पीथमपुर

पीथमपुर में एक साथ उठीं तीन भाई-बहन की अर्थियां, हर आंख से छलके आंसू, दो परिवारों की उजड़ी खुशियां

Cousin Brothers-Sister Funeral: पीथमपुर के टखेड़ी के श्मशान घाट पर एक साथ हुआ अंतिम संस्कार। स्कूल से वापस आते समय हुआ था हादसा।
2 min read
• •
Updated: 23 Oct 2026, 12:48 PM IST
Pithampur road accident cousin brothers-sister funeral
Pithampur Road accident: एक साथ उठीं तीन भाई-बहन की अर्थियां (फोटो सोर्स- Patrika)

Pithampur Road accident: मध्य प्रदेश के पीथमपुर क्षेत्र के उत्कर्ष आंगन कॉलोनी में उस समय माहौल गमगीन हो गया जब तीन मासूम बच्चों के शव उनके घर पहुंचे। महेंद्रा ब्रिज पर हुए सड़क हादसे ने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। गुरुवार शाम करीब 6 बजे जैसे ही प्रियांशु रजक, मोक्ष रजक और आरुषि रजक उत्कर्ष आंगन कॉलोनी पहुंचे, पूरे क्षेत्र में मातम पसर गया। अपनों को खोने का दुख पहले ही असहनीय था, लेकिन बच्चों को इस हालत में सामने देखकर परिजनों का दर्द छलक पड़ा। कॉलोनी में हर तरफ चीख-पुकार सुनाई देने लगी। जो लोग परिवारों को ढांढस बंधाने पहुंचे थे, उनकी आंखें भी नम हो गईं।

पूरी कॉलोनी के रहवासियों की आंखें हुई नम

गुरुवार दोपहर हुए हादसे के बाद तीनों बच्चों को कॉलोनी में लाया गया। हादसे की गंभीरता इतनी अधिक थी कि बच्चों की पहचान करना मुश्किल हो गया था। शाम करीब 6 बजे जब तीनों को उत्कर्ष आंगन कॉलोनी पहुंचे, तो वहां मौजूद लोगों के लिए अपने आंसू रोक पाना मुश्किल हो गया। जिन बच्चों को कुछ समय पहले तक हंसते-खेलते देखा था, उन्हें इस हालत में देखकर हर कोई स्तब्ध था। पूरी कॉलोनी शोक में डूब गई।

एक परिवार ने खो दिए दोनों बेटे, दूसरे की बेटी चली गई

प्रियांशु और मोक्ष सगे भाई थे। दोनों की एक साथ जान चले जाना उनके परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया। माता-पिता के लिए अपने दोनों बेटों को खोने का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। वहीं, आरुषि के निधन से उसके परिवार में भी कभी न भरने वाला खालीपन आ गया। वह अपनी मां और बड़ी बहन सहित परिजनों को छोड़कर चली गई। एक ही हादसे ने दो परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी।

भाटखेड़ी के श्मशान घाट पर एक साथ हुआ अंतिम संस्कार

तीनों मासूमों का अंतिम संस्कार भाटखेड़ी के श्मशान घाट पर एक साथ किया गया। अंतिम विदाई (Cousin Brothers-Sister Funeral) के उस दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। परिजनों का विलाप देखकर लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े। कोई बच्चों को याद कर रो रहा था, तो कोई परिवारों की इस असहनीय पीड़ा को देखकर खुद को संभाल नहीं पा रहा था। तीनों मासूमों की एक साथ अंतिम विदाई ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया।

पीछे रह गईं यादें और कभी न भरने वाला खालीपन

बच्चों के जाने के बाद उनके घरों में ऐसा सन्नाटा छा गया, जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। जिन घरों में बच्चों की हंसी गूंजती थी, वहां अब उनकी यादें रह गई हैं। परिवारों के लिए यह क्षति ऐसी है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। प्रियांशु, मोक्ष और आरुषि अब लौटकर नहीं आएंगे, लेकिन उनकी यादें हमेशा अपनों के दिलों में रहेंगी।

Updated on:
23 Oct 2026, 12:48 PM IST
Published on: