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तनाव को चुटकियों में दूर कर देगी योग और ध्यान की आदत, सिर्फ 20 मिनट खुद के साथ रहने का आदत बनाइये

Yoga meditation to reduce stress: क्या आप जानते हैं कि सिर्फ 20 मिनट का योग और ध्यान आपके तनाव को चुटकियों में कम कर सकता है? दिनभर की भाग-दौड़, डेडलाइन का दबाव, घर-ऑफिस की जिम्मेदारियां, इन सबके बीच अगर आपका मन भी अक्सर थका-थका सा रहता है, तो यह लेख आपके लिए ही है। हर दिन 20 मिनट आजमाइश का कमाल नई ताजगी और खुशी से भर देगा
4 min read
Aug 24, 2026
Yoga Meditation to reduce stress
Yoga Meditation to reduce stress: हर रोज सिर्फ 20 मिनट खुद के साथ रहने की आदत रखेगी स्ट्रेस से दूर, जानिए कैसे योग और ध्यान आपको रखेगा फ्रेश और कूल? (AI Creative)

Yoga meditation to reduce stress: तनाव से जूझते हुए जीवन की भाग-दौड़ में ध्यान और योग एक शांत, सशक्त सहारा बन सकते हैं। चाहे आप स्टूडेंट हों, कामकाजी महिला या नई मां, इन सरल लेकिन असरदार तरीकों से आप अपने मन और शरीर को फिर से संतुलित कर सकती हैं। बस आपको हर दिन अपने लिए 20 मिनट निकालने होंगे, फिर देखिए कैसे आप खुद को नई ताजगी, नई ऊर्जा और नई खुशी से भरा महसूस करेंगी। आइए जानते हैं तनाव के खिलाफ कैसे काम करता है योग और ध्यान, क्या कहता है WHO?

योग और ध्यान से तनाव क्यों कम होता है

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक, योग, विशेषकर हल्के आसन, श्वास-प्राणायाम और ध्यान, तनाव कम करने, भावनात्मक संतुलन बनाए रखने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है। अमेरिकी राष्ट्रीय पूरक और समग्र स्वास्थ्य केंद्र (NCCIH) की समीक्षा में पाया गया कि योग से तनाव के प्रति हमारी धारणा में सुधार होता है।

2020 की एक समीक्षा में शामिल 12 अध्ययनों में सभी में तनाव में कमी देखी गई। ध्यान और माइंडफुलनेस पर आधारित अभ्यासों ने भी चिंता, अवसाद और नींद की गुणवत्ता में सुधार दिखाया है। इसका बड़ा उदाहरण है, 2022 का एक अध्ययन। इसमें माइंडफुलनेस अभ्यास से तनाव और चिंता में महत्वपूर्ण कमी आई और सूजन से जुड़े कुछ संकेतकों में भी सुधार देखा गया था।

शरीर और मन में क्या असर पड़ता है

योग और ध्यान से शरीर में तनाव से जुड़े रसायन जैसे कोर्टिसोल कम होते हैं और हृदय की धड़कन व रक्तचाप में सुधार होता है। कुछ शोधों में यह भी सामने आया कि योग से सकारात्मक भावनाएं और आत्म-दया बढ़ती है। यह मस्तिष्क के उन हिस्सों को प्रभावित करता है जो, तनाव नियंत्रित करते हैं। ध्यान अभ्यास से मस्तिष्क की संरचना और कार्य में भी बदलाव देखे गए हैं। हालांकि यह क्षेत्र अभी भी शोध का विषय बना हुआ है।

कैसे करें शुरुआत, जानिए एक आसान दिनचर्या

आप हफ्ते में 3-4 बार, सिर्फ 20-30 मिनट निकालकर शुरुआत कर सकते हैं। इस समय में आप इन आसनों को कर सकते हैं-

  • 5-10 मिनट ध्यान या माइंडफुलनेस (सांस पर ध्यान, शरीर की स्कैनिंग)
  • 10-15 मिनट हल्के योग आसन (जैसे ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन)
  • 5-10 मिनट शांत श्वास-प्राणायाम (धीमी गहरी सांस)

2024 के एक यादृच्छिक नियंत्रित अध्ययन में, 8 हफ्तों तक प्रति सप्ताह तीन 45 मिनट के सत्र, एक प्रशिक्षक के साथ और दो घर पर, योग या माइंडफुलनेस मेडिटेशन करने से हृदय की धड़कन में सुधार और तनाव प्रतिक्रिया में कमी देखी गई। यानी बड़े बदलाव के लिए घंटों का समय नहीं, बस नियमितता चाहिए।

