
नई दिल्ली। कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार बनने के बाद भी राहुल गांधी और कुमारस्वामी की समस्याएं खत्म नहीं हुई हैं। सरकार चलाने के लिए अब नाराज विधायक ही सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भी सत्ता में भागीदारी को लेकर खींचतान में कमी नहीं आई है। कमोबेश स्थिति पहले की तरह है। दोनों दलों के विधायक सरकार और पार्टी हाईकमान के निर्णय से नाराज चल रहे हैं। इस संकट से पार पाने के लिए दोनों दलों ने मिलकर एक फार्मूला तैयार किया है। इस फार्मूले के तहत सबकी भागीदारी और सबकी जिम्मेदारी के तहत सरकार को चलाने काम सीएम कुमारस्वामी करेंगे।
क्या है फार्मूला?
शीर्ष स्तर पर इस बात को लेकर सहमति बनी है कि प्रदेश में गठबंधन सरकार को कुशलतापूर्वक चलाने के लिए अधिकतर विधायकों की जिम्मेदारी तय की जाए। इस बात को लेकर कई दौर की बातचीत हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुद इस मुद्दों को लेकर लगातार बैठक कर रहे हैं। सोमवार को भी उन्होंने वरिष्ठ नेताओं के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की है। इस प्लान पर मंगलवार को भी बेंगलूरु में कांग्रेस के सचिवों की भी प्रदेश स्तर के नेताओं व नाराज विधायकों के साथ हुई है। इन बैठकों के बाद यह निर्णय लिया गया है कि नाराज विधायकों को सरकारी निगमों, बोर्डों, आयोगों, सहकारी समितियों, विधायी समितियों की जिम्मेदारी दी जाए। ताकि शासन-प्रशासन में सभी विधायकों की भागीदारी तय हो सके। सभी विधायक अपने स्तर पर योगदान दे सकें। इस फार्मूले पर मुहर लगाने के लिए कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन कमिटी की बैठक भी आज ही होनी है। इसके संयोजक दानिश अली को पांच सदस्यीय पैनल मीटिंग के लिए बुलाया गया है।
बैठक का एजेंडा
कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन कमेटी की इस बैठक में विचार विमर्श के लिए कई मुद्दों पर चर्चा होनी है। इनमें नाराज विधायकों को खुश करने के लिए तैयार फार्मूले को अंतिम रूप देने, गठबंधन सरकार को चलाने के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार करने और मंत्रिमंडल विस्तार के बाद उत्पन्न समस्याओं को दूर करने के लिए आवश्यक कार्य योजना तैयार करना शामिल है। आज गठबंधन समिति की पांच सदस्यीय पैनल पांच साल तक संयुक्त घोषणापत्र के रूप में योजनाबद्ध दस्तावेज पर काम करने के लिए एक उप-समिति भी गठित कर सकता है। कांग्रेस-जेडीएस समन्वय समिति की अध्यक्षता पूर्व सीएम सिद्धारमैया करेंगे। आपको बता दें कि इसके सदस्यों में कर्नाटक के सीएम एचडी कुमारस्वामी, उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर और कांग्रेस के महासचिव और राज्य मामलों के इनचार्ज केसी वेणुगोपाल शामिल हैं।
कांग्रेस का बी प्लान
जानकारी के मुताबिक संयुक्त घोषणापत्र के अलावा पैनल सरकारी निगमों और बोर्डों को असंतुष्ट विधायकों को सौंपने के बारे में विचार कर सकता है। इनमें से 14 बोर्ड और निगम प्रमुख हैं जिन पर दोनों पार्टियों की नजर है। कांग्रेस चेयरपर्सन की जिम्मेदारी सौंपकर अपने नाराज विधायकों को जल्द से जल्द मनाना चाहती है। इसके अलावा पार्टी के पास दूसरा विकल्प भी है जिसके तहत कांग्रेस के 22 मंत्रालयों में से 6 अभी रिक्त हैं जिन्हें लगातार दवाब बनाने वाले वरिष्ठ नेताओं को सौंपा जा सकता है।