
Tomato Farming Changed Farmers Fortune: टमाटर की खेती ने कई किसानों की किस्मत बदल दी है। कुछ ने करोड़ों की कमाई की, तो कुछ ने आधुनिक तकनीकों से अपनी आमदनी दोगुनी कर ली। आइए जानते हैं उन किसानों की असली कहानी, जो टमाटर से अमीर बने, और इससे हमें क्या सीख मिलती है।
महाराष्ट्र के पुणे जिले की जुन्नर तहसील के ईश्वर गायकर ने 12 एकड़ में टमाटर की खेती कर इस साल तक लगभग 2.8 करोड़ रुपए कमाए हैं। उन्होंने अब तक 17,000 पेटी टमाटर बेचे, जिनकी कीमत प्रति पेटी 770 से 2,311 रुपए तक रही। अभी उनके पास 3,000-4,000 पेटी स्टॉक है, जिससे उनकी कुल कमाई 3.5 करोड़ रुपए तक पहुंचने की संभावना है।
इसी क्षेत्र के एक अन्य किसान, तुकाराम भागोजी गायकर ने महज एक महीने में टमाटर बेचकर 1.25 करोड़ की कमाई की। उधर तेलंगाना के मेडक जिले में महिपाल रेड्डी ने टमाटर बेचकर 1.8 करोड़ रुपए कमाए, जबकि पी. रघुनंदन ने तीन एकड़ से 80 लाख रुपए की कमाई की।
आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के मुरली ने केवल डेढ़ महीने में ही टमाटर बेचकर 4 करोड़ रुपए कमाए। इसमें 2 करोड़ का शुद्ध मुनाफा भी शामिल है। वहीं मध्य प्रदेश के अमित जैन ने हाइब्रिड टमाटर, ड्रिप सिंचाई और स्मार्ट खेती अपनाकर सालाना 7-8 करोड़ की आमदनी बनाई है।
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में किसान हिमशिखर किस्म के बेलदार टमाटर उगा रहे हैं। एक किसान ने बताया कि एक बार टमाटर बेचने पर लगभग 8,000 रुपए की आमदनी होती है। सप्ताह में तीन बार तुड़ाई से लगभग 24,000 रुपए और पांच महीने में लगभग 4.8 लाख रुपए की वार्षिक आमदनी हो रही है।
सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) के बाबूलाल मौर्य ने ICAR‑IIVR की तकनीक अपनाकर 500 वर्ग मीटर पॉलीहाउस में दो‑स्टेम ट्रेनिंग और ड्रिप सिंचाई से 13,040 खर्च कर 59,875 की कुल कमाई की। इससे उन्हें 46,835 का शुद्ध लाभ हुआ।
इन कहानियों में सफलता का आधार केवल कीमतों में उछाल नहीं, बल्कि आधुनिक खेती की तकनीक, सही किस्मों का चयन और बाजार की समझ भी है।
इनमें से कुछ उदाहरण बड़े पैमाने पर खेती करने वाले किसानों के हैं, लेकिन उन्नाव के किसान जैसे छोटे किसान भी तकनीक अपनाकर अच्छी आमदनी पा रहे हैं। यह कहानी बताती है कि पॉलीहाउस जैसी संरक्षित खेती छोटे निवेश में भी लाभ दे सकती है।
इन सफल किसानों की कहानी हमें सिखाती है-
सरपंच, पंचायत और कृषि विभाग को चाहिए कि वे इन सफल किसानों की कहानियों को गांव‑गांव तक पहुंचाएं। किसान मेलों, प्रशिक्षण शिविरों और डेमो फार्म के जरिए आधुनिक तकनीक सीखी जा सकती है। साथ ही, सरकार की योजनाओं जैसे Operation Greens और MIDH के तहत मिलने वाली सब्सिडी और सहायता का लाभ उठाना चाहिए।
टमाटर की खेती से अमीर बनने की यह कहानी सिर्फ कुछ किसानों की नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण भारत के लिए प्रेरणा है। अगर पंचायत-सरपंच मिलकर किसानों को तकनीकी मदद, बाजार से जुड़ाव और प्रशिक्षण दें, तो टमाटर ही नहीं, कई अन्य फसलों से भी उनकी आमदनी और मुनाफा दोनों बढ़ सकते हैं।