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पेड़ लगाए, फिर भी गर्मी क्यों बढ़ी? 138 भारतीय शहरों की रिसर्च में हरियाली का नया सच उजागर

Urban greening heat: शहरों को ठंडा करने के लिए पेड़-पौधे लगाने की सलाह आम है, लेकिन 2026 की एक नई भारतीय रिसर्च बताती है कि गर्म और नम शहरों में बहुत घनी हरियाली कुछ परिस्थितियों में तापमान कम करने के बावजूद इंसान को महसूस होने वाली गर्मी बढ़ा सकती है। जानिए शहरों में हरियाली का नया सच
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 20, 2026

Urban Greening Heat Paradox

Urban Greening Heat Paradox: गर्मी से बचने पेड़ लगाने जरूरी, अगर आप भी यही मानते हैं, तो अब बदलें धारणा, पेड़ जरूरी लेकिन शहर की आबोहवा को देखकर बदलना होगा हरियाली बढ़ाने का तरीका। (AI Creative)

Urban greening heat: हरियाली हमेशा ठंडक की गारंटी नहीं है। 138 भारतीय शहरों के 2003 से 2020 तक के आंकड़ों पर आधारित नई रिसर्च ने बताया कि पेड़ों की घनी छतरी, नमी और हवा के कमजोर प्रवाह का मेल कुछ शहरों में हीट इंडेक्स बढ़ा सकता है।

गर्मी बढ़ते ही शहरों में सबसे पहले एक ही समाधान सुझाया जाता है, ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाइए। पेड़ छाया देते हैं, जमीन और आसपास की सतहों को ठंडा करते हैं और वातावरण में नमी के प्राकृतिक चक्र का हिस्सा हैं। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस बेहद लोकप्रिय समाधान की एक ऐसी पेचीदगी सामने रखी है, जिस पर शहरों की योजना बनाते समय कम ध्यान दिया गया है।

2026 में नेचर कम्यूनिकेशन (Nature Communications) में प्रकाशित एक अध्ययन ने 138 भारतीय शहरों का विश्लेषण किया और पाया कि हरियाली का गर्मी पर असर शहर की जलवायु, वनस्पति की संरचना और स्थानीय हवा की आवाजाही पर निर्भर करता है। खासकर नम और आर्द्र शहरों में बहुत घनी पेड़ों की छतरी कुछ परिस्थितियों में हीट इंडेक्स बढ़ाने से जुड़ी मिली।

थर्मामीटर कुछ और, शरीर को गर्मी कुछ और

इस रिसर्च को समझने के लिए हीट इंडेक्स को समझना जरूरी है। सिर्फ तापमान यह नहीं बताता कि इंसान को वास्तव में कितनी गर्मी महसूस हो रही है। हवा में नमी बढ़ने पर शरीर के पसीने को वाष्पित होने में कठिनाई होती है और गर्मी ज्यादा महसूस हो सकती है। यही कारण है कि शोधकर्ताओं ने केवल तापमान नहीं, बल्कि तापमान और आर्द्रता को मिलाकर हीट इंडेक्स का अध्ययन किया।

अध्ययन में 2003 से 2020 तक के आंकड़ों के आधार पर भारतीय शहरों में गर्मी के इस अनुभव को देखा गया। शोधकर्ताओं ने उपग्रह आंकड़ों, मौसम संबंधी पुनर्विश्लेषण आंकड़ों और मशीन-लर्निंग आधारित मॉडल का इस्तेमाल करके वनस्पति और शहरी संरचना के बीच संबंधों को समझा।

पेड़ गर्मी घटाते कैसे हैं?

पेड़ दो बड़े तरीकों से शहर को राहत देते हैं। पहली है छाया। पेड़ों की छतरी सूरज की सीधी किरणों को सड़कों, दीवारों और दूसरी गर्म सतहों तक पहुंचने से रोकती है।

दूसरा तरीका है वाष्पोत्सर्जन। पेड़ अपनी पत्तियों के माध्यम से पानी छोड़ते हैं। इस प्रक्रिया में ऊर्जा खर्च होती है और आसपास का तापीय वातावरण प्रभावित होता है। लेकिन यहीं कहानी पलट भी सकती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि, अगर वातावरण पहले से बहुत नम है और हवा की आवाजाही कमजोर है, तो पेड़ों से निकलने वाली अतिरिक्त नमी तेजी से फैल नहीं पाती।

नतीजा यह हो सकता है कि हवा अपेक्षाकृत ठंडी होने के बावजूद गर्मी और उमस का एहसास बढ़ जाए। अध्ययन ने इसी तापमान और नमी के संतुलन को हरियाली के प्रभाव को समझने की कुंजी माना है।

यानी पेड़ नुकसान करते हैं?

इस सवाल पर रिपोर्ट कहती है, नहीं। यह इस रिसर्च का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। दरअसल अध्ययन यह नहीं कहता कि पेड़ लगाना बंद कर देना चाहिए या हरियाली शहरों को गर्म करती है।

इसके उलट, शोध में कई परिस्थितियों में अधिक वनस्पति संरचना कम हीट इंडेक्स से जुड़ी मिली। समस्या तब सामने आती है जब हर शहर के लिए एक ही तरह की हरियाली की रणनीति अपनाई जाए।

शोधकर्ताओं ने भारत के 138 शहरों को अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में देखा। इससे पता चलता है कि शुष्क, अर्ध-शुष्क और नम शहरों में पेड़ लगाने की रणनीति एक जैसी नहीं होनी चाहिए।

अब 'कितने पेड़' नहीं, 'कहां और कैसे' यह है बड़ा सवाल

शहरों की हरित नीति में अक्सर लक्ष्य तय होता है कि, इतने पेड़ लगाए जाएंगे या इतने प्रतिशत क्षेत्र को हरित बनाया जाएगा। लेकिन नई रिसर्च इस सोच को और बेहतर और बारीकी से गौर करने का संकेत देती है।

पेड़ों के घनत्व, पत्तियों की मात्रा, स्थानीय नमी, इमारतों की बनावट और हवा के रास्ते, इन सभी को एक साथ देखना जरूरी हो सकता है। नेटर इंडिया (Nature India) ने इस शोध को समझाते हुए भी चेतावनी दी कि नम शहरों में बहुत घनी वृक्ष-छतरी कुछ परिस्थितियों में लोगों द्वारा महसूस की जाने वाली गर्मी बढ़ा सकती है।

इसका मतलब भविष्य का सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि 'शहर में कितनी हरियाली है?' बल्कि यह भी होगा कि, 'क्या यह हरियाली उस शहर की जलवायु के हिसाब से सही जगह और सही घनत्व में है?'

यानी अब हमें समझना होगा कि पेड़ शहरों के दुश्मन नहीं, बल्कि गर्मी से लड़ने के सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक साधनों में से एक हैं। लेकिन 2026 की यह रिसर्च एक अहम सबक देती है, प्रकृति को शहर में लाना पर्याप्त नहीं, उसे शहर की जलवायु और हवा की चाल समझकर बसाना भी जरूरी है।