अठावले ने कहा कि अयोध्या में न तो राम मंदिर था और न हीं मस्जिद, वहां एक बौद्ध मंदिर था। इस बयान के बाद सियासत गरमा गई।
नई दिल्ली। अक्सर अपने बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री रामदास अठावले एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने राम मंदिर के संबंध में एक बयान दिया है। अठावले ने कहा कि अयोध्या में न तो राम मंदिर था और न हीं मस्जिद, वहां एक बौद्ध मंदिर था। इस बयान के बाद सियासत गरमा गई। उन्होंने आगे कहा कि यदि उस जगह की खुदाई की जाए तो बौद्ध मंदिर के अवशेष मिल जाएंगे। बता दें कि बीते शनिवार 15 सितंबर को राजस्थान के जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान अठावले ने कहा कि 'हिंदुओं ने बुद्ध मंदिर को तोड़ दिया और राम मंदिर बनाया। मुसलमानों ने राम मंदिर तोड़ दिया और वहां मस्जिद बना दी। अब मस्जिद को तोड़ दिया गया है।’ राम दास अठावले ने आगे अपने बयान मे यह भी कहा 'मेरा निजी सुझाव है कि 66 एकड़ जमीन को हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच बांट दिया जाए। 40-45 एकड़ जमीन हिन्दुओं को मंदिर के लिए और 20-25 एकड़ जमीन मुसलमानों को मस्जिद निर्माण के लिए दे दिया जाए।’
खुदाई करने पर मिलेंगे बौद्ध मंदिर के अवशेष: अठावले
आपको बता दें कि राम दास अठावले ने इलाहाबाद कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा 'कोर्ट ने दोनों पक्षों में जमीन को बांट दिया है, इसके बावजूद भी आज मामला सुप्रीम कोर्ट मे चल रहा है। हालांकि अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं आया है लेकिन मुझे लगता है कि जो भी हो, आम सहमति से हो।’ उठावले ने एक बार फिर से अपनी बात को दौहराते हुए कहा कि यदि देखा जाए तो वह विशुद्ध रूप से एक बौद्ध मंदिर है। वहां खुदाई करने पर भगवान बुद्ध की मूर्तियां और बौद्ध मंदिर के अवशेष मिल जाएंगे। उन्होंने कि हम लोगों को झगड़े में नहीं पड़ना चाहिए। आपको बता दें कि इससे पहले भी एससी-एसटी को लेकर एक बयान के कारण वे सुर्खियों में आ गए थे। उन्होंने कहा था कि सवर्णों की नाराजगी उनकी गलतफहमी से हुई है। सवर्णों के भारत बंद का असर भाजपा शासित राज्यों में ज्यादा दिखा, क्योंकि इसके पीछ कांग्रेस का हाथ था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस आगामी आम चुनाव को लेकर लोगों के बीच एक भय का माहौल बनाना चाहती थी। लेकिन वे कामयाब नहीं हुए। अठावले ने सवर्णों से कहा कि उन्हें एससी-एसटी एक्ट से डरने की जरूरत नहीं है। वे दलितों के साथ दोस्ती बढ़ाएं क्योंकि किसी भी कीमत पर एससी-एसटी और ओबीसी का आरक्षण खत्म नहीं होने वाला है।