राजनीति

Bihar Election 2020 : शरद यादव ने आरजेडी से बनाई दूरी, कांग्रेस ने उनकी बेटी सुभाषिनी पर लगाया दांव

कांग्रेस ने शरद यादव की बेटी सुभाषिनी यादव को बिहारीगंज से मैदान में उतारा। सिने अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा को बांकीपुर से बनाया उम्मीदवार।

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कांग्रेस ने शरद यादव की बेटी सुभाषिनी यादव को बिहारीगंज से मैदान में उतारा।

नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के बीच दल-बदल और सियासी अवसरवादिता का खेल जारी है। ताजा जानकारी के मुताबिक समाजवादी नेता और लोकतांत्रिक जनता दल के संस्थापक शरद यादव ने आरजेडी से दूरी बनाते हुए कांग्रेस से नजदीकी का रिश्ता गांठ लिया है। कांग्रेस ने भी उनकी बेटी सुभाषिनी यादव को टिकट देकर सियासी मैदान में उतार दिया है। कांग्रेस ने इसके साथ ही यादव वोट बैंक में भी सेंध लगाने की कोशिश की है।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सुभाषिनी को पार्टी से टिकट मिलने के बाद कहा है कि हमें गर्व है कि सुभाषिनी यादव कांग्रेस में शामिल हुई हैं। उनके पिता का भारत के संसदीय लोकतंत्र में बहुत बड़ा योगदान है।

सियासी वारिश बनी सुभाषिनी

जेडीयू ये निकालने जाने के बाद शरद यादव महागठबंधन में शामिल हो गए थे। उनका आरजेडी में शामिल होने और पहले की तरह भूमिका निभाने की भी चर्चा हुई थी। हाल ही में इस बात की भी चर्चा थी कि वो जेडीयू में वापसी करने वाले हैं। लेकिन सुभाषिनी यादव के कांग्रेस में शामिल होने बिहारीगंज से टिकट देने के बाद साफ हो गया है कि अब उनका लालू की पार्टी आरजेडी से भी मोहभंग हो गया है। इसी के साथ उन्होंने खुद की सियासी विरासत अपनी बेटी को सौंप कांग्रेस के नजदीक होने का संकेत भी दे दिया है।

श़त्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव को बांकीपुर से बनाया प्रत्याशी

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कांग्रेस को दूसरे चरण में 25 और तीसरे चरण में 24 सीटें मिली हैं। पहले चरण में कांग्रेस को 21 सीटें मिली थीं। कांग्रेस ने दूसरे और तीसरे चरण में परिवारवाद को बढ़ावा देते हुए बिहारीगंज विधानसभा सीट से हाल ही पार्टी का दामन थामने वाली शरद यादव की पुत्री सुभाषिनी को पार्टी ने टिकट दिया है। वहीं दूसरे चरण में शत्रुघ्न सिन्हा के पुत्र लव सिन्हा को बांकीपुर से प्रत्याशी बनाया है। इस तरह शरद यादव और सिने अभिनेता श़त्रुघ्न सिन्हा ने नई पीढ़ी को भी सियासी मैदान में लॉन्च कर दिया है।

बाहुबली कालीचरण को मैदान में उतारा

राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस छोड़ने वाले काली पांडेय की भी बुधवार को दोबारा पार्टी में वापसी हो गई।कांग्रेस ने दूसरे चरण में कुचायकोट से बाहुबली पांडेय को उम्मीदवार बनाया है। दूसरे चरण के सीटिंग विधायकों को एक बार फिर से पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है। रोसड़ा के विधायक डॉ. अशोक राम को कुशेश्वरस्थान से, बेगूसराय से अमिता भूषण, भागलपुर से अजित शर्मा और बेतिया से मदन मोहन तिवारी को भी टिकट दे दिया है।

Bihar Election 2020 : रामविलास पासवान के बाद सबसे बड़ा दलित नेता कौन?

माझी के विधायक व पूर्व मंत्री विजय शंकर दुबे को इस बार हाईकमान ने महाराजगंज से चुनाव लड़ने का इजाजत दी है। हालांकि मांझी महाराजगंज से ही चुनाव लड़ना चाह रहे थे लेकिन वह सीट वामदल के खाते में चली गई है।कांग्रेस ने दूसरे चरण में लालगंज से निखिल कुमार के करीबी राकेश कुमार ऊर्फ पप्पू सिंह और राजापाकर से प्रतिमा सिंह का नाम तय किया है।

वीणा शाही का टिकट काटा

वहीं वैशाली से एलपी शाही की बेटी वीणा शाही का नाम अंतिम समय में कटकर वहां से संजीव सिंह को टिकट दी है। इसके अलावा नालंदा से गुंजन पटेल, बेलदौर से चंदन यादव, खगड़िया से छत्रपति यादव, पारू से अनुनय कुमार सिंह और हरनौत से रवि गोल्डन के नाम पर पार्टी ने मुहर लगाई है।

2017 में जेडीयू से निकाल दिए गए थे शरद यादव

बता दें कि 2017 में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण शरद यादव को नीतीश कुमार ने जेडीयू से निकाल दिया था। उसके बाद उन्होंने लोकतांत्रिक जनता दल का गठन किया था, लेकिन उसे एक मजबूत सियासी पार्टी बनाने में शरद यादव विफल रहे। 2019 के लोकसभा चुनाव में वह महागठबंधन का हिस्सा थे और इसी के बैनर तले मधेपुरा से चुनाव भी लड़ा था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

Updated on:
15 Oct 2020 08:42 am
Published on:
15 Oct 2020 08:36 am
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