हाल ही में पुलिस ने 'Ease My Deal' नामक एक ऐप के जरिए नकली कैशबैक का झांसा देकर लोगों को ठगने वाले 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों ने लोगों को 1,999 रुपये का कैशबैक देने का वादा करके फंसाया था। इसी तरह, जुलाई 2026 में पुलिस ने एक और गिरोह पकड़ा, जिसने 'PhonePe' के नाम पर कैशबैक का झांसा देकर लोगों से उनके बैंक कार्ड, CVV, OTP जैसी संवेदनशील जानकारी हासिल की थी। इस मामले में 9 लोग गिरफ्तार किए गए और 27 मोबाइल फोन तथा 39 सिम कार्ड जब्त किए गए। ये घटनाएं दिखाती हैं कि कैशबैक स्कैम अब व्यक्तिगत ठगी नहीं, बल्कि संगठित गिरोहों द्वारा बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर कैशबैक, रिटर्न, रेफरल जैसी सुविधाओं का दुरुपयोग हो रहा है। अब ठगी करने वाले गिरोह ‘डिवाइस फार्मिंग’ के जरिए एक ही समय में कई अकाउंट्स से फ्रॉड कर रहे हैं। यह स्कैम जामताड़ा जैसी शैली में होते हैं, लेकिन ठगी का तरीका तकनीकी रूप से और भी संगठित हो चुका है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल फ्रॉड से बचाव के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यदि बैंक की गलती या थर्ड-पार्टी ब्रीच के कारण फ्रॉड हुआ है और ग्राहक की कोई गलती नहीं है, तो ग्राहक को 5 दिनों के भीतर बैंक को रिपोर्ट करने पर पूरा पैसा वापस मिल सकता है। ठगी के बाद 4 से 7 दिनों की देरी पर ग्राहक की जिम्मेदारी सीमित होती है।