विधानसभा की 70 में से 10 पर कड़ा मुकाबला होने से चुनाव काफी रोचक हो गया है। इन सीटों पर उम्मीदवारों की हार-जीत पर दिल्ली ही नहीं देश भर की नजरें रहेंगीं।
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में भारतीय जनता पार्टी के चाणक्य अमित शाह आैर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की प्रतिष्ठा दांव पर है। इससे इतर दिल्ली में चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों की बात करें तो 70 में से 9 सीटें एेसी हैं जिन पर कांटे की टक्कर है। इन चांदनी चौक, कालकाजी, शकूर बस्ती, सीमापुरी, नजफगढ़, मॉडल टाउन, बदरपुर, सीमापुरी, नजफगढ़ और द्वारका शामिल है। दिल्ली के जो नेता कांटे की टक्कर में फंसे हैं उनमें दिल्ली सरकार के तीन मंत्री सत्येंद्र जैन ( शकूर बस्ती ), राजेंद्र पाल गौतम ( सीमापुरी ) और कैलाश गहलोत ( नजफगढ़ ) भी शामिल हैं।
इनके अलावा केजरीवाल मंत्रीमंडल में शामिल रहे और इस बार मॉडल टाउन विधानसभा चुनाव लड़ रहे कपिल मिश्रा भी शामिल हैं। इन सीटों पर हार जीत का सीधा अगर आगामी सरकार के गठन पर भी दिख होना तय है। इन सीटों पर उम्मीदवारों की हार-जीत पर दिल्ली ही नहीं देश भर की नजरें रहेंगीं। आइए हम आपको बतातें हैं इन 10 सीटों पर किस किसके बीच है मुकाबला।
नजफगढ़
नजफगढ़ लोकसभा सीट से अरविंद केजरीवाल सरकार में मंत्री कैलाश गहलोत मैदान हैं तो वहीं भारतीय जनता पार्टी यहां से अजीत सिंह खरखरी और कांग्रेस ने साहब सिंह को मैदान में उतारा है। दिल्ली में कई बार ऑड-ईवन स्कीम लागू कराने को लेकर चर्चा में आए कैलाश गहलोत को दिल्ली सरकार की योजनाओं के सहारे जीत का भरोसा है। वहीं, भाजपा उम्मीद अजीत खरखरी को जनता में दिल्ली सरकार के प्रति उपजे गुस्से में अपनी जीत छिपी दिखाई दे रही है। इन दोनों के बीच कांग्रेस के प्रत्याशी साहब सिंह को कांग्रेस की नीतियों के साथ शीला दीक्षित सरकार में कराए गए विकास कार्यों पर भरोसा है।
शकूर बस्ती
केजरीवाल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन को बीजेपी प्रत्याशी डॉ. एससी वत्स और कांग्रेस के देव राज अरोड़ा से कड़ी चुनौती मिल रही है। AAP उम्मीदवार जहां दिल्ली सरकार की उपलब्धियों पर चुनाव लड़ रहे हैं तो बीजेपी एससी वत्स को मोदी सरकार द्वारा कराए गए जनहित के कामों पर उम्मीद है। बता दें कि 2015 में एससी वत्स बहुत कम मार्जिन से हारे थे।
सीमापुरी
इस सीट से दिल्ली सरकार में न्याय एवं अधिकारिता विभाग, अनुसूचित जाति/जनजाति विभाग, रजिस्ट्रार ऑफ को-आपरेटिव सोसाइटीज मंत्री राजेंद्र पाल गौतम मैदान में हैं। वह भी दिल्ली सरकार की नीतियों के सहारे और अपने कामों के बल पर जनता के बीच हैं और उन्हें जीत की पूरी उम्मीद है। वहीं, गठबंधन के तहत यह सीट भाजपा की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी के खाते में गई है, जो राजेंद्र पाल गौतम को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। इसी के साथ कांग्रेस के वीर सिंह धींगान भी मैदान में मजबूती से खड़े हैं उन्हें भी इस बार जीत की उम्मीद है।
मॉडल टाउन
बीजेपी प्रत्याशी कपिल मिश्रा के मैदान में आने से मॉडल टाउन विधानसभा सीट पर मुकाबला कांटे की है। सीटिंग आप एमएलए अखिलेश पति त्रिपाठी एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं तो कांग्रेस से आकांक्षा ओला भी दमदाार प्रत्याशी मानी जा रही हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव में AAP उम्मीदवार अखिलेश पति त्रिपाठी ने एकतरफा मुकाबले में बीजेपी के विवेक गर्ग को 16,706 वोटों के अंतर से हराया था, लेकिन इस बार कपिल मिश्रा के आने से मुकाबला टक्कर का हो गया है। करावल नगर विधानसभा सीट से AAP विधायक रहे कपिल मिश्रा ने इस सीट पर आक्रामक प्रचार किया है, तो अखिलेश पति त्रिपाठी को अपने किए काम पर भरोसा है। कांग्रेस की आकांक्षा ओला को कांग्रेस के ऊपर जनता का भरोसा वापस लौटने की उम्मीद है।
