
शिक्षा विभाग का करोड़पति बाबू क्लर्क इल्हाम, PC- Patrika
पीलीभीत पुलिस ने शुक्रवार को शिक्षा विभाग के एक ऐसे घोटाले का पर्दाफाश किया है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में तैनात एक चपरासी, इलहाम-उर्र-रहमान शम्सी, ने जालसाजी के जरिए सरकारी खजाने में 8.15 करोड़ रुपये की सेंध लगाई। पुलिस ने इस मामले में चपरासी की दो पत्नियों, सास और साली समेत 7 रिश्तेदारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
आरोपी इलहाम मूल रूप से बीसलपुर इंटर कॉलेज में चपरासी था, लेकिन 8 साल पहले उसने जुगाड़ लगाकर DIOS ऑफिस में अटैचमेंट करा लिया। यहां उसने वेतन के 'टोकन जनरेट' करने जैसे महत्वपूर्ण ऑनलाइन काम संभाल लिए। इसी पावर का इस्तेमाल कर उसने अपनी तीनों पत्नियों, सास, साली और अन्य रिश्तेदारों को कागजों पर टीचर, बाबू और ठेकेदार बना दिया और उनके खातों में सीधे सरकारी पैसा ट्रांसफर करने लगा।
जांच में खुलासा हुआ कि इलहाम की तीन पत्नियां हैं और तीनों को एक-दूसरे के बारे में भनक तक नहीं थी।
अजारा ने पूछताछ में बताया कि उसे इलहाम की अन्य शादियों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
घोटाले की नींव फरवरी 2026 में हिली, जब बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर ने पीलीभीत डीएम को एक संदिग्ध ट्रांजैक्शन की सूचना दी। ट्रेजरी से 1.15 करोड़ रुपये एक निजी खाते में भेजे गए थे। डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने जांच कमेटी बिठाई, तो परत-दर-परत 8 साल का काला चिट्ठा खुलता चला गया।
पत्नियों के अलावा साली फातिमा, सास नाहिद, और रिश्तेदार आफिया, परवीन व आशकारा को जेल भेजा गया है। मुख्य आरोपी इलहाम ने फिलहाल हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले रखी है, लेकिन पुलिस उसके वित्तीय साम्राज्य को ध्वस्त करने में जुटी है। यह मामला दर्शाता है कि कैसे एक छोटा कर्मचारी भी तकनीक और निगरानी की कमी का फायदा उठाकर पूरे सिस्टम को चूना लगा सकता है।
Updated on:
1 May 2026, 10:05 PM IST
Published on:
1 May 2026, 10:05 PM IST
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