
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून ( CAA ) के विरोध में जेल ही हवा खा चुके भीम आर्मी चीफ ( Bhim Army ) चंद्रशेखर आजाद ( Chandra Shekhar Azad ) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश ( UP ) में अपनी जमीन तलाश रही बसपा प्रमुख मायावती ( Mayawati ) के लिए चंद्रशेखर आजाद बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहे हैं। जी हां भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद रविवार को राजनीतिक पार्टी की घोषणा करने जा रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो ये राजनीतिक पार्टी सीधे दलितों को जोड़ने और अपने पक्ष में करने के लिए बनाई जा रही है। ऐसे में बसपा खास तौर पर मायावती के लिए ये बड़ा झटका साबित हो सकता है।
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काशी राम की जयंती पर होगी घोषणा
राजनीति के मैदान पर मायावती को मात देने के लिए चंद्रशेखर आजाद ने अपनी पार्टी उतारने का निर्णय लिया है। खास बात यह है कि चंद्रशेखर आजाद रविवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम में अपनी नई राजनीतिक पार्टी की घोषणा करेंगे।
इतना ही नहीं मायावती को एक और झटका देते हुए उन्होंने अपनी पार्टी की घोषणा का वक्त भी चुनकर निकाला है।
बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय कांशीराम की जयंती पर चंद्रशेखर अपनी पार्टी की घोषणा करने जा रहा है। इशारा साफ है जिस काशीराम के नाम पर मायावती ने दलितों की संरक्षण बनने का बीड़ा उठाया था उसी काशीराम की जंयती का सहारा लेकर चंद्रशेखर भी अपना वोट बैंक तैयार करने की जुगत में हैं।
ये हो सकता है पार्टी का संभावित नाम
भीम आर्मी के प्रवक्ता के मुताबिक राजनीतिक संगठन के लिए संभावित नामों में आजाद बहुजन पार्टी, बहुजन आवाम पार्टी और आजाद समाज पार्टी शामिल हैं।
अधिकतर नेताओं ने 'आजाद बहुजन पार्टी' का समर्थन किया लेकिन चुनाव आयोग की ओर से इसकी स्वीकृति दिए जाने के बाद नाम को अंतिम रूप दिया जाएगा।
पार्टी अपना घोषणापत्र जारी करेगी, सदस्यता अभियान शुरू करेगी और रविवार को अपना एजेंडा तय करेगी।
दलितों, पिछड़ों, मुसलमानों को शामिल होने की अपील
मीडिया रिपोर्ट्स को मुताबिक भीम आर्मी ने युवाओं को जुटाने के लिए अपनी छात्र शाखा भीम आर्मी स्टूडेंट्स फेडरेशन (BASF) को पहले ही लॉन्च कर दिया है।
नई राजनीतिक पार्टी के लॉन्च के बाद भीम आर्मी सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन के रूप में काम करेगी। भीम आर्मी ने सोशल मीडिया पर एक अभियान शुरू किया है, जिसमें एक नए राजनीतिक दल की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।
चंद्र शेखर ने दलितों, पिछड़ों, मुसलमानों को इसमें शामिल होने और समर्थन देने का आह्वान किया है।
इन प्रदर्शनों को भीम आर्मी का समर्थन
पिछले कुछ समय में भीम आर्मी ने कई मुद्दों पर अपनी खुलकर राय रखी है। खास तौर पर नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) और नेशनल रिजस्टर फॉर सिटिजन (NRC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का भीम आर्मी ने समर्थन किया है। इन मुद्दों पर मुस्लिम समुदाय का साथ दे रही है।
चुनौती के लिए तैयार मायावती
एक तरफ चंद्रशेखर आजाद अपनी राजनीतिक पार्टी के जरिये मायावती के किले में सेंध लगाने की कोशिश में जुटे हैं तो दूसरी तरफ अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत बनाए रखने के लिए मायावती ने भी भीम आर्मी पर अपनी नजरें गढ़ाए रखी हैं।
यही वजह है कि भीम आर्मी की योजना का मुकाबला करने के लिए बीएसपी चीफ मायावती ने अप्रैल के पहले सप्ताह में पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है।
2022 में यूपी विधानसभा चुनाव
2 मार्च को अपनी लखनऊ यात्रा के दौरान भीम आर्मी चीफ ने संकेत दिया था कि वह 2022 में अगले यूपी विधानसभा चुनावों के लिए उत्तर प्रदेश में पांच छोटे राजनीतिक दलों के संयुक्त मोर्चा 'भागीदारी संकल्प मोर्चा' में शामिल होंगे।