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कैशबैक स्कैम से लोगों को कैसे चूना लगा रहे अपराधी? जानें ठगी से बचने के लिए उपाय और RBI के नियम

क्या आप जानते हैं कि कैशबैक का लालच आपको ठगी के जाल में फंसा सकता है? ऑनलाइन शॉपिंग करते समय सावधान रहें, क्योंकि संगठित गिरोह अब आपके पैसे चुराने के लिए नए तरीके इजाद कर रहे हैं।
3 min read
Aug 12, 2026
avoid cashback scams
सांकेतिक इमेज (सोर्स- AI)

ऑनलाइन शॉपिंग और डिजिटल पेमेंट्स के बढ़ते चलन के साथ ‘कैशबैक स्कैम’ यानी नकली कैशबैक का जाल भी तेजी से फैल रहा है। यह स्कैम केवल झांसा देने वाला नहीं है, बल्कि संगठित गिरोहों द्वारा बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। कैशबैक स्कैम अब केवल व्यक्तिगत ठगी नहीं, बल्कि तकनीकी और संगठित गिरोहों द्वारा किया जाने वाला अपराध बन चुका है। झारखंड के जामताड़ा जिले में ठगी के नेटवर्क और ई-कॉमर्स पर इंडस्ट्रियल फ्रॉड इसे और अधिक खतरनाक बनाते हैं। आइए समझते हैं कि यह स्कैम कैसे काम करता है? हाल में कौन-सी घटनाएं सामने आई हैं और आप ऐसे स्कैम से स्वयं को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं?

जामताड़ा से फैला नेटवर्क

झारखंड के जामताड़ा जिले को साइबर फ्रॉड का गढ़ माना जाता है। हाल ही में पुलिस ने 'Ease My Deal' नामक एक ऐप के जरिए नकली कैशबैक का झांसा देकर लोगों को ठगने वाले 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों ने लोगों को 1,999 रुपये का कैशबैक देने का वादा करके फंसाया था। इसी तरह, जुलाई 2026 में पुलिस ने एक और गिरोह पकड़ा, जिसने 'PhonePe' के नाम पर कैशबैक का झांसा देकर लोगों से उनके बैंक कार्ड, CVV, OTP जैसी संवेदनशील जानकारी हासिल की थी। इस मामले में 9 लोग गिरफ्तार किए गए और 27 मोबाइल फोन तथा 39 सिम कार्ड जब्त किए गए। ये घटनाएं दिखाती हैं कि कैशबैक स्कैम अब व्यक्तिगत ठगी नहीं, बल्कि संगठित गिरोहों द्वारा बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

E-कॉमर्स पर इंडस्ट्रियल फ्रॉड

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर कैशबैक, रिटर्न, रेफरल जैसी सुविधाओं का दुरुपयोग हो रहा है। अब ठगी करने वाले गिरोह ‘डिवाइस फार्मिंग’ के जरिए एक ही समय में कई अकाउंट्स से फ्रॉड कर रहे हैं। यह स्कैम जामताड़ा जैसी शैली में होते हैं, लेकिन ठगी का तरीका तकनीकी रूप से और भी संगठित हो चुका है।

कैशबैक स्कैम से ठगी का तरीका

  • ठगी करने के लिए स्कैमर्स आमतौर पर आकर्षक कैशबैक ऑफर दिखाते हैं, फिर OTP, CVV, कार्ड नंबर जैसी जानकारी देने के लिए कहते हैं।
  • अपराधी, कभी-कभी रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल करवाकर आपके फोन का नियंत्रण ले लेते हैं।
  • कुछ मामलों में फर्जी कस्टमर केयर या बैंक अधिकारी बनकर डराया-धमकाया जाता है। इन सबका उद्देश्य आपके खाते से पैसे निकालना या आपकी जानकारी चुराना होता है।

RBI का सुरक्षा कवच

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल फ्रॉड से बचाव के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यदि बैंक की गलती या थर्ड-पार्टी ब्रीच के कारण फ्रॉड हुआ है और ग्राहक की कोई गलती नहीं है, तो ग्राहक को 5 दिनों के भीतर बैंक को रिपोर्ट करने पर पूरा पैसा वापस मिल सकता है। ठगी के बाद 4 से 7 दिनों की देरी पर ग्राहक की जिम्मेदारी सीमित होती है।

  • RBI ने 'Zero Liability' नियम भी लागू किया है, जिसके तहत ग्राहक की लापरवाही न होने पर बैंक को नुकसान भुगतना होगा।
  • RBI की की जागरूकता मुहिम और 'BE(A)WARE' जैसी बुकलेट्स आम लोगों को फ्रॉड की जानकारी और बचाव के उपाय बताती हैं।
  • मार्च 2026 में RBI ने अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन पर मुआवजे का ढांचा और AI आधारित फ्रॉड विश्लेषण को मजबूत करने वाले संशोधित निर्देश जारी किए।

बचाव के लिए व्यावहारिक कदम

  • किसी भी ऑफर को तुरंत भरोसेमंद न मानें, विशेषकर जब वह बहुत आकर्षक लगे।
  • OTP, CVV, PIN जैसी जानकारी किसी के साथ साझा न करें, चाहे दूसरा व्यक्ति खुद को बैंक या कस्टमर केयर का ही क्यों न बताए।
  • संदिग्ध लिंक या रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल न करें।
  • लेन-देन की रसीद, स्क्रीनशॉट और SMS/ईमेल की कॉपी संभालकर रखें।
  • फ्रॉड होते ही बैंक को तुरंत रिपोर्ट करें और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
  • यदि बैंक कार्रवाई न करे तो RBI Ombudsman या उपभोक्ता फोरम से संपर्क करें।डिजिटल जागरूकता बढ़ाने वाले RBI के अभियान और बुकलेट्स पढ़ें और दूसरों को भी बताएं।

फ्रॉड होने पर क्या करें?

  • बैंक को तुरंत लिखित शिकायत करें।
  • साइबर क्राइम पोर्टल पर FIR दर्ज कराएं।
  • RBI Ombudsman के पास शिकायत भेजें।
  • यदि बैंक की लापरवाही साबित होती है, तो 'Zero Liability' नियम के तहत पैसा वापस मिल सकता है।
Updated on:
12 Aug 2026 05:13 pm
Published on:
12 Aug 2026 05:13 pm