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सीवर में छिपा है अगली बड़ी बीमारी का संकेत? भारत के शहरों में मिला चौंकाने वाला वैज्ञानिक सबूत

Antimicrobial Resistance India: भारत के चार महानगरों में 447 सीवर सैंपलों की जांच में एंटीमाइक्रोबायल रेजिस्टेंस जीन्स और जटिल माइक्रोबायल कम्यूनिटीज के संकेत भी, जानिए क्या वेस्टवॉटर सर्विलेंस भविष्य के स्वास्थ्य संकटों की शुरुआती चेतावनी बन सकता है? नया खतरा बताती रिपोर्ट
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Aug 08, 2026
Antimicrobial Resistance India
Antimicrobial Resistance India: AI Creative

Antimicrobial Resistance India: भारत में एंटीबायोटिक दवाओं के असर को लेकर चिंता लंबे समय से बढ़ रही है। जब बैक्टीरिया दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध विकसित कर लेते हैं तो सामान्य संक्रमणों का इलाज भी मुश्किल हो सकता है। लेकिन इस संकट को समझने के लिए हमेशा अस्पताल के मरीजों के आंकड़ों का इंतजार करना जरूरी नहीं है।

वैज्ञानिकों का एक तेजी से विकसित होता तरीका है, वेस्ट वॉटर सर्विलेंस, यानी सीवर और गंदे पानी की वैज्ञानिक जांच। हमारे शहरों से हर दिन निकलने वाला वेस्ट पानी केवल घरेलू और औद्योगिक कचरा नहीं है। इसमें इंसानों, जानवरों और पर्यावरण से निकलने वाले सूक्ष्मजीवों तथा उनके जेनेटिक मटेरियल के संकेत भी मौजूद हो सकते हैं। इसी वजह से वेस्ट वॉटर को किसी शहर की सामूहिक माइक्रोबायल हेल्थ की एक तरह की खिड़की माना जा रहा है। भारत में किए गए एक नए अध्ययन ने इस संभावना को और गंभीर बना दिया है।

447 सीवर सैंपल में क्या मिला?

2026 में नेचर कम्युनिकेशन में प्रकाशित एक अध्ययन ने भारत के चार महानगरीय शहरों में वेस्ट वॉटर रिजिस्टॉम और माइक्रोबायोम का अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने 2022 से 2024 के बीच 19 सैंपल साइट से 447 वेस्ट वॉटर सैंपल लिए। इन नमूनों का मेटाजिनोमिक विश्लेषण किया गया। इसका मतलब यह है कि वैज्ञानिकों ने केवल पहले से पहचाने गए किसी एक बैक्टीरिया की तलाश नहीं की, बल्कि नमूने में मौजूद माइक्रोबायल DNA और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से जुड़े जेनेटिक सिग्नेचर का व्यापक विश्लेषण किया।

अध्ययन में एंटीमाइक्रोबायल रेजिस्टेंस जीन्स यानी ARGs और मोबाइल जेनेटिक एलिमेंट्स की व्यापक मौजूदगी पाई गई। शोधकर्ताओं ने रिकन्सट्रक्टेड माइक्रोबायल जीनोम्स का भी विश्लेषण किया और पाया कि इनमें 53-70 प्रतिशत तक जीनोम्स संभावित रूप से पहले से वर्णित जीनोम्स से अलग और नए थे।

यह निष्कर्ष अपने आप में यह साबित नहीं करता कि किसी शहर में इतने प्रतिशत नए पेथोजेनिक बैक्टीरिया मौजूद हैं। यह अंतर समझना जरूरी है। शोध का संकेत माइक्रोबायल डायवर्सिटी और जेनेटिक नॉवेल्टी की ओर है न कि यह कि 53-70 प्रतिशत नए रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया मिल गए।

असली खतरा: resistance genes का फैलना

AMR की समस्या केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि कौन-सा बैक्टीरिया मौजूद है। एक महत्वपूर्ण चिंता यह है कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जीन्स एक माइक्रोऑर्गेनिज्म से दूसरे माइक्रोऑर्गेनिज्म तक ट्रांसफर हो सकते हैं। इसके लिए मोबाइल जेनेटिक एलिमेंट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यही वजह है कि वेस्टवॉटर सर्विलेंस में वैज्ञानिक सिर्फ बैक्टीरिया की संख्या नहीं देखते। वे यह भी देखते हैं कि रेजिस्टेंस से जुड़े जीन्स कौन-से हैं और उनके ट्रांसफर की संभावनाएं क्या हैं। भारत के नए अध्ययन में वेस्टवॉटर माइक्रोबायल कम्यूनिटीज में रेजिस्टेंस जीन्स और मोबाइल जेनेटिक एलिमेंट्स की मौजूदगी ने इसी सवाल को महत्वपूर्ण बनाया है।

सीवर से बीमारी की भविष्यवाणी कैसे हो सकती है?

वेस्ट वॉटक सर्विलेंस का विचार बिल्कुल नया नहीं है। किसी शहर के वेस्टवॉटर में एक बड़ी आबादी से आने वाले बायलॉजिकल सिग्नल्स एक साथ मिलते हैं। इसलिए किसी व्यक्तिगत रोगी की पहचान किए बिना आबादी स्तर ट्रेंड्स का पता लगाया जा सकता है। COVID-19 महामारी के दौरान वेस्टवॉटर सर्विलेंस ने इस एप्रोच को को दुनिया भर में व्यापक पहचान दिलाई। SARS-CoV-2 RNA की वेस्ट वॉटर मॉनिटरिंग ने कई जगहों पर संक्रमण के सामुदायिक स्तर के संकेत देने में मदद की।
अब यही तकनीक दूसरे पेथॉजीन्स और AMR सर्विलेंस के लिए भी विकसित की जा रही है।

इसका फायदा यह है कि अस्पताल में मरीज के गंभीर रूप से पहुंचने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय वेस्ट वॉटर मॉनिटरिंग संभावित माइक्रोबायल बदलावों के बारे में पहले संकेत दे सकती है। हालांकि इसे भविष्यवाणी करने वाली अचूक मशीन समझना गलत होगा। वेस्ट वॉटर डेटा को क्लिनिकल सर्विलेंस और एपिडेमिलॉजिकल डेटा के साथ जोड़ना जरूरी है।

भारत के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत दुनिया के सबसे बड़े एंटीबायोटिक कंज्यूमिंग मार्केट्स में शामिल है और एंटीमाक्रोबायल रेजिस्टेंस देश के लिए गंभीर पब्लिक हेल्थ चैलेंज है। जब एंटीबायोटिक का उपयोग ज्यादा होता है तो, बैक्टीरिया पर सेलेक्टिव प्रेशर बढ़ सकता है। कुछ बैक्टिरिया रेजिस्टेंस विकसित कर सकते हैं और अगर रेजिस्टेंस जीन्स पर्यावरण में फैलते हैं तो समस्या और जटिल हो सकती है।

Updated on:
08 Aug 2026 04:52 pm
Published on:
08 Aug 2026 04:52 pm