
जेल में कैदी की मौत पर हाई कोर्ट सख्त (photo source- Patrika)
Custodial Death Case: छत्तीसगढ़ में न्यायिक अभिरक्षा के दौरान एक कैदी की मौत के मामले को हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। जेल में बंद आरोपी के पोस्टमार्टम के दौरान शरीर पर 35 चोटों के निशान मिलने के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अधिकारियों से स्पष्ट करने को कहा है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के मामले में जेल में बंद आरोपी की किन परिस्थितियों में मौत हुई। साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज 35 चोटों के निशानों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने हिरासत में हिंसा और मौत की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि हिरासत में मौजूद व्यक्ति पूरी तरह असहाय स्थिति में होता है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य के अधिकारियों की होती है। ऐसी परिस्थितियों में होने वाली हिंसा कानून के शासन की भावना के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि लॉकअप या जेल की चारदीवारी के भीतर व्यक्ति बाहरी दुनिया से काफी हद तक अलग होता है। ऐसे में वर्दी और अधिकार की आड़ में किसी भी तरह की हिंसा बेहद गंभीर विषय है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के लहरा बाई तामरे बनाम छत्तीसगढ़ शासन मामले का भी उल्लेख किया गया। कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में मौत की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया था। साथ ही पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश भी दिया गया था। इस संदर्भ का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने हिरासत में होने वाली हिंसा और मौत की घटनाओं को गंभीर चिंता का विषय माना।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि मृतक के परिवार को 7.50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। जिला जेल महासमुंद के सहायक जेल अधीक्षक की 21 सितंबर 2025 की सूचना के अनुसार, यह राशि 20 सितंबर 2025 को परिवार को भुगतान की गई थी। हालांकि, मुआवजा दिए जाने के बावजूद हाई कोर्ट ने मौत की परिस्थितियों पर विस्तृत जवाब मांगना जरूरी समझा। कोर्ट ने खास तौर पर पोस्टमार्टम में सामने आए 35 चोटों के निशानों को लेकर राज्य के शीर्ष अधिकारियों से जवाब मांगा है।
डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव और डीजीपी को व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। शपथ पत्र में यह स्पष्ट करना होगा कि धारा 302 के मामले में जेल में निरुद्ध आरोपी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसके शरीर पर पोस्टमार्टम के दौरान 35 चोटों के निशान कैसे पाए गए। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को होगी। तब तक मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को कोर्ट के निर्देश के अनुसार अपना व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करना होगा।
Updated on:
20 Aug 2026 01:17 pm
Published on:
20 Aug 2026 01:17 pm
