25 जुलाई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

कांग्रेस खड़ा कर रही नया सोशल इंजीनियरिंग मॉडल

राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा के साथ कांग्रेस ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि वह अपने पारंपरिक सामाजिक गठबंधन को नए सिरे से गढऩे में जुटी है। पार्टी दलित, आदिवासी, ओबीसी, मुस्लिम और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्गों को साथ लाकर नया समीकरण बनाना चाहती है। इसकी झलक राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में दिखाई दी है। जबकि शनिवार से दिल्ली से शुरू हो रहे इन वर्गों को लेकर व्यापक संयुक्त सम्मेलन के जरिए इस रणनीति को जमीनी स्तर तक ले जाने की तैयारी है। कांग्रेस पर वर्ग विशेष की पार्टी होने का ठप्पा लगाने की कोशिश होती रही है। पार्टी इस तरह के आरोपों से छुटकारे की कोशिश में जुटी हुई है
2 min read
Google source verification
Two leaders left for Delhi to arrange for the corraling of Congress MLAs

युवा कांग्रेस चुनाव (photo Patrika)

नई दिल्ली। राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा के साथ कांग्रेस ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि वह अपने पारंपरिक सामाजिक गठबंधन को नए सिरे से गढऩे में जुटी है। पार्टी दलित, आदिवासी, ओबीसी, मुस्लिम और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्गों को साथ लाकर नया समीकरण बनाना चाहती है। इसकी झलक राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में दिखाई दी है। जबकि शनिवार से दिल्ली से शुरू हो रहे इन वर्गों को लेकर व्यापक संयुक्त सम्मेलन के जरिए इस रणनीति को जमीनी स्तर तक ले जाने की तैयारी है।

दरअसल, कांग्रेस पर वर्ग विशेष की पार्टी होने का ठप्पा लगाने की कोशिश होती रही है। पार्टी इस तरह के आरोपों से छुटकारे की कोशिश में जुटी हुई है। पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को फिर से मैदान में उतारकर दलित नेतृत्व पर भरोसा जताया है, वहीं मुस्लिम प्रतिनिधित्व को भी बनाए रखा है। लेकिन सबसे अधिक चर्चा इस सूची में चार सवर्ण उम्मीदवारों के नामों की है।

सवर्ण वर्ग को संदेश

कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि हिंदी भाषी पट्टी के राज्यों को लेकर पार्टी का पिछले कुछ वर्षों से यह आकलन रहा है कि दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों के बीच कांग्रेस की स्वीकार्यता अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन सवर्ण वर्ग के मतदाताओं में उसका आधार लगातार कमजोर हुआ है। पार्टी ने चार सवर्ण उम्मीदवार बनाकर इस तरह की छवि को तोडऩे की कोशिश की है।

खेड़ा को कर्नाटक क्यों भेजा-पर्दे के पीछे की कहानी

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और संविधान, सामाजिक न्याय, जातीय जनगणना जैसे मुद्दों पर आक्रामक राजनीति के बाद कांग्रेस को पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों में अपेक्षाकृत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। ऐसे में राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में सावधानी बरती गई कि हिंदी पट्टी में सामाजिक न्याय की राजनीति का संदेश कमजोर न पड़े। सूत्रों ने बताया कि पवन खेड़ा का नाम राजस्थान से भेजने के लिए चला, लेकिन उन्हें कर्नाटक भेजा गया। ताकि हिंदी पट्टी में पिछड़े-दलित और सामाजिक न्याय की राजनीति का संदेश बरकरार रहे।

झारखंड में प्रणव झा की परीक्षा

राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में झारखंड से प्रणव झा का नाम भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि झारखंड विधानसभा में सत्ता गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल है, लेकिन यदि भाजपा चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर कोई उम्मीदवार उतारती है तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।

आज से शुरू कर रही है संयुक्त सम्मेलन

कांग्रेस की ओर से संयुक्त सम्मेलन की शुरुआत दिल्ली से शनिवार को होने जा रही है। इसमें दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के साथ गरीब पिछड़े, आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्ग के सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, कलाकार और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इस तरह के दिल्ली सम्मेलन में तैयार रोडमैप को पार्टी नेतृत्व के समक्ष रखा जाएगा. इसके बाद उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर जैसे चुनावी राज्यों में इसी तरह के सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद पार्टी राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित करेगी, जिसमें दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, ओबीसी और गरीब सवर्ण समुदायों के लोगों की भागीदारी होगी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत पार्टी के शीर्ष नेता शामिल होंगे।

बड़ी खबरें

View All

नई दिल्ली

दिल्ली न्यूज़

ट्रेंडिंग