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टमाटर की खेती से किस्मत चमकाने वाले किसानों की कहानी, क्या आप भी सीखेंगे?

Tomato Farming Changed Farmers Fortune: क्या आपने कभी सोचा है कि एक साधारण सा टमाटर कैसे बदल सकता है किसी किसान की किस्मत? जानिए उन किसानों की रोचक कहानियां, जिन्होंने टमाटर की खेती से करोड़ों कमाए और क्या सीख सकते हैं हम उनसे!
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 20, 2026

Tomato Farming Changed Farmers Fortune

Tomato Farming Changed Farmers Fortune: टमाटर की खेती से किसानों ने बदल दी किस्मत, कमाई लाखों करोड़ों में, जानिए कैसेय़ (patrika creative)

Tomato Farming Changed Farmers Fortune: टमाटर की खेती ने कई किसानों की किस्मत बदल दी है। कुछ ने करोड़ों की कमाई की, तो कुछ ने आधुनिक तकनीकों से अपनी आमदनी दोगुनी कर ली। आइए जानते हैं उन किसानों की असली कहानी, जो टमाटर से अमीर बने, और इससे हमें क्या सीख मिलती है।

एक नजर में जानिए टमाटर से बढ़ी आमदनी

महाराष्ट्र के पुणे जिले की जुन्नर तहसील के ईश्वर गायकर ने 12 एकड़ में टमाटर की खेती कर इस साल तक लगभग 2.8 करोड़ रुपए कमाए हैं। उन्होंने अब तक 17,000 पेटी टमाटर बेचे, जिनकी कीमत प्रति पेटी 770 से 2,311 रुपए तक रही। अभी उनके पास 3,000-4,000 पेटी स्टॉक है, जिससे उनकी कुल कमाई 3.5 करोड़ रुपए तक पहुंचने की संभावना है।

इसी क्षेत्र के एक अन्य किसान, तुकाराम भागोजी गायकर ने महज एक महीने में टमाटर बेचकर 1.25 करोड़ की कमाई की। उधर तेलंगाना के मेडक जिले में महिपाल रेड्डी ने टमाटर बेचकर 1.8 करोड़ रुपए कमाए, जबकि पी. रघुनंदन ने तीन एकड़ से 80 लाख रुपए की कमाई की।

आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के मुरली ने केवल डेढ़ महीने में ही टमाटर बेचकर 4 करोड़ रुपए कमाए। इसमें 2 करोड़ का शुद्ध मुनाफा भी शामिल है। वहीं मध्य प्रदेश के अमित जैन ने हाइब्रिड टमाटर, ड्रिप सिंचाई और स्मार्ट खेती अपनाकर सालाना 7-8 करोड़ की आमदनी बनाई है।

छोटे स्तर पर भी सफलता

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में किसान हिमशिखर किस्म के बेलदार टमाटर उगा रहे हैं। एक किसान ने बताया कि एक बार टमाटर बेचने पर लगभग 8,000 रुपए की आमदनी होती है। सप्ताह में तीन बार तुड़ाई से लगभग 24,000 रुपए और पांच महीने में लगभग 4.8 लाख रुपए की वार्षिक आमदनी हो रही है।

वैज्ञानिक खेती ने भी खिलाए चेहरे

सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) के बाबूलाल मौर्य ने ICAR‑IIVR की तकनीक अपनाकर 500 वर्ग मीटर पॉलीहाउस में दो‑स्टेम ट्रेनिंग और ड्रिप सिंचाई से 13,040 खर्च कर 59,875 की कुल कमाई की। इससे उन्हें 46,835 का शुद्ध लाभ हुआ।

क्या यह सिर्फ किस्मत है?

इन कहानियों में सफलता का आधार केवल कीमतों में उछाल नहीं, बल्कि आधुनिक खेती की तकनीक, सही किस्मों का चयन और बाजार की समझ भी है।

इसे ऐसे समझें

  • ईश्वर गायकर ने पिछले नुकसान के बावजूद हार नहीं मानी और लगातार छह-सात साल टमाटर की खेती की और इस साल उन्होंने अपनी पिछली हार को सफलता की कहानी में बदल दिया।
  • अमित जैन ने खेती को व्यवसाय की तरह देखा और ट्रैक्टर व्यापार से शुरू कर कृषि व्यवसाय में कदम रखा।
  • बाबूलाल मौर्य ने वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर छोटे निवेश में बेहतर गुणवत्ता और लाभ पाया।

क्या यह सबके लिए संभव है?

इनमें से कुछ उदाहरण बड़े पैमाने पर खेती करने वाले किसानों के हैं, लेकिन उन्नाव के किसान जैसे छोटे किसान भी तकनीक अपनाकर अच्छी आमदनी पा रहे हैं। यह कहानी बताती है कि पॉलीहाउस जैसी संरक्षित खेती छोटे निवेश में भी लाभ दे सकती है।

सीख और आगे का रास्ता

इन सफल किसानों की कहानी हमें सिखाती है-

  • आधुनिक तकनीक (ड्रिप सिंचाई, पॉलीहाउस, हाइब्रिड बीज) अपनाने से लागत कम और उपज बढ़ सकती है।
  • बाजार की समझ- कब बेचें, किस कीमत पर बेचें- इससे मुनाफा तय होता है।
  • लगातार प्रयास और जोखिम उठाने की हिम्मत सफलता की कुंजी है।
  • छोटे किसान भी सही तकनीक और मेहनत से अच्छी आमदनी कर सकते हैं।

अब आगे क्या?

सरपंच, पंचायत और कृषि विभाग को चाहिए कि वे इन सफल किसानों की कहानियों को गांव‑गांव तक पहुंचाएं। किसान मेलों, प्रशिक्षण शिविरों और डेमो फार्म के जरिए आधुनिक तकनीक सीखी जा सकती है। साथ ही, सरकार की योजनाओं जैसे Operation Greens और MIDH के तहत मिलने वाली सब्सिडी और सहायता का लाभ उठाना चाहिए।

टमाटर की खेती से अमीर बनने की यह कहानी सिर्फ कुछ किसानों की नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण भारत के लिए प्रेरणा है। अगर पंचायत-सरपंच मिलकर किसानों को तकनीकी मदद, बाजार से जुड़ाव और प्रशिक्षण दें, तो टमाटर ही नहीं, कई अन्य फसलों से भी उनकी आमदनी और मुनाफा दोनों बढ़ सकते हैं।