द्वारका
यह सीट देश के पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री के पोते आदर्श शास्त्री की वजह से चर्चा में है। दूसरी तरफ कांग्रेस के दिग्गज नेता महाबल मिश्रा के बेटे विनय मिश्रा आप के टिकट पर चुनावी मैदान में उन्हे कड़ी टक्कर दे रहे हैं। वहीं, बीजेपी के प्रद्युम्न राजपूत ने अपने दमदार चुनावी अभियान से यहां पर मुकाबला काफी दिलचस्प कर दिया है। बता दें कि इस सीट पर बीजेपी प्रत्याशी राजपूत 2015 में भी बहुत कम वोटों से हारे थे। बीजेपी की जीत सुनिश्चित करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने द्वारका में एक जनसभा को भी संबोधित किया था। इ
त्याशियों से कड़ी टक्कर में मिल रही है।
राजेंद्र नगर
राजेंद्र नगर सीट पर आम आदमी पार्टी प्रत्याशी राघव चड्डा और कांग्रेस प्रत्याशी रॉकी तुसीद ने त्रिकोणीय मुकाबले में तब्दील कर दिया है तो वहीं बीजेवी प्रत्याशी आरपी सिंह भी दोनों को टक्कर दे रहे हैं। बता दें कि राघव चड्ढा पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं और वह पहली बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में खड़े हुए हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में राघव चड्डा ने दक्षिण दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस बार वह अरविंद केजरीवाल के काम के सहारे अपनी नैया पार लगने की उम्मीद कर रहे हैं। बीजेपी प्रत्याशी आरपी सिंह को नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और केंद्र सरकार के काम पर भरोसा है और वह इस सीट पर जीत की आस लगाए हुए हैं, तो कांग्रेस प्रत्याशी रॉकी तुसीद अपनी नीतियों के सहारे जंग में फतह की आस में हैं।
बदरपुर
बदरपुर विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी के विधायक नारायण दत्त शर्मा ने बगावत करके चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। दरअसल, टिकट नहीं मिलने पर नारायण दत्त शर्मा इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में यहां पर मुकाबला चतुष्कोणीय हो गया है। इसी के साथ भाजपा प्रत्याशी रामवीर सिंह बिधूड़ी, आम आदमी पार्टी प्रत्याशी रामजी सिंह 'नेताजी' और कांग्रेस से प्रदीप यादव ने अपने दमदार चुनाव प्रचार से और दिलचस्प बना दिया है।
चांदनी चौक
चांदनी चौक में एक बार फिर 2015 जैसा नजारा ही दिख रहा है। इस बार उम्मीदवारों ने पार्टी बदल ली है। कांग्रेस के पूर्व विधायक प्रहलाद सिंह सावहने इस बार आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। पिछली बार आप के टिकट से विधायक बनीं अलका लांबा कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ रही हैं। 2015 में अलका ने पार्टी से मतभेद के बाद कांग्रेस छोड़ आप का दामन पकड़ा था। बीजेपी उम्मीदवार सुमन कुमार गुप्ता हिंदू वोटरों के दम पर ताल ठोंक रहे हैं। बीजेपी यहां से 1993 के अलावा कभी नहीं जीती। लेकिन त्रिकोणीय मुकाबले से उसे उम्मीद है। इसी तरह कालकाजी सीट पर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा की बेटी शिवानी चोपड़ा आैर नजफगढ सीट से कैलाश गहलोत को बीजेपी प्रत्याशी कड़ी टक्कर दे रहे हैं।