राजनीति

विचार मंच: प्रणब के भाषण से पहले कांग्रेस ने कर दी इतनी बड़ी भूल…

राजनीतिक विश्‍लेषक मानते हैं कि कांग्रेस को प्रतिक्रिया देने से पहले प्रणब मुखर्जी के भाषण का इंतजार करना चाहिए था।
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Updated: 8 Jun 2018, 12:55 PM IST
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विचार मंच: प्रणब के भाषण से पहले कांग्रेस ने कर दी इतनी बड़ी भूल...

नई दिल्‍ली। नागपुर में आयोजित आरएसएस के कार्यक्रम में प्रणब दा के भाषण से पहले कांग्रेस नेताओं ने गलत बयानबाजी कर बहुत बड़ी भूल कर दी है। अब इसका खामियाजा कांग्रेस को आगामी लोकसभा चुनाव में भी भुगतना पड़ सकता है। फिलहाल भाजपा के नेता इन घटनाक्रमों को लेकर चुप है लेकिन उन्‍हें सही मौके की तलाश है। ताकि कांग्रेस नेताओं के दोहरे चेहरे को बेनकाब किया जा सके। हालांकि कांग्रेस नेताओं के तेवर पूर्व राष्‍ट्रपति के भाषण के बाद बदले हुए नजर आए। बीती रात कांग्रेस नेताओं ने बयान जारी कर कहा कि प्रणब दा ने एक बार फिर मोदी सरकार को राजधर्म की याद दिलाई है। लोगों के सामने कांग्रेस का यह रुख आने में बहुत विलंब हो गया और पार्टी को हुई नुकसान की भरपाई करना अब कांग्रेस नेताओं के लिए मुश्किल भरा काम हो सकता है।

भाषण से पहले की गलती
प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के ही नहीं देश के प्रभावी नेताओं में से एक हैं। आरएसएस के आमंत्रण पर उन्‍होंने नागपुर के कार्यक्रम में शामिल होने का निर्णय लिया था। ये बात सही है कि उन्‍होंने कांग्रेस के नेताओं से इस बारे में बातचीत नहीं की, लेकिन जिस तरह से कांग्रेस के नेताओं ने पिछले एक पखवाड़े से प्रतिक्रियाएं दीं, उसे किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। कांग्रेसी नेताओं के बयान को लोगों ने बचकाना बयान माना है। राजनीतिक विश्‍लेषश्‍कों का कहना है कि ऐसा कर कांग्रेस ने बहुत बड़ी भूल की है। पार्टी के नेताओं ने उनके भाषण का इंतजार करना चाहिए था। उन्‍होंने ऐसा न कर जल्‍दबाजी का परिचय दिया। ऐसा कहना इसलिए भी उचित है कि प्रणब दा ने अपने भाषण में पार्टी लाइन के अनुरूप ही बयान दिया। साथ ही आरएसएस को नसीहत देने का भी काम किया।

कांग्रेसी नेताओं की दूसरी बड़ी गलती
संघ के कार्यक्रम से एक दिन पहले प्रणब मुखर्जी नागपुर पहुंच गए थे। संघ मुख्‍यालय गुरुवार को पहुंचे। मुख्यालय में बहुप्रतीक्षित भाषण देने से पहले प्रणब आरएसएस के संस्थापक डॉ. केबी हेडगेवार की जन्मस्थली पर गए और उन्हें श्रद्दांजलि अर्पित की। प्रणब मुखर्जी ने आगंतुक पुस्तिका में हेडगेवार के बारे में अपने विचार भी जाहिर किए। पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेसी नेता रहे प्रणब मुखर्जी ने आगंतुक पुस्तिका में लिखा कि आज मैं यहां भारत माता के महान बेटे को सम्मान देने आया हूं। वह हेडगेवार के जन्मस्थल पर बनाए गए स्‍मारक पर गए और उनके चित्र पर फूल चढ़ाए और माल्यार्पण भी किया। ये बातें भी कांग्रेस के नेताओं को हजम नहीं हुई। यूपीए की अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने इसके तत्‍काल बाद नाराजगी जताई। अहमम पटेल ने कहा कि प्रणब दा आपसे ऐसी अपेक्षा नहीं थी। आनंद शर्मा ने नसीहत दी कि आपको यह नहीं भूलना चा‍हिए कि आरएसएस क्‍या है। इसके साथ ही कांग्रेस के कई अन्‍य नेताओं ने भी प्रणब दा के खिलाफ ट्वीट कर दिया।

कांग्रेस की छवि हुई खराब
कांग्रेसी नेतृत्‍व और नेताओं के इस जल्‍दबाजी का परिणाम यह निकला कि लोगों के बीच पार्टी की छवि एक पखवाड़े के अंदर अनुभवहीन नेताओं वाली पार्टी की बनीं। लोग यह सोचने को मजबूर हुए हैं कि एक के बाद एक कांग्रेस नेता पूर्व राष्‍ट्रपति के खिलाफ इस तरह बयान क्‍यों दे रहे हैं। उनके भाषण से पहले इस तरह के बयान का मतलब क्‍या होता है। लोगों को ताज्‍जुब इस बात से भी हुआ कि बयान देने वालों में अधिकांश कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता हैं। इन नेताओं में गुलाम नबी आजाद, संदीप दीक्षित, जय राम रमेश, अहमद पटेल जैसे नेता शामिल हैं। ये नेता गांधी परिवार से दशकों से जुड़े हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्‍या कांग्रेस के धुरंधर नेता भी प्रणब की समझ का सही आकलन नहीं लगा पाए। इस एपिसोड से लोग यह सोचने को मजबूर हुए हैं कि कांग्रेस को अपने कद्दावर नेता, विचारक, संकटमोचक नेता पर भी भरोसा नहीं है। कांग्रेस पार्टी सामूहिक व मंचीय संवाद में विश्‍वास नहीं करती है। जब कांग्रेस के नेता पार्टी से 43 साल तक जुड़े संकटमोचक की कद्र करना नहीं जानते हैं तो दूसरों के बारे में कितना सही ख्‍याल रखते होंगे इस बात का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

भाषण के बाद बचाव की मुद्रा में कांग्रेस
प्रणब के नागपुर जाने को लेकर आलोचना पर उतारू कांग्रेस नेता अब उनके भाषण को अपनी वैचारिक जीत के रूप में देख रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला का कहना है कि पूर्व राष्ट्रपति ने संघ के मुख्यालय जाकर उन्हें सच्चाई का आईना दिखाया है। उन्होंने संघ को उन्हीं के मंच से भारत की गौरवशाली परंपराओं का पाठ पढ़ाया है। अब कांग्रेस कह रही है कि प्रणब ने संघ की आंख और आत्मा पर चढ़े मकड़जाल को उतारने का प्रयास किया है। संघ और देश को ये बताया कि भारत अपनी विविधिता और अहिंसा में जीता है। भारत सहिष्णुता, धर्मनिरपेक्षता, सबको साथ लेकर चलने की क्षमता, अलग-अलग धर्म, जाति, विचार, पहचान, खानपान और विभिन्न भाषाओं से एक सूत्र में बंधा है। पूर्व राष्ट्रपति ने वर्तमान मोदी सरकार को राजधर्म की याद दिलाई है।

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