गुजरात स्थित कांडला पोर्ट का नाम बदलकर अब दीनदयाल पोर्ट होगा। केंद्रीय कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।
पत्रिका ब्यूरो. नई दिल्ली. गुजरात स्थित कांडला पोर्ट का नाम बदलकर अब दीनदयाल पोर्ट होगा। केंद्रीय कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भारत और लिथुआनिया के बीच प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर और उसकी पुष्टि को मंजूरी भी प्रदान की। मंत्रिमंडल ने म्यामांर स्थित महिला पुलिस प्रशिक्षण केंद्र के उन्नयन संबंधी समझौते को भी मंजूरी प्रदान कर दी है। कांडला पोर्ट का नाम बदलने को लेकर स्थानीय संगठन लंबे समय से मांग कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने भी नाम बदले जाने की इच्छा व्यक्त की थी। उसके बाद जहाजरानी मंत्रालय ने इस पोर्ट का नाम बदलने की कवायद शुरू कर दी जिसे बुधवार को कैबिनेट ने मंजूर प्रदान कर दी। गुजरात के कच्छ इलाके में स्थित इस पोर्ट की गिनती भारत के बड़े बंदरगाह के रूप में होती है। पंडित दीनदयाल की जन्मशती के समापन अवसर पर सरकार ने इसका नाम बदलने को मंजूरी भी दे दी।
म्यांमार सरकार से समझौता
कैबिनेट ने अन्य फैसले में यमेथिन, म्यांमार स्थित महिला पुलिस प्रशिक्षण केंद्र के उन्नयन संबंधी समझैता ज्ञापन को भी मंजूरी प्रदान कर दी। इस एमओयू पर 6 सितंबर 2017 को हस्ताक्षर हुए थे। इस एमओयू में भारत सरकार से तकनीकी एवं वित्तिय सहायता के साथ म्यांमार सरकार की क्षमताओं में और वृद्धि के लिए यमेथिन महिला पुलिस प्रशिक्षण केंद्र का उन्नयन किया जाना शामिल है। मंत्रिमंडल ने भारत और लिथुआनिया के बीच प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर और इसकी पुष्टि को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। इस संधि में आतंकवादियों, आर्थिक अपराधियों और अन्य अपराधियों के लिथुआनिया से भारत और भारत से लिथुआनिया को प्रत्यर्पण किए जाने के लिए कानूनी प्रक्रिया को पूरा किया जा सकेगा। इस समझौते से लिथुआनिया से आतंकवादियों सहित भगोड़े अपराधियों के आपराधिक अभियोजन हेतु प्रत्यारोपण में मदद मिलेगी जो भारत के खिलाफ आपराधिक गतिविधियां कर चुके हैं।