राजनीति

भाजपा का यूपी ‘मिशन 2027 : 40% चेहरों की छंटनी और नए सामाजिक समीकरण पर दांव

भाजपा ने यूपी विधानसभा चुनाव के लिए चुनावी तैयारी तेज कर दी है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती एंटी इन्कम्बैंसी से निपटने का फार्मूला तलाशने की है। पार्टी इसके लिए मौजूदा विधायकों में करीब 40 प्रतिशत टिकट बदलने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके साथ ही सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग का नया फार्मूला भी तैयार किया जा रहा है
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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने चुनावी तैयारी तेज कर दी है। पार्टी के भीतर संगठन और सरकार में मंत्री- विधायकों के प्रदर्शन के आधार पर बड़े पैमाने पर उम्मीदवारों के मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती एंटी इन्कम्बैंसी से निपटने का फार्मूला तलाशने की है। सूत्रों के अनुसार पार्टी इसके लिए मौजूदा विधायकों में करीब 40 प्रतिशत टिकट बदलने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके साथ ही सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग का नया फार्मूला भी तैयार किया जा रहा है।

इस रणनीति का स्पष्ट संकेत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के हालिया दो दिवसीय लखनऊ दौरे में दिया गया। यूपी दौरे में उन्होंने बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक नियमित संगठनात्मक बैठकों, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और 2027 की तैयारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया। वहीं पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचार परिवार के उत्तर प्रदेश में सक्रिय संगठनों की गाजियाबाद में हुई क्षेत्र समन्वय बैठक में भी जमीनी स्थितियों पर गहन विचार विमर्श हुआ। इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित प्रदेश भाजपा के आला अधिकारी शामिल हुए। माना जा रहा है कि पार्टी की ओर से 25 से 40 प्रतिशत टिकट बदले जाने के स्पष्ट संकेत दिए गए हैं। इस बार टिकट इस आधार पर नहीं मिलेगा कि कोई उस क्षेत्र में कब से विधायक है।

चुनाव से पहले संगठन की मजबूती जरूरी

लखनऊ दौरे के दौरान नितिन नवीन ने बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल, जिला और प्रदेश स्तर पर नियमित बैठकों का निर्देश दिया। चुनाव से पहले ही प्रत्येक बूथ पर मजबूत संगठन खड़ा हो जाए। वहीं समन्वय बैठक में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक संगठन के जरिए प्रभावी तरीके से पहुंचने, विचार परिवार के सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर काम करने, चुनाव के समय उठने वाले तात्कालिक मुद्दों पर स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रिया देने की बजाय केन्द्र के संकेत के आधार पर काम करने की बात कही गई।

गुटबाजी दूर करना बड़ी चुनौती

राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे में प्रदेश भाजपा के भीतर मौजूद विभिन्न शक्ति केंद्रों और गुटों के बीच समन्वय बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व की सबसे बड़ी चिंता केवल चुनाव नहीं, बल्कि संगठन की एकजुटता भी है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश भाजपा में सरकार, संगठन, क्षेत्रीय नेताओं और विभिन्न सामाजिक समूहों के प्रतिनिधित्व को लेकर अलग-अलग शक्ति केंद्र उभरे हैं। ऐसे में नेतृत्व चाहता है कि चुनाव से पहले किसी भी प्रकार का आंतरिक असंतोष सार्वजनिक रूप से सामने न आए। इसी उद्देश्य से प्रदेश पदाधिकारियों, क्षेत्रीय प्रभारियों, सांसदों, विधायकों और संगठन मंत्रियों के बीच समन्वय बैठकों का सिलसिला बढ़ाने के लिए भी कहा गया है।

टिकट वितरण का नया पैमाना

-विधायक की क्षेत्र में सक्रियता

-जनता और संगठन में स्वीकार्यता

-सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति

-जातीय और सामाजिक समीकरण

-स्थानीय संगठन की रिपोर्ट

-विपक्ष के मुकाबले जीतने की क्षमता

सियासी रणनीति

-करीब 40% टिकटों में बदलाव की तैयारी

-सहयोगी दलों के साथ नए सीट शेयरिंग फार्मूले पर मंथन

-संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

-प्रदेश भाजपा के विभिन्न गुटों के बीच दूरी कम करने की कवायद

-नए सामाजिक समीकरण और युवा चेहरों पर फोकस

-मिशन-2027 के लिए बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की रणनीति

Updated on:
10 Jul 2026 01:46 pm
Published on:
10 Jul 2026 01:46 pm