सावधानियां भी जरूरी

ध्यान और योग आमतौर पर सुरक्षित हैं, लेकिन कुछ लोगों को चिंता या अवसाद जैसी नकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी हो सकती हैं। एक समीक्षा में करीब 8% प्रतिभागियों ने ऐसा अनुभव बताया। अगर आप मानसिक रूप से अस्थिर महसूस करें, तो किसी प्रशिक्षित चिकित्सक या योग विशेषज्ञ से सलाह लें। अगर आप गर्भवती हैं, किसी शारीरिक समस्या से जूझ रही हैं या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कोई स्थिति है, तो पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

आपके लिए इसका क्या मतलब है

  • परीक्षा, काम या परिवार की जिम्मेदारियों से तनाव हो रहा है? एक छोटा ध्यान या योग सत्र तुरंत राहत दे सकता है।
  • नींद खराब हो रही है? नियमित माइंडफुलनेस अभ्यास मददगार हो सकता है।
  • भावनात्मक उतार-चढ़ाव या हल्की चिंता के लिए योग और ध्यान दोनों सहायक हो सकते हैं, लेकिन स्थिति गंभीर हो तो मनोचिकित्सक से जरूर मिलें।

यह जानना भी जरूरी

  • राष्ट्रीय तनाव परीक्षण (2026): 75,000 प्रतिभागियों पर किए गए इस अध्ययन के अनुसार, 18-34 वर्ष की 36.2% महिलाएं 'अत्यधिक उच्च तनाव' श्रेणी में आती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 21.3% है। महिलाओं का औसत तनाव स्कोर (28.5) पुरुषों (25.1) से 12% अधिक है ।
  • लगातार तनाव (2026): 5.35 लाख से अधिक महिलाओं के आंकड़ों से पता चलता है कि हर दूसरी भारतीय महिला पुराने तनाव का शिकार है ।
  • प्रसवकालीन मानसिक स्वास्थ्य: एक समीक्षा के अनुसार, भारत में 14-24% गर्भवती या नई माताएं प्रसवकालीन अवसाद से पीड़ित हैं, जिसकी अक्सर पहचान नहीं हो पाती ।
  • घरेलू हिंसा (NFHS-6): राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार, 18-49 वर्ष की 22.3% विवाहित महिलाओं ने जीवन में कभी न कभी वैवाहिक हिंसा का अनुभव किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 24.4% है, जबकि शहरों में 17.5% ।

आखिर क्यों है ऐसी स्थिति?

  • उम्र का प्रभाव: युवा महिलाएं (18-34 वर्ष) सबसे अधिक तनावग्रस्त हैं। 18-25 वर्ष की लगभग आधी (45%) महिलाएं अत्यधिक उच्च तनाव की रिपोर्ट करती हैं ।
  • भौगोलिक भिन्नता: दिल्ली सबसे तनावग्रस्त शहर है, जबकि राज्यों में पश्चिम बंगाल (52.2%) और तमिलनाडु (50.5%) में तनाव का स्तर सबसे अधिक पाया गया है।
  • इलाज में अंतराल: 70-92% मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोगों को उचित उपचार नहीं मिल पाता। महिलाएं अक्सर पुरुषों की तुलना में देर से पेशेवर मदद लेती हैं ।

पहला कदम आज ही उठाएं

ये आंकड़े सामाजिक अपेक्षाओं, घरेलू हिंसा, देखभाल की जिम्मेदारी और आर्थिक निर्भरता जैसे कारकों को तनाव के मुख्य कारणों के रूप में रेखांकित करते हैं। तो क्यों न आज ही एक छोटा कदम उठाएं, शाम को सिर्फ 10 मिनट के लिए किसी शांत जगह पर बैठकर गहरी सांस लें या कोई सरल आसन करें। धीरे-धीरे इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें। जैसे-जैसे आप सहज होते जाएं, समय बढ़ाएं या किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक से मार्गदर्शन लें। यह एक लंबी यात्रा है, लेकिन हर दिन का छोटा प्रयास आपके मन और शरीर को धीरे-धीरे मजबूत बनाता चला जाएगा। तो क्या आप आज से बना रही हैं चंद मिनट अपने साथ रहनेकी आदत? यदि हां तो कमेंट करके जरूर बताएं।

Updated on:
24 Aug 2026 12:19 pm
Published on:
24 Aug 2026 12:19 pm