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घर की रसोई का धुआं फेफड़ों तक ही नहीं, दिल तक पहुंच रहा है? खाना पकाने की रोज की आदत पर नई चिंता

Kitchen smoke harmful for heart: गैस चूल्हे पर खाना पकाते समय निकलने वाले पीएम 2.5 और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषक बंद रसोई में जमा हो सकते हैं। लंबे समय तक संपर्क खासकर उन लोगों के लिए चिंता का विषय है जो रोज कई घंटे रसोई में बिताते हैं।
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 20, 2026

Kitchen Smoke harmful not just lungs heart too be alert

Kitchen Smoke harmful not just lungs heart too be alert: किचन का धुंआ लंग्स के लिए ही नहीं आपके दिल को भी नुकसान पहुंचा सकता है। (AI creative)

Kitchen smoke harmful for heart: रसोई को घर का सबसे सुरक्षित हिस्सा माना जाता है, लेकिन खाना पकाने के दौरान पैदा होने वाला प्रदूषण इसे कुछ समय के लिए घर का सबसे प्रदूषित स्थान भी बना सकता है। खासकर गैस चूल्हे पर खाना बनाते समय केवल धुआं ही समस्या नहीं है। दहन की प्रक्रिया से नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂), कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य प्रदूषक निकल सकते हैं, जबकि तलने और तेज आंच पर पकाने से PM2.5 जैसे बेहद छोटे कण हवा में बढ़ सकते हैं।

इसका मतलब यह नहीं कि गैस पर खाना बनाने वाला हर व्यक्ति बीमार हो जाएगा। लेकिन रोजाना लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने और रसोई में पर्याप्त वेंटिलेशन न होने पर जोखिम बढ़ सकता है।

आंखों से दिखाई नहीं देता सबसे बड़ा खतरा

PM2.5 इतने छोटे कण होते हैं कि सांस के साथ फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं। वहीं NO₂ श्वसन तंत्र में जलन और सूजन से जुड़ा प्रदूषक है। 2025 की एक समीक्षा में PM2.5 सहित वायु प्रदूषकों के हृदय पर प्रभाव के संभावित रास्तों में ऑक्सीडेटिव तनाव, सूजन, रक्त वाहिकाओं के भीतर की परत में खराबी और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र में बदलाव को शामिल किया गया है।

यही वह बिंदु है जहां, रसोई का प्रदूषण केवल 'फेफड़ों की समस्या' नहीं रह जाता। लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क और हृदय-रक्तवाहिका संबंधी बीमारियों के बीच संबंध पर वैज्ञानिक प्रमाण लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि, किसी एक घर में गैस चूल्हे के इस्तेमाल को सीधे हृदय रोग का कारण बताना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।

गैस चूल्हे पर NO₂ क्यों बढ़ता है?

गैस के जलने पर नाइट्रोजन ऑक्साइड बन सकते हैं। समस्या तब बढ़ती है जब रसोई छोटी हो, खिड़कियां बंद हों और धुआं बाहर निकालने की व्यवस्था कमजोर हो।

2025 में 18 गैस-चूल्हे वाले घरों में किए गए एक अध्ययन में पीएम2.5, NO₂, कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड को मापा गया। शोध का उद्देश्य यह समझना था कि खाना पकाने के दौरान इन प्रदूषकों का स्तर किस तरह बदलता है।

2025 में प्रकाशित अन्य रिपोर्टों में भी गैस से खाना पकाने के दौरान घर के भीतर NO₂ और कण प्रदूषण बढ़ने की बात सामने आई। एक घर में किए गए विस्तृत मॉनिटरिंग प्रयोग में खाना पकाने के समय प्रदूषण में स्पष्ट वृद्धि देखी गई और पर्याप्त वेंटिलेशन न होने पर NO₂ बाहर की तुलना में कई गुना अधिक पाया गया।

भारतीय घरों में चिंता कुछ अलग क्यों है?

भारत में बड़ी संख्या में परिवार एलपीजी का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन सभी रसोई एक जैसी नहीं होतीं। कई घरों में रसोई छोटी होती है, खिड़की सीमित होती है या चिमनी केवल हवा को घुमाती है, बाहर नहीं निकालती।

2025 में भारत के घरेलू वातावरण पर हुए एक अध्ययन के आधार पर देश में घर के अंदर की वायु गुणवत्ता को मापने के लिए भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप इंडोर एयर क्वालिटी इंडेक्स विकसित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई। इसमें खाना पकाने जैसी रोजमर्रा की गतिविधियों से PM2.5 और पीएम10 में तेज बढ़ोतरी तथा खराब वेंटिलेशन के कारण प्रदूषकों के जमा होने की समस्या पर ध्यान दिया गया।

इसका सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जो रसोई में रोज कई घंटे बिताते हैं। भारतीय परिवारों में खाना बनाने की जिम्मेदारी अब भी कई घरों में मुख्य रूप से महिलाओं के हिस्से आती है। इसलिए रसोई के प्रदूषण की चर्चा करते समय महिलाओं के लंबे समय के संपर्क को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सिर्फ खिड़की खोलना कितना मददगार?

सबसे आसान उपाय है खाना बनाते समय क्रॉस-वेंटिलेशन यानी हवा के आने-जाने का रास्ता बनाना। खिड़की या दरवाजा खोलना, एग्जॉस्ट या ऐसी चिमनी इस्तेमाल करना जो हवा को बाहर निकालती हो, प्रदूषकों के जमाव को कम कर सकता है।

सिर्फ रीसर्कुलेशन वाली हुड हवा को बाहर नहीं निकालती, इसलिए उसकी भूमिका सीमित हो सकती है। खाना पकाते समय ढक्कन का इस्तेमाल, तेज आंच पर अनावश्यक देर तक खाना न पकाना और संभव हो तो कम प्रदूषण वाले विद्युत उपकरणों का इस्तेमाल भी संपर्क घटा सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक घरेलू वायु प्रदूषण आज भी वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है और प्रदूषणकारी ईंधनों के इस्तेमाल से हर साल लाखों समयपूर्व मौतों का संबंध जुड़ा है।

यह जानकारी आपकी जागरूकता के लिए दी गई है, इसे जानकर रसोई छोड़ने की जरूरत नहीं, लेकिन उसकी हवा को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं। गैस चूल्हे पर खाना बनाते समय कुछ मिनट की सावधानी, बाहर की ओर निकासी, बेहतर वेंटिलेशन और कम धुआं पैदा करने वाली खाना पकाने की तकनीक। रोजाना होने वाले प्रदूषक संपर्क को कम करने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम हो सकती है। तो इस महत्वपूर्ण जानकारी के बाद आप क्या आप भी करने वाली हैं कुछ जरूरी बदलाव? अगर हां तो कमेंट करके जरूर बताएं।