खुलेआम मरीजों की जिंदगी से किया जा रहा खिलवाड़।
पीलीभीत। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज बेहतर इलाज पाने की उम्मीद में अपने गांव शहर के चिकित्सालय को छोड़कर जिला संयुक्त चिकित्सालय में पहुंचते हैं। यहां रोजाना आने वाले मरीजों की तादात लगभग 1500 के करीब रहती है, जबकि इमरजेंसी में करीब दो दर्जन से ज्यादा मरीज रोजाना पहुंचते हैं। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि है न तो इमरजेंसी में गंभीर अवस्था में आने वाले मरीजों को बेड तक ले जाने के लिए कोई कर्मचारी तैनात रहता है और संवेदनहीनता की चरम सीमा की अगर बात करें तो मरीज इमरजेंसी से वार्ड उसको चढ़ाई जा रहे बोतल को भी खुद ही हाथ में लेकर ढोना पड़ता है। बता दें कि अस्पताल में लापरवाही का सिलसिला यही नहीं थमता। अस्पताल में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने का यह सिलसिला लंबे समय से बदस्तूर जारी है। जिस पर अस्पताल प्रशासन जानबूझकर ध्यान देना नहीं चाहता।
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क्या है पूरा मामला
बीते दिनों एक मरीज अपना इजाल कराने के लिए जिला अस्पताल आया था, जहां उसे इमरजेंसी में भर्ती रखा गया। तबियत में सुधार देखकर डॉक्टर ने मरीज को वार्ड में शिफ्ट करने को कहा। जिस पर स्टाफ की लापरवाही के चलते मरीज के तीमारदार को खुद ही बोतल हाथ में उठाकर वार्ड तक जाना पड़ा। इस पूरी घटना का शर्मनाक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जिसके बाद अब विभाग की जमकर फजीहत हो रही है।
जब मामले की चर्चा सीएमएस रतन पाल सिंह सुमन से की गई तो उन्होंने विभाग की करतूत पर पर्दा डालते हुए राटा रटाया बयान दिया कि मामला संज्ञान में नही है, स्टाफ हमेशा अच्छे से काम करता है।