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Bilaspur: जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह की जाति पर आया बड़ा फैसला, छानबीन समिति ने माना अनुसूचित जनजाति

Bilaspur News: उपलब्ध दस्तावेजों, शासकीय अभिलेखों, प्रस्तुत साक्ष्यों और पूरे मामले की जांच के आधार पर अध्यक्ष नम्रता सिंह को अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्र की पात्रता पर सही माना है
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Chhattisgarh news

जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह ( Photo - Patrika )

Chhattisgarh News: मोहला, मानपुर, अंबागढ़ चौकी की जिला पंचायत अध्यक्ष और भाजपा की कद्दावर नेत्री नम्रता सिंह के जाति प्रमाण पत्र पर छानबीन समिति ने अपना फैसला सुनाया है। 19 अगस्त 2026 को जारी आदेश में उपलब्ध दस्तावेजों, शासकीय अभिलेखों, प्रस्तुत साक्ष्यों और पूरे मामले की जांच के आधार पर अध्यक्ष नम्रता सिंह को अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्र की पात्रता पर सही माना है।

Bilaspur News: लगातार उठ रहे थे सवाल

बता दें कि लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों और शिकायतों पर अब उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति के आदेश के बाद यह स्थिति स्पष्ट हो गई है। मामले की जांच शिकायत के आधार पर विजिलेंस सेल को सौंपी गई थी। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच की गई तथा विभिन्न तथ्यों पर समिति ने विचार किया। आदेश में समिति ने विभिन्न शासकीय परिपत्रों, अभिलेखों और न्यायालयीन निर्णयों का भी उल्लेख किया है। विशेष रूप से आदेश में वर्ष 1998 के मध्यप्रदेश शासन के परिपत्र तथा छत्तीसगढ़ शासन के वर्ष 2002 के परिपत्र का उल्लेख करते हुए उनके प्रभाव पर विचार किया गया है।

गोंड, अनुसूचित जनजाति

समिति के आदेश का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि, उपरोक्त परिपत्रों दस्तावेजों/अभिलेखों, उपलब्ध साक्ष्यों व गुण-दोष के आधार पर जाति प्रमाण पत्र धारक नम्रता सिंह को छत्तीसगढ़ राज्य में गोंड, अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्र की पात्रता आती है। यानी जिस जाति प्रमाण पत्र को लेकर लंबे समय से विवाद और सवाल खड़े किए जा रहे थे, उस पर उच्च स्तरीय छानबीन के बाद समिति ने उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर नम्रता सिंह की गोंड अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्र की पात्रता को स्वीकार किया है।

जांच के बाद आधिकारिक आदेश जारी

यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल किसी राजनीतिक बयान या सोशल मीडिया दावे पर आधारित नहीं, बल्कि शासकीय स्तर पर गठित उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति द्वारा की गई जांच के बाद जारी आधिकारिक आदेश है। अब इस फैसले के बाद नम्रता सिंह के जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रही बहस को एक महत्वपूर्ण आधिकारिक आधार मिल गया है।