राजनीति

मोदी से बोले शांता कुमार, ‘किसानों की स्थिति अभी भी दुर्भाग्यपूर्ण, सीधी आर्थिक मदद जरूरी’

कांगड़ा से सांसद शांता कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने देश में किसानों की स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
2 min read
Modi Shanta Kumar
अभी भी दुर्भाग्यपूर्ण है किसानों की स्थिति, सीधी आर्थिक मदद जरूरीः शांता कुमार

शिमला। मोदी सरकार को अपने ही सांसदों से झटका लगने का सिलसिला बरकरार है। हिमाचल प्रदेश के दिग्गज बीजेपी नेता और कांगड़ा से सांसद शांता कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने देश में किसानों की स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। धर्मशाला में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, 'हमें देश के किसानों की स्थिति के बारे में सोचना चाहिए।' उन्होंने अपने पत्र में किसानों की खुदकुशी का मसला भी उठाया और विदेशों से सीखने की बात भी कही।

किसानों को मिली सीधी आर्थिक मदद

शांता कुमार ने कहा कि देश में किसानों को इस कदर नकार दिया गया है कि साढ़े तीन लाख से अधिक अन्नदाताओं ने खुदकुशी कर ली। पत्र में उन्होंने किसानों को सीधी आर्थिक मदद देने की जरूरत पर जोर दिया। इसके लिए उन्होंने कुछ दूसरे देशों का भी उदाहरण दिया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए ने किसानों के लिए कई योजनाएं बनाई हैं, लेकिन उनका फायदा पहुंचने में अभी समय लगेगा।

अपनी ही कमिटी की सिफारिशें लागू करने की मांग उठाई

दो बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रहे शांता कुमार ने तीन साल पूर्व उनकी अध्यक्षता में बनी कमिटी की उस रिपोर्ट की सिफारिशों को भी लागू करने की मांग उठाई है जो कि वे प्रधानमंत्री को सौंप चुके हैं। हालांकि, शांता कुमार ने यह भी कहा कि एनडीए सरकर ने अपने चार वर्षों के कार्यकाल में किसान हित से जुड़े कई फैसले लिए और योजनाएं बनाई हैं। लेकिन इन योजनाओं का फायदा हर किसान तक पहुंचने में अभी वक्त लगेगा।

ये हैं शांता कमिटी की प्रमुख सिफारिशें

- देश में अनाज की खरीद, भंडारण और वितरण की मौजूदा व्यवस्था में तमाम खामियां हैं।
- अनाज की खरीद का मामला एफसीआई (फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) को राज्यों को सौंप देना चाहिए।
- एफसीआई को वहीं ध्यान देने की जरूरत है जहां सरकारी खरीद नहीं हो पा रही है।
- अतिरिक्त अनाज के स्टोरेज का काम वेयर हाउसिंग से जुड़ी एजेंसियों को आउटसोर्स करना चाहिए ताकि उसे सड़ने से बचाया जा सके।
- गोदामों की बजाए निजी क्षेत्र को मॉडर्न स्टोरेज बनाना चाहिए।
- पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और मध्य प्रदेश में एफसीआई को चावल खरीद बंद करनी चाहिए, क्योंकि ये राज्य खुद सक्षम हैं।
- एफसीआई को यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों पर फोकस करना चाहिए, क्योंकि वहां के किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी करीब 25 फीसदी सस्ता चावल बेचने को मजबूर हैं।
- देश में सरकारी खरीद का लाभ सिर्फ छह फीसदी किसानों तक पहुंच रहा है।
- एफसीआई की जगह एजेंसी फॉर इनोवेशन इन फूड मैनेजमेंट सिस्टम बनानी चाहिए।
- 10 लाख से अधिक आबादी वाले 52 शहरों में फूड सब्सिडी का भुगतान नकद हो सकता है।

Published on:
07 Jun 2018 08:31 am
Also Read
View All
Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में टूट रही EPS की पार्टी AIADMK, एक और विधायक ने दिया इस्तीफा; जानें अब तक कितने MLA ने छोड़ी पार्टी

Modi Cabinet Reshuffle: मोदी कैबिनेट से धर्मेंद्र प्रधान के साथ हरदीप सिंह पुरी की भी क्यों हो सकती है छुट्टी? जानें वजह

पश्चिम बंगाल विधानसभा में आज UCC बिल पर TMC के दोनों गुटों की होगी राजनीतिक परीक्षा, अब तक किन-किन राज्यों में हो चुका पास?

मोदी कैबिनेट विस्तार में किसकी लगेगी लॉटरी? शिवसेना का दिखेगा दम या NCP को मिलेगा ‘सब्र का फल’

Mayor Audio Viral Case: महापौर और भाजपा जिलाध्यक्ष का वसूली वाला कथित ऑडियो हुआ था वायरल, जांच कराने एसपी से मिले कांग्रेसी