तीर्थ यात्रा

भगवान परशुराम के पिता ने यहां किया था घोर तप, माता के इस दरबार में मुस्लिम भी झुकाते हैं सिर

भगवान परशुराम के पिता ने यहां किया था घोर तप, माता के इस दरबार में मुस्लिम भी झुकाते हैं सिर
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May 05, 2019
hinglaj
भगवान परशुराम के पिता ने यहां किया था घोर तप, माता के इस दरबार में मुस्लिम भी झुकाते हैं सिर

आज हम आपको ऐसी शक्तिपीठ के बारे में बताएंगे, जहां हिन्दू तो सिर झुकाते ही हैं, साथ ही वहां मुसलमान भी सिर झुकाकर इबादत करते हैं। यह शक्तिपीठ पाकिस्तान के कब्जे वाले बलूचिस्तान में है। यहां मां हिंगलाज मंदिर में हिंगलाज शक्तिपीठ की प्रतिरूप देवी की प्राचीन दर्शनीय प्रतिमा विराजमान है।

मान्यता के अनुसार, हिंगलाज में ही माता का सिर गिरा था। कहा जाता है कि भगवान राम भी यात्रा के लिए इस सिद्ध पीठ पर आए थे। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, भगवान परशुराम के पिता महर्षि जमदग्रि ने यहां घोर तप किया था। कहा जाता है कि आज भी उनके नाम पर आसाराम नामक स्थान यहां मौजूद है।

यहां आ चुके हैं कई संत-महात्मा

कहा जाता है कि इस प्रसिद्ध मंदिर में माता की पूजा करने को गुरु गोरखनाथ, गुरु नानक देव, दादा मखान जैसे महान आध्यात्मिक संत आ चुके हैं। हिंगलाज माता का मंदिर हिन्दू भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है।

चंद्रकूप पहाड़ पर स्थित है यह मंदिर

हिंगलाज माता का मंदिर हिंगोल नदी और चंद्रकूप पहाड़ पर स्थित है। जब पाकिस्तान का जन्म नहीं हुआ था और भारत की पश्चिमी सीमा अफगानिस्तान और ईरान थी, उस समय हिंगलाज तीर्थ हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ था।

मुसलमान भी करते हैं पूजा

कहा जाता है कि हिन्दू तो यहा पूजा करते ही हैं, इसके साथ ही यहां रहने वाले मुसलमान भी मां हिंगला देवी की पूजा करते थे। बताया जाता है कि मुसलमान उन्हें 'नानी' कहकर बुलाते हैं। यहां आने वाले मुस्लिम भक्त लाल कपड़ा, अगरबत्ती, मोमबत्ती, इत्र आदि चढ़ाते हैं। हिन्दुओं के लिए यह स्थान एक शक्तिपीठ है तो मुसलमानों के लिए यह नानी पीर का स्थान है।

सभी शक्तियां एकत्रित होकर रास रचाती हैं

मान्यता है कि यहां हर रात सभी शक्तियां एकत्रित होकर रास रचाती हैं और दिन निकलते हिंगलाज माता के भीतर समा जाती हैं।

Updated on:
05 May 2019 12:14 pm
Published on:
05 May 2019 12:14 pm